02 September 2011

कुर्ते-पैज़ामे में कैसा लगता हूं मैं?

बहुत सारी छुट्टियां मनाई मैंने। ईद आई। गणेश चतुर्थी आई।

ईद पर दादा-दादी के घर नहीं जा सका। खांसी बढ़ गयी थी ना। इसलिए।

फिर मैंने फोन लगाकर दादा-दादी सबसे बात की। पोयम सुनाई। एक नहीं सब। जितनी आती थीं। सब सुनाई। बबलू चाचा से भी बात की और उन्‍हें 'बबलू हाथ' वाली कविता सुनाई।

:)

 

 

 

 


आज स्‍कूल में पारंपरिक पोशाक का दिन है। देखिए मेरा नया-वाला कुर्ता-पैज़ामा।
मैं कैसा लग रहा हूं स्‍कूल जाते हुए।
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सोच रहा हूं कि ये बारिश क्‍यों होती है। कल तो मैंने बारिश को समझाया था, खिड़की पे खड़े होके---'ऐ बारिश। पानी पी लो। और बारिश भीगता मत। संभालना। छाता लेकर जाना'। कितनी बारिश हो रही थी कल। मैंने बारिश से बहुत बातें कीं।
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हे भगवान। ये मुझे रोज़ स्‍कूल क्‍यों जाना पड़ता है।


छुट्टियां और ज़्यादा क्‍यों नहीं होतीं।
मम्‍मा-पापा कहते हैं कि वैसे ही जादू के स्‍कूल में छुट्टियां बहुत होती हैं।


अब उन्‍हें कौन समझाए। (वैसे किसी से कहना मत, मुझे स्‍कूल में मज़ा बहुत आता है)


वो तो बस जाते हुए थोड़ा 'ड्रामा' करता हूं मैं।
आज तो नहीं किया। हंसते हंसते गया।
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सच्‍ची हंसते हंसते गया। मुस्‍कुराते हुए। ऐसे।
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पापा ने आज मेरे बहुत सारे फोटो खींचे। ये वाला कित्‍ता मज़ेदार फोटो है ना।


अरे नहीं नहीं मैं गुस्‍सा थोड़ी हूं। मैं तो बाईं तरफ देखते हुए कुछ 'सोच' रहा हूं। 
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पापा बर्ड स्‍कूल नहीं जाती क्‍या। वो देखो कहां उड़ रही है। तलो बर्ड स्‍कूल तलो 'जादू' के साथ। 
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अब ज़रा ये फोटो भी देखिए


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लेकिन इन फोटोज़ से कनफ्यूज़ होने की ज़रूरत नहीं है।


मैं बस अपनी अगली शरारत के बारे में सोच रहा हूं।
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मम्‍मा कहती हैं कि मैं जितना सीधा दिखता हूं उतना हूं नहीं।
वैसे आज जैसे ही मम्‍मा तैयार करके किसी काम से किचन में गयीं। मैंने काजल की डिब्‍बी उठाई और पूरे मुंह पर पोत ली। फिर क्‍या था। मम्‍मा वापस आईं तो उन्‍होंने सिर पर हाथ रख लिया। बोलीं--जादू क्‍या किया ये। उसके बाद....कुछ नहीं। मम्‍मा ने मॉश्‍चराइज़र लगाके जादू को अच्‍छा बच्‍चा बनाया। काजल छुड़ाया। हे हे हे।
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स्‍कूल में क्‍या हुआ ये वापस लौटकर बताऊंगा।
मैं जादू हूं ना मैं कुछ भी कर सकता हूं।
फिलहाल। आपको ईद मुबारक। सिंवई खा लेना। ठीक है।
और हां। पानी भी पी लेना। ओ.के.बाय.सी.यू.।


भीगना मत। फ्लाइंग किस।

जादू क्‍यों

हम हैं जादू के मम्‍मी-पापा ।
'जादू' अपनी मुस्‍कानें लेकर आया है हमारी दुनिया में ।
हम चाहते हैं कि ये मुस्‍कानें हम दुनिया के साथ बांटें ।

जादुई दिन

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