27 October 2011

'जादू' की दीपावली

आजकल मैं बहुत बिज़ी हो गया हूं। इसलिए आप तक अपनी ख़बर नहीं पहुंचा सका।

वो क्‍या है ना कि मुझे रोज़-रोज़ स्‍कूल जाना पड़ता है। स्‍कूल में कभी होता है puppet show….कभी भगवान कृष्‍ण की फिल्‍म दिखाई जाती है तो कभी गेम्‍स खिलाए जाते हैं। कभी दशहरा सेलिब्रेट होता है तो कभी दीपावली। अब बताईये बिज़ी हूं ना मैं। कितना तो काम है मेरे पास। पता है एक दिन स्‍कूल से मुझे आइसक्रीम पार्लर दिखाने ले गए थे। सिर्फ दिखाने। आईसक्रीम नहीं खिलवाई टीचर ने। :(

वैसे आपको बता दूं कि आजकल मेरे वेकेशन चल रही हैं। दीवाली वेकेशन। और मैं घर पर भी मस्‍ती कर रहा हूं औ

र बाहर जाकर भी। एक दिन हम गोराई बीच गए थे। वहां मैंने बहुत मस्‍ती की। एक झलक देख लीजिए। डीटेल में बाद में बताऊंगा फोटोज़ के साथ। तस्‍वीर पर क्लिक करके इसे आप बड़ा कर सकते हैं।
IMG_2758
बहरहाल...मैं तो आपको दीपावली सेलिब्रेशन के बारे में बता रहा था। पता है....छुट्टियों के दौरान पापा ने एक बार गोराई पैगोड़ा देखने का प्‍लान बनाया। लेकिन बारिश होने लगी। और हमें घर लौटना पड़ा। पता है मुंबई में अभी तक बारिश हो रही है। मम्‍मा-पापा कहते हैं कि अक्‍तूबर में बारिश होना बड़ा अजीब लगता है। बाक़ी कई दिन हम दीवाली की शॉपिंग करने गए। नई ड्रेस ख़रीदी। पटाख़े ख़रीदे। कंदील लाए। खील-बताशे ख़रीदे। दिए ख़रीदे। बहुत कुछ ख़रीदा। मैंने हर शॉप में जाकर बहुत मस्‍ती की। खींच-तान की। जंप लगाई। रोड की तरफ़ भागने की कोशिश की। शॉप में छिपने की भी कोशिश की। पर हर बार या तो पापा की नज़र मुझ पर थी या मम्‍मा की। 


मुझे मिठाई बहुत पसंद है। ख़ासतौर पर काजू-कतली। वो भी बीकाजी की।
इसलिए पापा ने कहा कि ट्रैफिक बहुत होगा, फिर भी जादू को बीकाजी लेकर चलेंगे। वहां जाते ही मैं तो बस जिद करने लगा। ये मिठाई, वो मिठाई। मिठाई वाले अंकल ने मुझे अंजीर बरफ़ी ये कहके दी कि खा लो बिस्‍किट है। मम्‍मा ने कहा, ले लो तो मैंने ली और मज़े से खाई। लेकिन उस शाम काजू-कतली नहीं मिली। फिनिश हो गई थी। दूसरी मिठाई ली हमने। नमकीन भी लिए।

और फिर मेरी नज़र जलेबी पर पड़ गयी। मुझे जलेबी बहुत पसंद है। बस फ़ौरन जलेबी की जिद करने लगा। जलेबी वाले अंकल ने बाकी लोगों से पहले मुझे गरम-गरम जलेबी बनाकर दी। और मैंने मज़े से खाई। पापा ने एक पीस टेस्‍ट करने की कोशिश की तो मैंने हाथ नहीं लगाने दिया। बोला--'क्‍यों खा रहे हैं जादू की जलेबी। गंदी बात पापा'। बेचारे पापा।

और हां। पूजा तक रूकने का धीरज नहीं था मेरे पास। मैंने तो मम्‍मा से जिद करके आसमान सिर पर उठा लिया मिठाई के लिए। मम्‍मा ने समझाया कि पूजा के बाद मिलेगा। पर मैं कहा मानने वाला था। आखिरकार मम्‍मा ने कहा, बच्‍चे और भगवान एक समान। इस तरह भगवान से पहले मैंने भोग लगाया।

आईये आपको दीपावली के सेलिब्रेशन की फोटोज़ दिखाएं। 
 IMG_2811IMG_2816IMG_2812IMG_2833 IMG_2814 IMG_2815 IMG_2822आप सभी को दीपावली मुबारक।
मेरे स्‍कूल जल्‍दी ही शुरू होने वाले हैं।
इस बीच मैं आपको गोराई पिकनिक के फोटोज़ दिखलाऊंगा।
बाय। सी यू। टाटा बाय।   

02 September 2011

कुर्ते-पैज़ामे में कैसा लगता हूं मैं?

बहुत सारी छुट्टियां मनाई मैंने। ईद आई। गणेश चतुर्थी आई।

ईद पर दादा-दादी के घर नहीं जा सका। खांसी बढ़ गयी थी ना। इसलिए।

फिर मैंने फोन लगाकर दादा-दादी सबसे बात की। पोयम सुनाई। एक नहीं सब। जितनी आती थीं। सब सुनाई। बबलू चाचा से भी बात की और उन्‍हें 'बबलू हाथ' वाली कविता सुनाई।

:)

 

 

 

 


आज स्‍कूल में पारंपरिक पोशाक का दिन है। देखिए मेरा नया-वाला कुर्ता-पैज़ामा।
मैं कैसा लग रहा हूं स्‍कूल जाते हुए।
1

सोच रहा हूं कि ये बारिश क्‍यों होती है। कल तो मैंने बारिश को समझाया था, खिड़की पे खड़े होके---'ऐ बारिश। पानी पी लो। और बारिश भीगता मत। संभालना। छाता लेकर जाना'। कितनी बारिश हो रही थी कल। मैंने बारिश से बहुत बातें कीं।
a
हे भगवान। ये मुझे रोज़ स्‍कूल क्‍यों जाना पड़ता है।


छुट्टियां और ज़्यादा क्‍यों नहीं होतीं।
मम्‍मा-पापा कहते हैं कि वैसे ही जादू के स्‍कूल में छुट्टियां बहुत होती हैं।


अब उन्‍हें कौन समझाए। (वैसे किसी से कहना मत, मुझे स्‍कूल में मज़ा बहुत आता है)


वो तो बस जाते हुए थोड़ा 'ड्रामा' करता हूं मैं।
आज तो नहीं किया। हंसते हंसते गया।
b
सच्‍ची हंसते हंसते गया। मुस्‍कुराते हुए। ऐसे।
c


पापा ने आज मेरे बहुत सारे फोटो खींचे। ये वाला कित्‍ता मज़ेदार फोटो है ना।


अरे नहीं नहीं मैं गुस्‍सा थोड़ी हूं। मैं तो बाईं तरफ देखते हुए कुछ 'सोच' रहा हूं। 
 d

पापा बर्ड स्‍कूल नहीं जाती क्‍या। वो देखो कहां उड़ रही है। तलो बर्ड स्‍कूल तलो 'जादू' के साथ। 
f


अब ज़रा ये फोटो भी देखिए


 g
लेकिन इन फोटोज़ से कनफ्यूज़ होने की ज़रूरत नहीं है।


मैं बस अपनी अगली शरारत के बारे में सोच रहा हूं।
e  
मम्‍मा कहती हैं कि मैं जितना सीधा दिखता हूं उतना हूं नहीं।
वैसे आज जैसे ही मम्‍मा तैयार करके किसी काम से किचन में गयीं। मैंने काजल की डिब्‍बी उठाई और पूरे मुंह पर पोत ली। फिर क्‍या था। मम्‍मा वापस आईं तो उन्‍होंने सिर पर हाथ रख लिया। बोलीं--जादू क्‍या किया ये। उसके बाद....कुछ नहीं। मम्‍मा ने मॉश्‍चराइज़र लगाके जादू को अच्‍छा बच्‍चा बनाया। काजल छुड़ाया। हे हे हे।
h


स्‍कूल में क्‍या हुआ ये वापस लौटकर बताऊंगा।
मैं जादू हूं ना मैं कुछ भी कर सकता हूं।
फिलहाल। आपको ईद मुबारक। सिंवई खा लेना। ठीक है।
और हां। पानी भी पी लेना। ओ.के.बाय.सी.यू.।


भीगना मत। फ्लाइंग किस।

16 August 2011

जादू का स्‍वतंत्रता दिवस

आज जादू के स्‍कूल में स्‍वतंत्रता दिवस का समारोह होने वाला है।
तीन चार दिन की छुट्टी के बाद जादू जी आज स्‍कूल गए हैं। ज़ाहिर है कि उनका मन नहीं था स्‍कूल जाने का। जब भी पापा कहते, चलो जादू तैयार कर दें, स्‍कूल जाना है। तो जादू का जवाब यही होता--नईं दाना है जादू को स्कूल।

किसी तरह पापा ने जादू को समझा-बुझाकर तैयार किया है। जादू आजकल इसी अदा में बैठते हैं। लेकिन चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ़ दिख रही हैं। मानो कह रहे हों कि आज तो पापा स्‍कूल भेजकर ही रहेंगे।

 

 


 w 
पापा ने जादू को हंसाने की कोशिश भी की। पर जादू खुलकर नहीं हंसे। देखिए नकली मुस्‍कुराहट का जादू। और जादू की नकली मुस्‍कान।

x
अब जादू नीचे आ गये हैं। आज मम्‍मा ऑफिस में हैं। पापा जादू को बस में बैठाने आए हैं। यहां भी जादू का मन नहीं है स्‍कूल जाने का। पर नया कुर्ता पैज़ामा पहनने का मन खूब था। पूछा, पापा ये नया वाला है। फिर घर पर कुछ स्‍टंट भी किये और ये बोलते हुए किये, कि संभालना जादू नहीं गिरेगा ना। नहीं गिरेगा। नहीं लगेगी। जादू अभी भी चिंता में मगन हैं।


v

y
और ये बस आने से ठीक पहले की तस्‍वीर। जादू रोते हुए स्‍कूल गए हैं।

z
तस्‍वीरों पर क्लिक करके उन्‍हें बड़ा किया जा सकता है।

16 June 2011

जादू के स्‍कूल का पहला दिन।

पता है आज यानी गुरूवार 16 जून को मेरा स्‍कूल शुरू हो गया।
एक दिन मम्‍मा-पापा मुझे एडमीशन कराने ले गए थे। उस दिन मैं स्‍कूल में ख़ूब खेला था। और जब भी वहां से निकलता तो मम्‍मा याद दिलाती कि जादू यहीं स्‍कूल में आने वाला है जल्‍दी ही।

और आखिरकार वो दिन आ ही गया।
मम्‍मा-पापा दोनों ने मेरे पहली-पहली बार स्‍कूल जाने वाले दिन छुट्टी ली।
और ख़ूब अच्‍छे से तैयार किया।

एक छोटा-सा बैग। वॉटर-बॉटल। टिफिन। एक जोड़ी कपड़े और डायपर।
इतनी सारी चीज़ें लेकर मैं स्‍कूल गया था।

मम्‍मा ने स्‍कूल ले जाने से पहले मुझे गले भी लगाया। मम्‍मा इस दिन का कितनी बेसब्री से इंतज़ार कर रही  थीं। उन्‍होंने तो मुझे 'स्‍कूल' बोलना भी सिखा दिया था। जब भी पूछतीं जादू कहां जाएगा तो मैं कहता--उक्‍कूल। (स्‍कूल)
IMG_1477
मेरे स्‍कूल जाने से पहले बारिश हो रही थी। अचानक रूक गयी। मुझे स्‍कूल जाना था ना इसलिए।
IMG_1480
 IMG_1481
गाड़ी में मैंने बहुत मज़े किये। पापा ने साइड-मिरर में मेरी तस्‍वीर भी ले ली चुपके से।
IMG_1488 


देखिए ये रहा मेरा स्‍कूल। यहीं मैं पी.जी. (प्‍ले ग्रुप) करने वाला हूं।
IMG_1491
ठीक साढ़े ग्‍यारह बजे मैं और मम्‍मा क्‍लास में गये। असल में तीन दिन तक मम्‍मा को भी मेरे साथ क्‍लास में रूकना है। सबकी मम्‍मा आईं। और हम सब बच्‍चे क्‍लास में toys से खू़ब खेले। टिफिन भी खाया।

और poem भी सीखी। twinkle twinkle little star. और मछली जल की रानी है। a.b.c.d. भी सीखा। बड़ा मज़ा आया।



मम्‍मा तो मेरे साथ क्‍लास में चली गयीं। पापा क्‍या करते। इसलिए पापा मेरे स्‍कूल के आसपास ही टहलते रहे। इस दौरान उन्‍होंने कुछ फोटोज़ खींचे। ये रही बर्ड की फोटो। चिया चिया बर्ड बर्ड। 
IMG_1500
और ये रहा crow. स्‍कूल के कंपाउंड में पेड पर बैठा था ये।

IMG_1501 


और ये डॉगी तो मेरे स्‍कूल की गाड़ी के नीचे सो रहा था।
IMG_1502 
और ये रहा flower.

 

 

 

IMG_1504
जब पापा लौटकर आए तो मैं एलीफेन्‍ट की सवारी कर रहा था। 
 
IMG_1514
और इसके बाद horse की सवारी भी की।

 

और गिर भी गया। पर रोया नहीं।
IMG_1522
तो ये था स्‍कूल में मेरा पहला दिन। आपके स्‍कूल का पहला दिन कैसा था।

10 April 2011

देवेंद्र मामा की कविता: जादू जी जब पहुंचे फ्रांस

देवेंद्र मामा इलाहाबाद में हैं। 
मेरी खोज-खबर लेते रहते हैं।
मम्‍मा मेरे बारे में हर छोटी बड़ी बात मामा को बताती हैं।
पिछले कुछ महीनों से मामा मेरी हर एक शरारत पर कविताएं लिख रहे हैं। पापा ने उन्‍हीं की आवाज़ में मोबाइल फोन पर रिकॉर्ड भी किया है। पर बिज़ी थे इसलिए पापा उन्‍हें पोस्‍ट नहीं कर पाए। 


ये रही मामा की मेरी शरारतों पर लिखी गयी कविताओं की सीरीज़ की पहली कविता। दरअसल बाथरूम में घंटों अपने मिनी स्‍वीमिंग पूल में मुझे छई छप छई करना बहुत पसंद है। मम्‍मा ने जब मामा को ये बात विस्‍तार से बताई  तो मामा ने ये कविता लिख डाली।


मामा की आवाज़ में सुनिए



एक दिन जादू पहुंचे फ्रांस
लगे वहां पर करने डांस
मम्‍मी पापा पीछे दौड़े
नहीं पकड़ने का कोई चांस
पेरिस से फिर लंदन पहुंचे
टेम्‍स नदी में उतर पड़े
नहीं जानते थे तैराकी
लगे डूबने खड़े खड़े
तब तक पीछे पुलिस आ गयी
पकड़ उठे तब जादू जी

पासपोर्ट जब पुलिस ने मांगा
घबराए थे जादू जी
सिट्टी पिट्टी गुम को गयी
बुरे फंस गए जादू जी
हकलाती आवाज़ में बोले
मुझे बचाओ बाबू जी
अच्‍छा हुआ जो फोन ऑन था
बांध लिया था टाई में
आवाज़ सुनी नेट पर मम्‍मी ने
पांव फंसे थे खाई में
सर्वाइलेन्‍स की मदद से जाकर


जादू जी लोकेट हुए

भारत में मम्‍मी पापा से
किसी तरह अपडेट हुए
पासपोर्ट बनवाकर सीधे
पापा फिर लंदन पहुंचे
सूटकेस में दो थे कपड़े
संग लिये तब मम्‍मी पहुंचीं 
जादू जी थे सही सलामत 
फिर भी वे थे कांप रहे थे
हवालात में बैठे बैठे
इधर उधर थे ताक रहे
टॉफी बिस्किट पड़े हुए थे
नहीं छुआ था काजू भी
देर लगायी मम्‍मी ने क्‍यों
सोच रहे थे जादू जी

बाथिंग टब में छपकी छपकी 
खेला करते थे जब भी
लिये तौलिया पहुंचा करतीं
मम्‍मी जी अकसर तब भी
आंख भर उठी जादू जी की 
मम्‍मी का भी दिल भर आया
उन्‍हें देखकर पापा के संग
मन उनका पुलकित हो आया
 

02 April 2011

This Time For “Jadoo”.

आज वर्ल्‍ड-कप का फ़ाइनल है। भारत और श्रीलंका का मुक़ाबला। और कल रात से मैंने एक नया शब्द सीखा है। पता है ये कौन-सा शब्‍द है—'इंडिया'।

 



कल जब पापा ने मुझसे कहा--'जादू बोलो, इंडिया'। अरे इत्‍ता आसान शब्‍द। मैंने फ़ौरन मुंह चौड़ा करते हुए कहा--'इंदिया'। और फिर सारी शाम घर में 'इंदिया इंदिया' की आवाज़ें गूंजती रहीं। पापा समझते नहीं हैं। मैं जादू हूं ना...मैं कुछ भी कर सकता हूं। अरे मुझे इंडिया को चीयर-अप करना है। मेरा पहला वर्ल्ड कप है ना। कम से कम इतनी अच्‍छी टाइमिंग तो मैं रख ही सकता हूं।



वैसे आप तो जानते ही हैं ना कि मैं स्‍पोर्ट्स का कितना बड़ा शौक़ीन हूं। पहले मैं बल्‍ले से फुटबॉल खेलता था। बाद में क्रिकेट खेलना शुरू किया। अब तो मैं सब खेलता हूं। सच्‍ची। बहरहाल....ये देखिए...ये हैं मेरे 'कोच' विनय भैया। इनसे मैं बॉलिंग और बैटिंग दोनों सीख रहा हूं। विनय भैया कोई ऐसे-वैसे कोच नहीं हैं। विवेकानंद (इंटरनेशनल स्कूल) की टीम से खेलते हैं। अपने क्रिकेटर रोहित शर्मा हैं ना, वो भी इसी स्‍कूल से निकले हैं।

 



132

कल मैंने तीन लोगों को फ़ोन किया था मम्‍मा के टच-स्‍क्रीन फ़ोन से। (मेरा मतलब अपने आप लग गया उनको फोन, बस 'टच' किया और लग गया) ये तीन लोग थे---धोनी अंकल, सचिन अंकल और सहवाग अंकल। इनसे मैंने एक ही बात कही है। अंकल “This time for JADOO.” आपको मेरे लिए जीतना ही है। अरे मैं जादू हूं ना....मैं कुछ भी कर सकता हूं।

फिलहाल तो मैं भारतीय टीम के लिए पुश-अप कर रहा हूं।


4तो फिर इंडिया जीत रही है ना आज।

 


मुझे शाम को जीत की काजू-कतली खानी है दो दो।
5

26 February 2011

जन्‍मदिन की ताज़ा तस्‍वीरें

आज मेरा जन्‍मदिन है।
मम्‍मा-पापा आज के लिए बहुत दिनों से तैयारियां कर रहे थे। आज जब मैं केक लेने निकला, तब की ताज़ा तस्‍वीरें। 

मम्‍मा का हाथ पकड़कर चलने का मज़ा ही और है।

 


IMG_8920हमारी बिल्डिंग में बहुत सारी बिल्लियां हैं। पूसी-कैट को मैं दौड़ा-दौड़ा कर उनसे खेलता हूं। बाहर जाते हुए मैं पहले उन्‍हें 'हैलो' करने ज़रूर जाता हूं।  IMG_8923गाड़ी की छत पर। कृपया आप ये 'स्‍‍टंट' करने की जुर्रत ना करें। IMG_8928केक ले लिया। अब पापा के साथ फोटो हो जाए।
IMG_8940 पापा के साथएक फोटो और। IMG_8939 अब चलता हूं। शाम को मेरे और पापा के बहुत सारे दोस्‍त आ रहे हैं। छोटी-छोटी दो पार्टियां हैं। बाय बाय।

30 January 2011

संडे मॉर्निंग-वॉक

हर संडे को मैं सुबह-सुबह पापा के साथ 'मॉर्निंग-वॉक' पर जाता हूं। आज सुबह ठंड थोड़ी ज्‍यादा थी। इसलिए मैं 'तैयारी' से बाहर निकला।  बिल्डिंग में नीचे आते ही मैंने पापा से कहा--'कहिए कहां चला जाए।'
IMG_8692
पापा तो मुझे गोराई बीच ले जाना चाहते थे। पर मैंने पापा से कहा कि इतनी सुबह जाना ठीक नहीं होगा। गोराई-बीच अगले हफ्ते चलेंगे। पहले से तैयारी करके। अभी तो गोराई-क्रीक ही चलते हैं। जैसे ही हम वहां पहुंचे--मैंने देखा कि चौराहे पर कौओं की फ़ौज तैनात है। मुझे कौए भगाने में मज़ा आता है। बस मैं शुरू हो गया। देखिए 'पापा की छांव में' मैं कौओं को निहारता हुआ।  
IMG_8694इसके बाद मैं एकदम से कौओं के पीछे भागने लगा। याद है ना...मैं कभी-कभी पेप्‍सी-ग्राउंड में भी कौओं को भगाने जाता हूं।  IMG_8695कौओं और कबूतरों को भगाने का मज़ा ही कुछ और है। वो भी संडे की सर्द सुबह। 
IMG_8696इसके बाद बारी आई सब्जियां ख़रीदने की। गांव की इतनी सारी सब्जि़यां देखकर मैं सोच में पड़ गया कि क्‍या ख़रीदूं। पापा ने मुझसे पहले कह दिया था कि आज सब्जियों का सिलेक्‍शन तुम्‍हें ही करना है।
IMG_8697अरे वाह। बैंगन तो एकदम ताज़ा है। इसका भुर्ता खाने में मज़ा आयेगा। IMG_8699आण्‍टी फूलगोभी क्‍या भाव दी।
IMG_8700अरे वाह लौकी है या मुगदर। इससे तो एक्‍सरसाइज़ भी की जा सकती है।   IMG_8701 सब्जियां बहुत सारी हो गईं थीं। थैला उठाना मेरे बस की बात थी नहीं। इसलिए मैंने पापा से कहा कि आप उठाईये थैला और मुझे ले चलिए वापस घर।



मेरी संडे मॉर्निंग-वॉक तो शानदार रही। और आपकी?

जादू क्‍यों

हम हैं जादू के मम्‍मी-पापा ।
'जादू' अपनी मुस्‍कानें लेकर आया है हमारी दुनिया में ।
हम चाहते हैं कि ये मुस्‍कानें हम दुनिया के साथ बांटें ।

जादुई दिन

Lilypie - Personal pictureLilypie Second Birthday tickers

  © Free Blogger Templates Spain by Ourblogtemplates.com 2008

Back to TOP