15 August 2013

जादू का Independence day.

independence day के मौक़े पर हम सब बच्‍चों को 'तिरंगी पोशाक' यानी Tricolour पहनकर आने को कहा गया था। सुबह तैयार होकर जब मैं निकला तो बारिश हो चुकी थी। और मौसम बड़ा खुशगवार था। मैंने पापा से कहा जल्‍दी से मेरे कुछ फोटोज़ ले लीजिए।

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इसके बाद मैंने पापा से कहा, मेरे ज़ेहन में एक बात आयी है। आजकल मेरे झेन (ज़ेहन) में पापा की तरह अकसर ही कोई ना कोई बात ज़रूर आती है। मैंने कहा, मैं जादू हूं, मैं कुछ भी कर सकता हूं। देखिए मैं आंखें बड़ी बड़ी करके फोटो भी खिंचवा सकता हूं।

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मेरे अंदर अकसर ही हंसी भर जाती है। एक दिन तो क्‍लास में टीचर पढ़ा रही थीं। तभी मेरे अंदर हंसी भर गयी। इतनी ज्‍यादा भरी कि रूक ही नहीं रही थी। मैं हंस पड़ा। टीचर ने पूछा--क्‍या हुआ। मैंने कहा, मेरे अंदर हंसी भर गयी थी। देखिए ना यहां भी कितनी सारी हंसी भर गयी है मेरे अंदर। क्‍या आपके अंदर भी कभी हंसी भरी है।
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बहुत बातें हों गयीं। आप सभी को Indenpendence day यानी आज़ादी का दिन मुबारक हो। पता है मैंने कल तिरंगा झंडा बनाकर उस पर कलर किया तो टीचर ने मुझे स्‍माइली दी। और बोला वेरी गुड।
Smile 

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03 June 2013

नये स्‍कूल में पहला दिन...

बहुत दिनों बाद आपसे बात हो रही है। दरअसल इस बीच मैं बहुत बिज़ी रहा। अब मेरा प्‍ले-स्‍कूल फिनिश हो चुका है। और मेरा एडमिशन नये बड़े स्‍कूल में हो चुका है। बल्कि समर-क्‍लासेस फिनिश भी कर लीं। और फिर एक महीने की छुट्टियां बिताकर मैं अब आज से नये स्‍कूल में जाने लगा हूं।

 

आज जब मैं सुबह सुबह स्‍कूल जाने के लिए तैयार हुआ तो जाने किस सोच में था।
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लेकिन फिर स्‍कूल का  पहला दिन याद आया। समर-स्‍कूल का। बड़ी सी बिल्डिंग। वहां की मौज-मस्‍ती। तो बस खुश हो गया और दौड़ पड़ा। IMG_0884
अरे मैंने आपको अपना स्‍कूल तो दिखाया ही नहीं।
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ये देखिए समर स्‍कूल का पहला दिन। प्‍ले-स्‍कूल के बाद एकदम नये बड़े स्‍कूल में जाना। और वॉचमैन अंकल का मुझे ले जाना। मम्‍मा पीछे रह गयीं बड़े से गेट के पीछे। पापा के पास कैमेरा था। उन्‍होंने ये तस्‍वीर खींची।
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उस दिन की मेरी और मम्‍मा की ये तस्‍वीर स्‍कूल के गेट की है।
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अब आज की तस्‍वीर देखिए। बस स्‍टॉप पर मैंने बस का इंतज़ार किस तरह किया।
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और ये मत सोचिए कि मैं अपनी सोच में ही डूबा और परेशान रहा। मैंने मस्‍ती भी की। और हंसा-मुस्‍कुराया भी।
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और फिर बस में बैठकर मैंने पापा से बाय-बाय किया इस तरह
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अब स्‍कूल में क्‍या चल रहा है ये सब कल बताऊंगा। बाय बाय।

आपका स्‍कूल कब शुरू हो रहा है। आपने अपना बैग, शूज, यूनिफॉर्म वग़ैरह तैयार किये या नहीं। 2013

15 January 2013

साल 2013 की पहली 13 तस्‍वीरें

साल के पहले दिन मम्‍मा-पापा ने छुट्टी ले रखी थी ताकि वो मुझे घुमाने ले जायें। उस दिन हम सबेरे-सबेरे संजय गांधी नेशनल पार्क गये, जो बोरीवली ईस्‍ट में ही है। हल्‍की सर्दियों के दिन। और धूप में नहाया नेशनल पार्क।

तय हुआ कि सबसे पहले मैं टॉय-ट्रेन की सैर करूंगा। इसलिए हम पहुंच गये कृष्‍णगिरी स्‍टेशन। वहां मम्‍मा-पापा ने टिकिट लिया और मैं ट्रेन का इंतज़ार करने लगा।

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वॉच में टाइम देखा। अरे टाइम तो हो गया। पर अब तक ट्रेन क्‍यों नहीं आयी। आजकल सारी ट्रेनें इतनी लेट क्‍यों चलती हैं। मैंने सोचा, शायद कोहरे की वजह से लेट हो गयी होगी। तभी ट्रेन का हॉर्न सुनाई दिया। उस तरफ देखा तो यलो कलर की ट्रेन आ रही थी।

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बस ट्रेन देखकर मज़ा आ गया। मैंने सोचा कि दौड़कर चढ़ जाऊं। पर मम्‍मा ने समझाया कि चलती ट्रेन या बस में ना तो चढ़ना चाहिए और ना ही उतरना चाहिए। क्‍या आपको आपकी मम्‍मा ने ये बात सिखायी है।

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जब ट्रेन रूक गयी तो में कोच नंबर वन में चढ़ गया। और एकदम किनारे की सीट पर बैठ गया।
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फिर पापा ने बताया कि देखो ट्रेन पर लायन बना है। मैंने इस लायन से बात की। इसके हालचाल पूछे। उसने बताया कि आजकल उसे काफी ठंड लग रही है।

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टॉय ट्रेन की सैर करते हुए मुझे बहुत सारे एनिमल्‍स दिखे। बड़ा मज़ा आया। इसके बाद हम झील के उस पार गये। जहां बोटिंग हो रही थी।
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मम्‍मा ने कहा कि थोड़ी देर यहां बैठें। तभी एक छोटा बच्‍चा गीली मूंगफली बेच गया। बस हमने वहां बैठकर मज़े से मूंगफली खायी। मैंने भी खाई। सच्‍ची।

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फिर बारी आयी फुटबॉल खेलने की। तो गाड़ी से फुटबॉल निकाली और पापा के साथ मैं खूब खेला।

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तभी मुझे एक बड़ा-सा पत्‍थर पड़ा नज़र आया। मैंने सोचा कि इसे रास्‍ते से हटा दूं। आजकल मैं 'छोटा-भीम' देखता हूं। मैं भी उसकी तरह ताक़तवर हूं। इसलिए कोशिश करने में क्‍या हर्ज है।


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एक अंकल ने देखा तो वो भी हेल्‍प करने के लिए आ गये। पर हम दोनों शायद सब्‍ज़ी नहीं खाते ना, इसलिए इतने ताक़तवर नहीं हैं। पत्‍थर हम लोगों से नहीं उठा। मैंने उस पत्‍थर से कह दिया कि मैं ठीक से खाना खाके ताक़तवर बनकर आऊंगा। फिर तुम्‍हें उठाकर किनारे रख दूंगा। तब तक कहीं मत जाना।

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पर उस पत्‍थर को सबक़ सिखाना बाक़ी रह गया था। इसलिए मैं उस पत्‍थर पर बैठ गया। और पापा ने फोटो खींच ली।
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अब मैं बहुत थक गया था और मेरी फुटबॉल भी थक गयी थी। तो हम दोनों वहीं मैदान में आराम करने लगे।
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तो ये था मेरा नये साल का पहला दिन। और 2013 की पहली 13 तस्‍वीरें।
आप सबको देर से नया साल मुबारक।

जादू क्‍यों

हम हैं जादू के मम्‍मी-पापा ।
'जादू' अपनी मुस्‍कानें लेकर आया है हमारी दुनिया में ।
हम चाहते हैं कि ये मुस्‍कानें हम दुनिया के साथ बांटें ।

जादुई दिन

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