11 September 2012

'पिचकारी ली जाये या वॉच'

आज जादू को पता नहीं कहां से एक पुरानी पिचकारी मिल गयी।
फिर उसमें पानी भरने की शरारत शुरू हुई। जादू तो हैं ही खुराफाती। बेडरूम की गैलेरी में जा पहुंचे। और वहां लगे split AC के पाइप से पानी निकालने की कोशिश की। पर उसमें तो पानी था नहीं। इसलिए मम्‍मी-पापा के नज़र से बचकर चुपचाप बेसिन से पानी भर लिया गया।


अब पानी की बौछार शुरू। यहां-वहां गीला करने के बाद पता नहीं कैसे

कैसे उसके पानी भरने वाले चैम्‍बर का ढक्‍कर गुमा दिया गया।
और अब नयी पिचकारी की जिद शुरू कर हो गयी। पापा के पास आकर बोले, पापा मुझे नयी पिचकारी दिलवाईये। पापा ने समझाया, ‘बेटा पिचकारी तो होली के वक्‍त मिलती है’। जादू का जवाब था, ‘नहीं ना, अभी भी मिलेगी। टॉयज़ की शॉप पर।’
हमने पूछा—‘अरे पर कहां’।

तो जादू ने रास्‍ता बताना शुरू कर दिया, ‘पहले राइट, फिर लेफ्ट, फिर लेफ्ट और बाद में यू-टर्न लीजिए, टॉयज़ की शॉप आ जायेगी। वहां पिचकारी मिल जायेगी।‘।
पापा ने नाउम्‍मीदी के साथ समझाया। पर अचानक हैरत भरे तरीक़े से समझ भी आ गया।
उसके बाद नयी डिमान्‍ड—‘पापा मुझे वॉच दिलवाईये। पिचकारी नहीं चाहिए। वॉच चाहिए। जैसी आप लगाते हैं वैसी वॉच’
फिर एक और तीर छोड़ा—‘मम्‍मा आप यहीं रूकिए, जादू पापा के साथ वॉच लेने जा रहा है’।

और जादू गये पापा के साथ वॉच लेने। रेड कलर की वॉच पसंद की गयी।
देखिए कैसी लग रही है।

DSC_0736
और साथ में इन दिनों umbrella के साथ जादू की मस्‍ती की दो तस्‍वीरें।
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ताज़ा ख़बर:
जादू की नई सायकिल आ गयी है।
संडे को।
सायकिल के साथ जादू की तस्‍वीरें जल्‍दी ही।

बताईये आपने वॉच और सायकिल ख़रीदी या पिचकारी।

5 comments:

Tulika Sharma said...

छाता तो हमारे पास भी है ...हमें जादुई घड़ी अच्छी लगी बहुत

mukti said...

जादू की जादुई दुनिया :)

PD said...

मेरा पहला कमेन्ट शायद स्पैम में चला गया लगता है.

प्रवीण पाण्डेय said...

जादू की दुनिया बहुत है प्यारी लगती है..

Anonymous said...

हां प्रशांत भैया। आप फिर से कमेन्‍ट कर दीजिए। --------जादू।

जादू क्‍यों

हम हैं जादू के मम्‍मी-पापा ।
'जादू' अपनी मुस्‍कानें लेकर आया है हमारी दुनिया में ।
हम चाहते हैं कि ये मुस्‍कानें हम दुनिया के साथ बांटें ।

जादुई दिन

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