23 January 2011

शंकर अंकल के घर 'संडे' की मौज-मस्‍ती

पिछले संडे को शंकर अंकल ने अपने घर बुलाया था। मौज-मस्‍ती करने के लिए। शंकर अंकल से मेरी बहुत जमती है। इसलिए क्‍योंकि जब भी वो मिलते हैं मेरे साथ आ जाते हैं। और हर तरह की मस्ती में मेरा साथ देते हैं। मुझे संभालते हैं। और मेरी शरारतों से कभी परेशान नहीं होते। मुझे उनके घर जाना अच्‍छा लगता है क्‍योंकि उनके घर के आसपास बहुत खुली-खुली जगहें हैं। मैदान है। गार्डन है। बकरियां, गाय, मुर्गी, कौए, कबूतर, डॉगी, पूसी-कैट वग़ैरह हैं। उन सबके पीछे भागने में मज़ा आता है। 

वहां पहुंचने के बाद हम सीधे गार्डन में चले गए। गार्डन में बड़ा मज़ा आया। पापा हमेशा फुटबॉल गाड़ी में ही रखते हैं। फुटबॉल निकाली गई। और मैंने तुरंत खेलना शुरू कर दिया। फुटबॉल खेना मुझे बहुत पसंद है।  IMG_8511इसके बाद मुझे तुरंत ही 'स्‍लाइड' नज़र आ गयी। फिसलपट्टी दिख जाए तो मैं एकदम शरारती हो जाता हूं। मुझे इस पर चढ़ना होता है। अभी छोटा हूं। और इस स्‍लाइड पर अपने आप नहीं सरक सकता।
IMG_8513 IMG_8514ऊपर वाली तस्‍वीर पापा ने इस तरह खींची है कि उनकी छाया साफ़ नज़र आ रही है। मम्‍मा-पापा और शंकर अंकल ने मुझे फिसल-पट्टी पर फिसलाया। बड़ा मज़ा आया।
IMG_8551फिर बारी आई झूले की। झूले पर झूलकर बड़ा मज़ा आया। IMG_8525 गर्मी लगने लगी थी। प्‍यास लग रही थी। खेल रोककर मैंने एक ब्रेक लिया। पानी पिया। और फिर हुड़दंग शुरू कर दिया।
IMG_8526 इस खेल में मेरे साथ ध्रुव भैया भी थे। ध्रुव भैया को जब पता चलता है कि मैं आने वाला हूं तो वो बेसब्री से इंतज़ार करते हैं। वो अपने toys भी मुझे दे देते हैं। मेरी उनकी खूब जमती है।  
IMG_8527 फिर मुझे एक ऐसा पेड़ दिखा जिस पर चढ़ा जा सकता था। देखिए मैं कैसे इस पेड़ पर चढ़ गया। मैं जादू हूं ना मैं कुछ भी कर सकता हूं। (यह कदंब का पेड़ अगर मां होता जमना तीरे, मैं भी उस पर बैठ कन्‍हैया बनता धीरे धीरे)
IMG_8536 इतनी देर तक खेलने के बाद मैं थक चुका था। सोने का टाइम भी कब का पार हो चुका था। मम्‍मा ने गोद में लिया तो मुझे याद आया--अरे आज तो मैं सोया ही नहीं। बस फटाक से झपकी आ गयी।
IMG_8569 तो कैसी लगी आपको मेरी ये outing. क्‍या आप किसी संडे को एक साथ इतने सारे काम करते हैं। इस मौज-मस्‍ती की और तस्‍वीरें देखिए जादुई तस्‍वीरें पर यहां।

6 comments:

प्रवीण पाण्डेय said...

छोटी सी जान को इतना खेलने का काम मिला है।

रंजन said...

बस इंतज़ार है तुम्हारा.. आ जाओ जल्दी से...

सैयद | Syed said...

आप बच्चों की मस्ती देख कर मन करता है की फिर से बच्चा बन जाऊं... :)

..तो इस सन्डे क्या किया ?

माधव( Madhav) said...

nice

चैतन्य शर्मा said...

बहुत बढ़िया लगी ये मस्ती भरी आउटिंग .......

अनुष्का 'ईवा' said...

अल्ले ये तो फूल टू फन डे था ....बहुत बहुत प्यारी तस्वीरें है .
ढेर सारा प्यार

जादू क्‍यों

हम हैं जादू के मम्‍मी-पापा ।
'जादू' अपनी मुस्‍कानें लेकर आया है हमारी दुनिया में ।
हम चाहते हैं कि ये मुस्‍कानें हम दुनिया के साथ बांटें ।

जादुई दिन

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