18 January 2011

'पतंग उड़ाना बहुत कठिन है'

मुझे 'मकर-संक्रांति' बहुत पसंद है। पिछले साल भी मैंने पतंग उड़ाई थी। 'जय हो' पतंग। और इस साल तो मकर-संक्रांति के पहले ही मैंने तिल के लड्डू खाने शुरू कर दिए थे। दिक्‍कत ये हुई कि तिल के लड्डू काफी कड़क होते हैं। इसलिए मम्‍मा पापा से मदद लेनी पड़ती है। छोटे-छोटे टुकड़े करवाके प्‍लेट में रखके चम्‍मच से खाता हूं मैं तिल के लड्डू।

शनिवार को मकर-संक्रांति के दिन मुझे बड़ा मज़ा आया। पापा की छुट्टी थी तो दिन भर उनका साथ मिल गया। मम्‍मा ऑफिस में थीं। उन्‍हें मैंने बहुत 'मिस' किया। मैंने उस दिन क्‍या-क्‍या किया ये आप पहले ही मेरे 'माइक्रो-ब्‍लॉग' 'जादू की पुडिया' पर पढ़ चुके होंगे। नहीं पढ़ा है तो आज ही मेरे इस नए ब्‍लॉग पर जाईयेगा।

हां तो मैं बता रहा था कि शाम को पतंग उड़ाने का प्‍लान था। आजकल मैं जिन 'आण्‍टी-दादी' के घर पर रहता हूं (उन्‍हें कभी मैं आण्‍टी कहता हूं, कभी दादी कहता हूं) वो शाम को चार बजे आ गयीं और कहने लगीं कि जल्‍दी से चलो पतंग उड़ाना है। मैंने उनसे कहा--'कौन उड़ायेगा पतंग, आप ?' । बोलीं--'अरे नहीं रश्मिन भईया और जादू उड़ायेंगे। मैंने सोचा कि चलो पतंग उड़ाई जाए। देखें मैं कितने लोगों की पतंग काटता हूं।  
1aऊपर पहुंचा तो देखा कि रश्मिन भैया पूरी तैयारी से हैं। ढेर सारी पतंगें और चरखियां। वो क्‍या है ना कि पिछले साल के बाद कभी पतंग उड़ाई नहीं तो मैं भूल गया था। इसलिए डिसाइड किया कि मैं चुपचाप सबको देखता रहूंगा और सीख जाऊंगा पतंग उड़ाना। तभी मुझे एक पतंग कोने में पड़ी नज़र आई। 1  फिर क्‍या था। फटाक से मैंने उसे अपने हाथ में उठाया। 2और देखा कि इस पतंग के सारे अस्थि-पंजर ठीक तो हैं ना। 3डॉक्‍टर मामा मरीज़ों की जांच करते हैं और मैं अपने खिलौनों और पतंग की सेहत की जांच करता हूं। खुद देख लीजिए।
4पतंग तो मिल गयी। चरखी भी थी। अब इसे उड़ाया कैसे जाए। तो मैंने शुरू किया मुआयना। रश्मिन भैया पेंच लड़ा रहे थे और मैं ठीक उनके बग़ल में खड़ा सब ध्‍यान से देख रहा था। उनका हौसला भी बढ़ा रहा था। मैंने कहा--आप घबराईयेगा मत। मैं हूं ना आपके साथ'।   5टेरेस पर एक और भैया पतंग उड़ा रहे थे। मैं उनके पास चला गया और उनका मुआयना करने लगा।
5bसब लोगों को ध्‍यान से देखा। कौन किस तरह पतंग उड़ा रहा है। किसकी पतंग किस कलर की है। किसकी डोरी उलझ गयी है।5cऔर जब-जब रश्मिन भैया ने दूसरों की पतंग काटी तो मैंने बहुत डान्‍स किया।
6फिर शुरू की अपनी पतंग उड़ाने की कोशिश। लेकिन ये शैतान पतंग तो उड़ ही नहीं रही थी।
7फिर ख्‍याल आया कि टेरेस की दीवार पर चढ़कर पतंग उड़ाई जाये। इससे मेरी 'हाईट' भी बढ़ जायेगी और पतंग अच्‍छे से उड़ेगी। अरे मैं जादू हूं ना मैं तो कुछ भी कर सकता हूं।


पर पापा, आन्‍टी, रश्मिन भैया सबने रोक लिया। 8अरे बाप रे। इतना कठिन है पतंग उड़ाना। अब मैं क्‍या करूं।  9मुझे निराशा हो रही थी। तभी पापा ने आकर मेरा हौसला बढ़ाया। उन्‍होंने बताया कि जब मैं थोड़ा और बड़ा हो जाऊंगा तो खूब पतंग उड़ा पाऊंगा। अभी तो ये सारी पतंगें ही मुझसे बड़ी हैं। और मांझे से उंगली भी कट सकती है। जैसे पापा की कट गयी पतंग उड़ाने के चक्‍कर में। पापा ने ये भी बताया कि 'मकर-संक्रांति' के एक दिन पहले पापा और उनके दोस्‍तों ने ऑफिस में पतंग उड़ाई थी। मैंने कहा--'ऑफिस में पतंग'। बस फिर हम दोनों खूब हंसे।
10टेरेस पर 5वें फ्लोर पर रहने वाले ऋत्विज भैया भी आए थे। पिछले साल भी उनके साथ तस्‍वीर खिंचाई थी। इस साल भी खिंचा ली।  11 उसके बाद नीचे आकर हम सबने बहुत सारे लड्डू खाए।
आपने 'मकर-संक्रांति' पर क्‍या किया।

6 comments:

akhilendra said...

hamne bhi khub maze kiye. . Jadoo. . . . Republicday par kya program. . . Jadoo zindabad. . .

Vivek Rastogi said...

हमने भी पतंग उड़ाई और लड्डू खाये ।

उपेन्द्र ' उपेन ' said...

वाह जादू जी , खूब मस्ती हो रही है........ अच्छी लगी ये पतंगबाजी.

Saba Akbar said...

जादू जी साथ में थे, तभी भैया ठीक से पतंग उड़ा पाए :)

falsafa said...

जादू जी की कोशिश जाया नहीं जाएगी। जल्द ही वे पतंग तो क्या हवाई जहाज भी उड़ाना सीख जाएंगे, बशर्ते उनका हौसला यूं ही बरकरार रहे।

प्रवीण पाण्डेय said...

एक बार सीख गये तो छोड़ेंगे नहीं।

जादू क्‍यों

हम हैं जादू के मम्‍मी-पापा ।
'जादू' अपनी मुस्‍कानें लेकर आया है हमारी दुनिया में ।
हम चाहते हैं कि ये मुस्‍कानें हम दुनिया के साथ बांटें ।

जादुई दिन

Lilypie - Personal pictureLilypie Second Birthday tickers

  © Free Blogger Templates Spain by Ourblogtemplates.com 2008

Back to TOP