12 September 2012

विलेज-मार्केट, गोट, हेन और फिश।

मुंबई के गोराई इलाक़े में है एक खाड़ी।
अरब सागर के समुद्र का हुक जैसे पतला हिस्‍सा।
उस पार है एस्‍सेल वर्ल्‍ड। और गोराई गांव। मनोरी गांव और अन्‍य छोटी बस्तियां। इस पार बोरीवली पश्चिम का इलाक़ा है।

ठीक खाड़ी पर सप्‍ताह के कुछ दिना विलेज-मार्केट लगता है। और अकसर मैं पापा के साथ वहां जाता हूं। सब्जियां ख़रीदने के लिए।
इस बार तो बड़ा मज़ा आया। आज सबेरे जब मैं वहां पहुंचा तो मेरा इंतज़ार कर रही थी एक GOAT. मुझे जानवर बहुत पसंद हैं। गोट देखते ही मैं उसकी तरफ भागा और उससे हाय किया। मैंने पूछा, हाय गोट कैसी हो। उसने बताया कि मैं ठीक ही हूं।


DSC_0784
मैंने पूछा, ठीक ही हो, मतलब। तो गोट बोली--असल में आजकल उसके खाने-पीने को कुछ नहीं मिलता। बस काग़ज और पॉलीथीन मिलते हैं। इसलिए वो सब्जियां खाने के चक्‍कर में विलेज मार्केट आ जाती है।

DSC_0785
ये सुनकर मैंने कहा, अरे तुमने पहले बताया होता। आइंदा भूख लगे तो मेरी बिल्डिंग में आ जाना। मैं तुम्‍हें हरी घास खिलवाऊंगा। और अगर तुम्‍हें चाहिए तो रोटी भी दे सकता हूं। गोट बहुत खुश हो गयी।

DSC_0788
गोट से बाय करने के बाद मैं आगे बढ़ा ही था कि वहां एक मुर्गी मिल गयी। अरे H FOR HEN…HEN.और एक मुर्गा़ भी। बस कुकडूं-कूं करके वो मेरे साथ खेलने लगे। उसका फोटो नहीं ले पाया। क्‍योंकि वो तो भागे जा रहे थे। आगे खाड़ी है। वहां बहुत सारा पानी है। पता है आजकल मुंबई में बारिश बहुत हो रही है। इसलिए पानी बहुत भर गया है। मैंने पापा से बताया, देखिए पापा सारे समुद्दर भर गये हैं। देखा....। और दूर एक बोट जा रही है। ध्‍यान से देखिए इस फोटो में।
DSC_0791
मैं तो जादू हूं ना। मुझे तो सब पता है। इसलिए मैंने पापा को बताया कि इस खाड़ी में एक क्रोकोडाइल रहता है। वो फिश को खा जाता है। पता है मुझे कैसे पता चला। अरे पंचतंत्र वाली डीवीडी से। मैं अकसर देखता हूं ना। तो यहां समुद्दर में सारी फिश क्रोकोडाइल ने खा ली हैं। और  पता है यहां एक मंकी आता है। वो क्रोकोडाइल पर जंप लगा देता है। ......................मैं स्‍टोरी सुना रहा था और पापा मोबाइल से
फोटो ले रहे थे।

DSC_0798
पता है वहां दूर उस किनारे पर एक विपश्‍यना पैगोडा भी है। वो उस पार। मैंने पापा से कहा है मुझे वहां ले चलें।

DSC_0799
पता है ये वही फिश है जो क्रोकोडाइल ने खा ली थी। देखिए कितनी बड़ी बड़ी फिश।
DSC_0807
यहां सब्जियां, फिश, क्रैब सब बिकता है।

मैंने सब्जियां लीं। और घर आ गया। आपने देखा। मैं पॉलीथीन का इस्‍तेमाल नहीं करता। कपड़े का थैला लेकर जाता हूं। अच्‍छा अब ब्रेक-फास्‍ट तैयार है। मैं तो चला। आप भी ब्रेक-फास्‍ट कर लीजिए। और बताईये आपने क्‍या खाया।
DSC_0809

अरे हां। सायकिल वाली फोटोज़ कल।
एक बात तो कहना भूल ही गया---मैं जादू हूं ना, मैं कुछ भी कर सकता हूं।

7 comments:

Anonymous said...

jadoo u r an ecofriendly guy.....good dear keep it up.....nice pictures.....-niharika lucknow

Govind Madhaw said...

wah....imagination and creativity with innocence...

Anonymous said...

VAAH JADOOO JI YATRA VRITANT LIKHNE KE LIYE....
RAHUL SANKRITYAN KI RASTE CHAL RAHE HO....

ALL THE BEST...

Ramesh Genwa said...

VAAH JADOOO JI YATRA VRITANT LIKHNE KE LIYE....
RAHUL SANKRITYAN KI RASTE CHAL RAHE HO....

ALL THE BEST...
Ramesh Genwa
Jodhpur

mukti said...

जादूजी को सब पता है...:)

Anonymous said...

बेहतरीन जादू जी .......... वाह ......

सुनील आर करमेले
इन्‍दौर

Anonymous said...

जादू ....अपने जादू से बता सकता है ...पहले मुर्गी आई या अंडा ???? ना हो तो अपने अम्मी-अब्बा से पूछ लेगा . हे के नी ..!
उदय सिंह टुंडेले, इंदौर

जादू क्‍यों

हम हैं जादू के मम्‍मी-पापा ।
'जादू' अपनी मुस्‍कानें लेकर आया है हमारी दुनिया में ।
हम चाहते हैं कि ये मुस्‍कानें हम दुनिया के साथ बांटें ।

जादुई दिन

Lilypie - Personal pictureLilypie Second Birthday tickers

  © Free Blogger Templates Spain by Ourblogtemplates.com 2008

Back to TOP