10 April 2011

देवेंद्र मामा की कविता: जादू जी जब पहुंचे फ्रांस

देवेंद्र मामा इलाहाबाद में हैं। 
मेरी खोज-खबर लेते रहते हैं।
मम्‍मा मेरे बारे में हर छोटी बड़ी बात मामा को बताती हैं।
पिछले कुछ महीनों से मामा मेरी हर एक शरारत पर कविताएं लिख रहे हैं। पापा ने उन्‍हीं की आवाज़ में मोबाइल फोन पर रिकॉर्ड भी किया है। पर बिज़ी थे इसलिए पापा उन्‍हें पोस्‍ट नहीं कर पाए। 


ये रही मामा की मेरी शरारतों पर लिखी गयी कविताओं की सीरीज़ की पहली कविता। दरअसल बाथरूम में घंटों अपने मिनी स्‍वीमिंग पूल में मुझे छई छप छई करना बहुत पसंद है। मम्‍मा ने जब मामा को ये बात विस्‍तार से बताई  तो मामा ने ये कविता लिख डाली।


मामा की आवाज़ में सुनिए



एक दिन जादू पहुंचे फ्रांस
लगे वहां पर करने डांस
मम्‍मी पापा पीछे दौड़े
नहीं पकड़ने का कोई चांस
पेरिस से फिर लंदन पहुंचे
टेम्‍स नदी में उतर पड़े
नहीं जानते थे तैराकी
लगे डूबने खड़े खड़े
तब तक पीछे पुलिस आ गयी
पकड़ उठे तब जादू जी

पासपोर्ट जब पुलिस ने मांगा
घबराए थे जादू जी
सिट्टी पिट्टी गुम को गयी
बुरे फंस गए जादू जी
हकलाती आवाज़ में बोले
मुझे बचाओ बाबू जी
अच्‍छा हुआ जो फोन ऑन था
बांध लिया था टाई में
आवाज़ सुनी नेट पर मम्‍मी ने
पांव फंसे थे खाई में
सर्वाइलेन्‍स की मदद से जाकर


जादू जी लोकेट हुए

भारत में मम्‍मी पापा से
किसी तरह अपडेट हुए
पासपोर्ट बनवाकर सीधे
पापा फिर लंदन पहुंचे
सूटकेस में दो थे कपड़े
संग लिये तब मम्‍मी पहुंचीं 
जादू जी थे सही सलामत 
फिर भी वे थे कांप रहे थे
हवालात में बैठे बैठे
इधर उधर थे ताक रहे
टॉफी बिस्किट पड़े हुए थे
नहीं छुआ था काजू भी
देर लगायी मम्‍मी ने क्‍यों
सोच रहे थे जादू जी

बाथिंग टब में छपकी छपकी 
खेला करते थे जब भी
लिये तौलिया पहुंचा करतीं
मम्‍मी जी अकसर तब भी
आंख भर उठी जादू जी की 
मम्‍मी का भी दिल भर आया
उन्‍हें देखकर पापा के संग
मन उनका पुलकित हो आया
 

02 April 2011

This Time For “Jadoo”.

आज वर्ल्‍ड-कप का फ़ाइनल है। भारत और श्रीलंका का मुक़ाबला। और कल रात से मैंने एक नया शब्द सीखा है। पता है ये कौन-सा शब्‍द है—'इंडिया'।

 



कल जब पापा ने मुझसे कहा--'जादू बोलो, इंडिया'। अरे इत्‍ता आसान शब्‍द। मैंने फ़ौरन मुंह चौड़ा करते हुए कहा--'इंदिया'। और फिर सारी शाम घर में 'इंदिया इंदिया' की आवाज़ें गूंजती रहीं। पापा समझते नहीं हैं। मैं जादू हूं ना...मैं कुछ भी कर सकता हूं। अरे मुझे इंडिया को चीयर-अप करना है। मेरा पहला वर्ल्ड कप है ना। कम से कम इतनी अच्‍छी टाइमिंग तो मैं रख ही सकता हूं।



वैसे आप तो जानते ही हैं ना कि मैं स्‍पोर्ट्स का कितना बड़ा शौक़ीन हूं। पहले मैं बल्‍ले से फुटबॉल खेलता था। बाद में क्रिकेट खेलना शुरू किया। अब तो मैं सब खेलता हूं। सच्‍ची। बहरहाल....ये देखिए...ये हैं मेरे 'कोच' विनय भैया। इनसे मैं बॉलिंग और बैटिंग दोनों सीख रहा हूं। विनय भैया कोई ऐसे-वैसे कोच नहीं हैं। विवेकानंद (इंटरनेशनल स्कूल) की टीम से खेलते हैं। अपने क्रिकेटर रोहित शर्मा हैं ना, वो भी इसी स्‍कूल से निकले हैं।

 



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कल मैंने तीन लोगों को फ़ोन किया था मम्‍मा के टच-स्‍क्रीन फ़ोन से। (मेरा मतलब अपने आप लग गया उनको फोन, बस 'टच' किया और लग गया) ये तीन लोग थे---धोनी अंकल, सचिन अंकल और सहवाग अंकल। इनसे मैंने एक ही बात कही है। अंकल “This time for JADOO.” आपको मेरे लिए जीतना ही है। अरे मैं जादू हूं ना....मैं कुछ भी कर सकता हूं।

फिलहाल तो मैं भारतीय टीम के लिए पुश-अप कर रहा हूं।


4तो फिर इंडिया जीत रही है ना आज।

 


मुझे शाम को जीत की काजू-कतली खानी है दो दो।
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जादू क्‍यों

हम हैं जादू के मम्‍मी-पापा ।
'जादू' अपनी मुस्‍कानें लेकर आया है हमारी दुनिया में ।
हम चाहते हैं कि ये मुस्‍कानें हम दुनिया के साथ बांटें ।

जादुई दिन

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