26 February 2012

प्‍यारे जादू को Happy Birthday.

तीन बरस........
कितनी जल्‍दी बीत गए।
जादू की शरारतों, उसकी मासमूमियत से रोशन है हमारी दुनिया।


जादू....तुम्‍हें जन्‍मदिन बहुत मुबारक।
....................मम्‍मा-पापा


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07 February 2012

जादू बन गया मिल्‍क-मैन

आज जादू मिल्‍क-मैन बनकर गया था।

जी हां 'दूधवाला'
पता है आज पापा-मम्‍मा बहुत परेशान हुए।
क्‍यों।
इसलिए क्‍योंकि इस तस्‍वीर में जो हरा जैकेट मैंने पहन रखा है ना
उसे जादू ने कहीं छिपा दिया था। और पापा ने आज बड़े प्‍यार से जादू को धोती कुर्ता पहनाया था। पर ऐन वक्‍त पर जैकेट नहीं मिली।
फिर ढूंढने का सिलसिला शुरू हुआ। और बड़ी मुश्किल से ये जैकेट मिला।


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दूध ले लो दूध। पापा की डेस्क पर चढ़कर जादू बेच रहा है दूध।
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और अब दूध के बर्तन पर ज़ोर-आज़माईश।


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एक बार फिर---अरे भैया दूध ले लो दूध। बड़ी मुश्किल है। कोई कहता ही नहीं।
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अच्‍छा चलता हूं। डायरी में देखना है कल क्‍या बनकर जाना है स्‍कूल में।


क्‍या आप कभी मिल्‍क-मैन बने।

05 February 2012

जादू के स्‍कूल में स्‍पोर्ट्स-मीट

शनिवार को मेरे स्‍कूल में स्‍पोर्ट्स डे था।

जादू कुछ दिन पहले से ही तैयारी कर रहा था। पापा को तब पता चला जब मैं एक दिन स्कूल से आया और पापा से बोला--पापा रेडी स्‍टेडी गो।
दौडिए। पापा समझ गए कि मेरे स्‍कूल में रेस की प्रैक्टिस होती है।

फिर तो अकसर ही पापा के साथ मैंने रेस की।

बल्कि रोज़ स्‍कूल से लौटने पर पापा और मेरी रेस होती है कि बिल्डिंग के गेट से लिफ्ट तक सबसे पहले कौन पहुंचेगा। रोज़ मैं ही जीतता हूं। पापा हार जाते हैं। सच्‍ची।

हम लोग सुबह-सुबह नौ बजे शिम्‍पोली में ग्राउंड में पहुंचे तो सबसे पहले नज़र पड़ी इस बैनर पर।
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और फिर वो चीज़ नज़र आई जो मुझे सबसे ज्‍यादा प्‍यारी लगती है। जी हां बलून्‍स। जादू को बलून बहुत पसंद हैं। पापा अकसर मुझे बलून दिला देते हैं। और मैं उससे बहुत खेलता हूं। स्‍कूल में बलून्‍स से कितनी अच्‍छी सजावट की गयी थी। और गैस वाले बलून का क्‍लस्‍टर तो उड़ भी रहा था।

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मम्‍मा कहती हैं कि मौसम सर्दियों का है। पर उस दिन ग्राउंड में तेज़ धूप थी। और सब बच्‍चे अपने मम्‍मी-डैडी के साथ बैठे थे। इवेन्‍ट्स शुरू करने का इंतज़ार कर रहे थे।
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और ये देखिए जादू की रेस।
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और रेस के बाद आराम और ड्रिंक्‍स
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लीजिए ये रही दूसरी रेस। स्‍कूल-बैग तैयार करने की रेस। टीचर समझा रही हैं कि इस रेस में मम्‍मा-पापा को क्‍या करना है।
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और जादू का हाथ पकड़कर ये दौड़ी मम्‍मा

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और अब पापा दौड़ रहे हैं। सब सामान उठाकर बैग तक जाना है। एक हाथ से मुझे पकड़े रखना है।

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जल्‍दी जल्‍दी जल्‍दी कीजिए पापा।

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रेस खत्‍म और नाश्‍ता शुरू। धूप इतनी थी कि मम्‍मा ने मुझे अपना दुपट्टा उढ़ा दिया।

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और ये रहा सर्टिफिकेट और मेडल। तालियां।

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बस बहुत हुआ। अब मैं घर जा रहा हूं। बाय सी यू।

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जादू क्‍यों

हम हैं जादू के मम्‍मी-पापा ।
'जादू' अपनी मुस्‍कानें लेकर आया है हमारी दुनिया में ।
हम चाहते हैं कि ये मुस्‍कानें हम दुनिया के साथ बांटें ।

जादुई दिन

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