23 December 2010

जादुई रंगों वाली किताब

पिछले एक महीने से मैं एकदम ग़ायब ही था। मम्‍मा का बर्थडे बनाने के बाद मैं अपने ब्‍लॉग पर आया ही नहीं। हुआ यूं कि मैं ज़रा बिज़ी हो गया था।

मम्‍मा ऑफिस जाने लगी हैं। और मैं 'बेबी-सिटिंग' जाता हूं। पहले पहले तो मुझे समझ नहीं आता था कि मम्‍मा रोज़ रोज़ मुझे छोड़कर कहां जाती हैं। पर अब मुझे समझ में आ गया है कि मम्‍मा ऑफिस जाती हैं। कभी-कभी तो मैं भी मम्‍मा-पापा के साथ ऑफिस चला जाता हूं। वहां खेलने में बहुत मज़ा आता है। जब मम्‍मा-पापा रेडियो प्रोग्राम कर रहे होते हैं तो मैं कंट्रोल-रूम से उन्‍हें देखता भी रहता हूं।

बेबी-सिटिंग वाली आंटी के यहां जाकर मैं बहुत मस्‍ती भी करता हूं, खेलता हूं और सो भी जाता हूं। ये अलग बात है कि किसी किसी दिन मेरा मन करता है कि मैं मम्‍मा-पापा के साथ ही रहूं।

डॉक्‍टर मामा ने इलाहाबाद से मेरे लिए जून में 'जादुई रंगों वाली किताब' भेजी थी। और मम्‍मा ने मुझसे पहले भी थोड़ी पेन्टिंग करवाई थी। पर इस दौरान जब मैं अपने ब्‍लॉग से ग़ायब था...मैंने बहुत सारी जादुई पेन्टिंग की। बस ब्रश से पानी लगाकर इस जादुई किताब पर फेरना पड़ता है। और सब चीज़ों के रंग उभर आते हैं।
4मैंने फौरन ही समझ लिया कि ये पेन्टिंग कैसे की जाती है। वैसे भी पानी को कोई भी  खेल हो वो मुझे बहुत पसंद आता ही है। आजकल मैं नहाने से पहले बाथरूम में भी पानी से खेलना चाहता हूं।
1 2और ये लीजिए तैयार हो गयी पेन्टिंग। कितनी सुंदर है ना ये bird.  3   ये रही मेरी दोनों 'जादुई रंगों वाली किताबें'। 5और आपको ये भी तो बताना है कि आजकल मैं सिर्फ painting नहीं करता। drawing भी करता हूं। पापा मेरे लिए बड़ी बड़ी ड्रॉइंग-बुक लाए हैं। और साथ में प्‍लास्टिक वैक्‍स कलर्स भी।

6मेरी मानिए आप भी ड्रॉइंग और पेन्टिंग शुरू कर दीजिए। इससे आपको सारे टेन्‍शन से छुटकारा मिल जाएगा। 

अच्‍छा अब मैं चलता हूं। चम्‍मच से पोहा खाने की प्रैक्टिस करनी है मुझे।  

जादू क्‍यों

हम हैं जादू के मम्‍मी-पापा ।
'जादू' अपनी मुस्‍कानें लेकर आया है हमारी दुनिया में ।
हम चाहते हैं कि ये मुस्‍कानें हम दुनिया के साथ बांटें ।

जादुई दिन

Lilypie - Personal pictureLilypie Second Birthday tickers

  © Free Blogger Templates Spain by Ourblogtemplates.com 2008

Back to TOP