16 August 2011

जादू का स्‍वतंत्रता दिवस

आज जादू के स्‍कूल में स्‍वतंत्रता दिवस का समारोह होने वाला है।
तीन चार दिन की छुट्टी के बाद जादू जी आज स्‍कूल गए हैं। ज़ाहिर है कि उनका मन नहीं था स्‍कूल जाने का। जब भी पापा कहते, चलो जादू तैयार कर दें, स्‍कूल जाना है। तो जादू का जवाब यही होता--नईं दाना है जादू को स्कूल।

किसी तरह पापा ने जादू को समझा-बुझाकर तैयार किया है। जादू आजकल इसी अदा में बैठते हैं। लेकिन चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ़ दिख रही हैं। मानो कह रहे हों कि आज तो पापा स्‍कूल भेजकर ही रहेंगे।

 

 


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पापा ने जादू को हंसाने की कोशिश भी की। पर जादू खुलकर नहीं हंसे। देखिए नकली मुस्‍कुराहट का जादू। और जादू की नकली मुस्‍कान।

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अब जादू नीचे आ गये हैं। आज मम्‍मा ऑफिस में हैं। पापा जादू को बस में बैठाने आए हैं। यहां भी जादू का मन नहीं है स्‍कूल जाने का। पर नया कुर्ता पैज़ामा पहनने का मन खूब था। पूछा, पापा ये नया वाला है। फिर घर पर कुछ स्‍टंट भी किये और ये बोलते हुए किये, कि संभालना जादू नहीं गिरेगा ना। नहीं गिरेगा। नहीं लगेगी। जादू अभी भी चिंता में मगन हैं।


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और ये बस आने से ठीक पहले की तस्‍वीर। जादू रोते हुए स्‍कूल गए हैं।

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तस्‍वीरों पर क्लिक करके उन्‍हें बड़ा किया जा सकता है।

जादू क्‍यों

हम हैं जादू के मम्‍मी-पापा ।
'जादू' अपनी मुस्‍कानें लेकर आया है हमारी दुनिया में ।
हम चाहते हैं कि ये मुस्‍कानें हम दुनिया के साथ बांटें ।

जादुई दिन

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