15 January 2013

साल 2013 की पहली 13 तस्‍वीरें

साल के पहले दिन मम्‍मा-पापा ने छुट्टी ले रखी थी ताकि वो मुझे घुमाने ले जायें। उस दिन हम सबेरे-सबेरे संजय गांधी नेशनल पार्क गये, जो बोरीवली ईस्‍ट में ही है। हल्‍की सर्दियों के दिन। और धूप में नहाया नेशनल पार्क।

तय हुआ कि सबसे पहले मैं टॉय-ट्रेन की सैर करूंगा। इसलिए हम पहुंच गये कृष्‍णगिरी स्‍टेशन। वहां मम्‍मा-पापा ने टिकिट लिया और मैं ट्रेन का इंतज़ार करने लगा।

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वॉच में टाइम देखा। अरे टाइम तो हो गया। पर अब तक ट्रेन क्‍यों नहीं आयी। आजकल सारी ट्रेनें इतनी लेट क्‍यों चलती हैं। मैंने सोचा, शायद कोहरे की वजह से लेट हो गयी होगी। तभी ट्रेन का हॉर्न सुनाई दिया। उस तरफ देखा तो यलो कलर की ट्रेन आ रही थी।

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बस ट्रेन देखकर मज़ा आ गया। मैंने सोचा कि दौड़कर चढ़ जाऊं। पर मम्‍मा ने समझाया कि चलती ट्रेन या बस में ना तो चढ़ना चाहिए और ना ही उतरना चाहिए। क्‍या आपको आपकी मम्‍मा ने ये बात सिखायी है।

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जब ट्रेन रूक गयी तो में कोच नंबर वन में चढ़ गया। और एकदम किनारे की सीट पर बैठ गया।
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फिर पापा ने बताया कि देखो ट्रेन पर लायन बना है। मैंने इस लायन से बात की। इसके हालचाल पूछे। उसने बताया कि आजकल उसे काफी ठंड लग रही है।

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टॉय ट्रेन की सैर करते हुए मुझे बहुत सारे एनिमल्‍स दिखे। बड़ा मज़ा आया। इसके बाद हम झील के उस पार गये। जहां बोटिंग हो रही थी।
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मम्‍मा ने कहा कि थोड़ी देर यहां बैठें। तभी एक छोटा बच्‍चा गीली मूंगफली बेच गया। बस हमने वहां बैठकर मज़े से मूंगफली खायी। मैंने भी खाई। सच्‍ची।

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फिर बारी आयी फुटबॉल खेलने की। तो गाड़ी से फुटबॉल निकाली और पापा के साथ मैं खूब खेला।

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तभी मुझे एक बड़ा-सा पत्‍थर पड़ा नज़र आया। मैंने सोचा कि इसे रास्‍ते से हटा दूं। आजकल मैं 'छोटा-भीम' देखता हूं। मैं भी उसकी तरह ताक़तवर हूं। इसलिए कोशिश करने में क्‍या हर्ज है।


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एक अंकल ने देखा तो वो भी हेल्‍प करने के लिए आ गये। पर हम दोनों शायद सब्‍ज़ी नहीं खाते ना, इसलिए इतने ताक़तवर नहीं हैं। पत्‍थर हम लोगों से नहीं उठा। मैंने उस पत्‍थर से कह दिया कि मैं ठीक से खाना खाके ताक़तवर बनकर आऊंगा। फिर तुम्‍हें उठाकर किनारे रख दूंगा। तब तक कहीं मत जाना।

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पर उस पत्‍थर को सबक़ सिखाना बाक़ी रह गया था। इसलिए मैं उस पत्‍थर पर बैठ गया। और पापा ने फोटो खींच ली।
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अब मैं बहुत थक गया था और मेरी फुटबॉल भी थक गयी थी। तो हम दोनों वहीं मैदान में आराम करने लगे।
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तो ये था मेरा नये साल का पहला दिन। और 2013 की पहली 13 तस्‍वीरें।
आप सबको देर से नया साल मुबारक।

जादू क्‍यों

हम हैं जादू के मम्‍मी-पापा ।
'जादू' अपनी मुस्‍कानें लेकर आया है हमारी दुनिया में ।
हम चाहते हैं कि ये मुस्‍कानें हम दुनिया के साथ बांटें ।

जादुई दिन

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