02 April 2011

This Time For “Jadoo”.

आज वर्ल्‍ड-कप का फ़ाइनल है। भारत और श्रीलंका का मुक़ाबला। और कल रात से मैंने एक नया शब्द सीखा है। पता है ये कौन-सा शब्‍द है—'इंडिया'।

 



कल जब पापा ने मुझसे कहा--'जादू बोलो, इंडिया'। अरे इत्‍ता आसान शब्‍द। मैंने फ़ौरन मुंह चौड़ा करते हुए कहा--'इंदिया'। और फिर सारी शाम घर में 'इंदिया इंदिया' की आवाज़ें गूंजती रहीं। पापा समझते नहीं हैं। मैं जादू हूं ना...मैं कुछ भी कर सकता हूं। अरे मुझे इंडिया को चीयर-अप करना है। मेरा पहला वर्ल्ड कप है ना। कम से कम इतनी अच्‍छी टाइमिंग तो मैं रख ही सकता हूं।



वैसे आप तो जानते ही हैं ना कि मैं स्‍पोर्ट्स का कितना बड़ा शौक़ीन हूं। पहले मैं बल्‍ले से फुटबॉल खेलता था। बाद में क्रिकेट खेलना शुरू किया। अब तो मैं सब खेलता हूं। सच्‍ची। बहरहाल....ये देखिए...ये हैं मेरे 'कोच' विनय भैया। इनसे मैं बॉलिंग और बैटिंग दोनों सीख रहा हूं। विनय भैया कोई ऐसे-वैसे कोच नहीं हैं। विवेकानंद (इंटरनेशनल स्कूल) की टीम से खेलते हैं। अपने क्रिकेटर रोहित शर्मा हैं ना, वो भी इसी स्‍कूल से निकले हैं।

 



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कल मैंने तीन लोगों को फ़ोन किया था मम्‍मा के टच-स्‍क्रीन फ़ोन से। (मेरा मतलब अपने आप लग गया उनको फोन, बस 'टच' किया और लग गया) ये तीन लोग थे---धोनी अंकल, सचिन अंकल और सहवाग अंकल। इनसे मैंने एक ही बात कही है। अंकल “This time for JADOO.” आपको मेरे लिए जीतना ही है। अरे मैं जादू हूं ना....मैं कुछ भी कर सकता हूं।

फिलहाल तो मैं भारतीय टीम के लिए पुश-अप कर रहा हूं।


4तो फिर इंडिया जीत रही है ना आज।

 


मुझे शाम को जीत की काजू-कतली खानी है दो दो।
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3 comments:

aradhana said...

जादू तो जादू है. जादू की बात उनके अंकल लोग ज़रूर मानेंगे और उसके लिए अपनी टी को जीत दिलाएंगे. love you Jadoo !

प्रवीण पाण्डेय said...

हमको तो अभी से खिलाड़ी लग रहे हैं, जादू।

रावेंद्रकुमार रवि said...

सबकी ख़ुशी के लिए --
.
जीत गई लविज़ा
.
सबको बधाई!

जादू क्‍यों

हम हैं जादू के मम्‍मी-पापा ।
'जादू' अपनी मुस्‍कानें लेकर आया है हमारी दुनिया में ।
हम चाहते हैं कि ये मुस्‍कानें हम दुनिया के साथ बांटें ।

जादुई दिन

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