16 November 2010

आज मेरी 'मम्‍मा' का जन्‍मदिन है।

पता है....आज मेरी मम्‍मा का जन्‍मदिन है।
वैसे तो दो ढाई साल की छुट्टियों के बाद मम्‍मा अब ऑफिस जाने लगी हैं। और मुझे कुछ घंटों के लिए 'बेबी सिटिंग' वाली आंटी के पास रहना पड़ता है। पर मम्‍मा तो मम्‍मा हैं ना। आज जन्‍मदिन पर मेरे साथ रहने के लिए मम्‍मा-पापा ने छुट्टी ले रखी है। देखिए सुबह-सुबह मैंने मम्‍मा को कैसे हैपी-बर्थडे कहा।
IMG_8128मम्‍मा को बड़ा मज़ा आया। मम्‍मा कहती हैं कि आजकल मेरी शरारतें बढ़ती जा रही हैं। नीचे जाकर मैं बिल्‍ली मौसी की पूंछ खींच आता हूं। डॉगी को चिढ़ा कर आ जाता हूं। किचन की ट्रॉलीज़ को अस्त-व्‍यस्‍त कर देता हूं। अभी दो-तीन दिन पहले मैं ट्रॉली से अजवाइन का डिब्‍बा निकाल लिया और उसे खोल दिया। बस....उसके बाद मम्‍मा बेचारी अजवाइन साफ करती रह गयी। इससे पहले राई, ज़ीरा, मूंग की दाल, देसी-घी और ना जाने किन किन चीज़ों को मैं ऐसे ही गिरा चुका हूं। लेकिन आज मैं ऐसा कुछ नहीं करने वाला। मम्‍मा का बर्थडे है ना। उन्हें परेशान करना अच्‍छी बात नहीं है। है ना। 

ये तस्‍वीर देखी आपने। इसमे मैं मम्‍मा को राग चारूकेशी सिखा रहा हूं।
6वैसे जब जिक्र चल ही पड़ा है तो आपको अपनी ताज़ा शरारतों के बारे में बता दूं। आजकल जब मम्‍मा घर पर होती हैं तो मैं उनसे कहता हूं कि मुझे 'शू-शू' लगी है। मम्मा मुझे बाथरूम में ले जाती हैं। और वहां पहुंचते ही मैं फौरन पानी से खेलना शुरू कर देता हूं। पहले मम्‍मा समझ नहीं पाती थीं। पर आजकल समझ जाती हैं कि मैं पानी से खेलने का बहाना बना रहा हूं।

ये तस्‍‍वीर देखिए मैं मम्‍मा के साथ बीकाजी की जलेबी का स्‍वाद ले रहा हूं।  IMG_7147
एक और शरारत बताऊं। मम्‍मा ऑफिस जाती हैं इसलिए अब उनके पर्स में हमेशा पेन रहते हैं। और मुझे पता है कि वो पेन कहां रखती हैं। कल पता है मम्‍मा ऑफिस पहुंचीं तो पाया कि पेन का निचला हिस्‍सा बाक़ी है। ऊपरी हिस्‍सा, स्प्रिंग और रीफिल मैंने निकालकर फेंक दी है। आजकल मम्‍मा-पापा गाड़ी में एक्‍स्‍ट्रा पेन रखते हैं। घर में तो मेरे रहते पेन-पेन्सिल की ख़ैर नहीं होती।
 
और इस तस्‍वीर में मम्‍मा के साथ शरारत।


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यहां मम्‍मा मुझे ABCD सिखा रही हैं। वैसे मैं मम्‍मा को रोज़ न्‍यूज़पेपर देता हूं पढ़ने के लिए। बस दिक्‍कत ये है कि मैं पहले उसे पढ़ लेता हूं। उसके बाद वो मम्‍मा के पढ़ने लायक़ कितना रहता है--ये आप समझ सकते हैं। IMG_7517मम्‍मा-पापा से मैं हमेशा नीचे घूमने चलने की जिद करता रहता हूं क्‍योंकि मुझे घूमना बहुत पसंद है। नीचे जाते ही मैं गेट की तरफ भागता हूं। और मम्मा को दौड़ाता रहता हूं। मम्‍मा को मैं अकसर बहुत थका देता हूं। फिर उनके पैर भी दबाता हूं। आज मम्‍मा को परेशान नहीं करना है। उनका जन्‍मदिन है ना आज।  IMG_7545आजकल मैंने एक नया काम सीखा है। और वो है dusting का काम। मुझे जब भी कोई छोटी तौलिया या रूमाल या और कोई कपड़ा नज़र आता है तो मैं उससे चीज़ें साफ़ करने लगता हूं। बीच बीच में अपनी नाक भी साफ़ कर लेता हूं उससे। ये बड़ा मज़ेदार काम है। कभी आप भी करके देखिए। उसके बाद वो कपड़ा वॉशिंग मशीन में डाल दीजिएगा धुलने के लिए। क्‍योंकि मैं तो ऐसा ही करता हूं।

पर आज नहीं। आज मम्‍मा को परेशान नहीं करना है।  
IMG_7588 मैंने सोचा तो है कि आज मम्‍मा को ज़रा भी परेशान नहीं करना है। मम्‍मा के लिए पापा और मैंने मिलकर गिफ्ट भी लिए हैं। और शाम को हम पार्टी भी करने वाले हैं।

मैं जा रहा हूं मम्‍मा के लिए जलेबी लाने।
IMG_7783इस तस्‍वीर में है खोवे की जलेबी। ये तस्‍वीर पापा ने जबलपुर में खींची थी। अन्‍नपूर्णा आंटी आपने पूछा था कि खोवे की जलेबी क्‍या होती है। ये देखिए। इसे कहते हैं खोवे की जलेबी। 

मम्‍मा को मेरी तरफ से हैपी-बर्थडे।


चलता हूं। बहुत काम है।


मैं जादू हूं ना..मैं कुछ भी कर सकता हूं। 

05 November 2010

दीवाली पर बिल्‍ली मौसी ने की जादू से एक request.

पता है, कल मंगेश अंकल का जन्‍मदिन था। मैं पापा-मम्‍मा को लेकर उनके घर बोरीवली ईस्‍‍ट गया। और वहां मैंने उनके साथ केक भी काटा। ये देखिए मैं केक के एकदम क़रीब मौजूद हूं। आप सब तो जानते ही हैं कि मुझे केक कितना पसंद है। कल मैंने मंगेश अंकल के घर जमकर केक खाया।  

IMG_7954 केक के अलावा जो दूसरी चीज़ मेरी फेवरेट है वो है आइसक्रीम। मम्‍मा और मुझे आइसक्रीम बेहद पसंद है। पापा गला ख़राब होने के डर से अकसर आइसक्रीम avoid करते हैं। पर इतनी अच्‍छी चीज़ को भला मैं क्‍यों avoid करूं। मंगेश अंकल और शिल्‍पा आंटी ने मेरे लिए ख़ास तौर पर कुल्‍फी मंगवाई थी। इसलिए मैंने जमकर कुल्‍फी खाई। और जब अपनी कुल्‍फी खा ली तो बाक़ी लोगों से अपना 'शेयर' मांगने में भी संकोच नहीं किया।
IMG_7973अब आज सबेरे की बातें। आज सबेरे-सबेरे मैं पापा के साथ नीचे घूमने गया। पापा गाड़ी में फूलों की माला लगाने गए थे। इस दौरान मैं मस्‍ती करता रहा।
IMG_8001फिर मैंने देखा कि पार्किंग-लॉट में एक बाइक पर बिल्‍ली-मौसी विराजमान हैं। बिल्‍ली मौसी से मेरी अच्‍छी-ख़ासी दोस्‍ती है। जब भी मैं कहीं से वापस आता हूं तो सबसे पहले अपनी बिल्डिंग में रहने वाली बिल्‍ली मौसी को ज़रूर देखता हूं। कभी खिड़की पर तो कभी किसी घर की बालकनी पर नज़र आ जाती हैं वो। आज तो बाइक पर नज़र आ गयीं। 
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बाइक पर आपको बिल्‍ली मौसी ठीक से दिख रही होगी इसलिए ये लीजिए उनका क्‍लोज़-अप फोटो। अकसर पार्किंग-लॉट में बिल्‍ली मौसी किसी स्‍कूटर, बाइक या कार पर बैठी नज़र आ जाती हैं। 


IMG_7987-1पहले मैंने बिल्‍ली मौसी को दूर से देखा। बिल्‍ली मौसी ने मुझे देखते ही पहचान लिया और कहा--'म्‍याऊं म्‍याऊं...मैं सारे चूहे खा जाऊं.....म्‍याऊं म्‍याऊं जादू....हैपी दीवाली। और हां रात को बम मत फोड़ना। मुझे बहुत घबराहट होती है बमों की आवाज़ से'। मैंने बिल्‍ली मौसी से वादा किया है मैं ख़ुद भी बम नहीं फोड़ूंगा और दूसरों को भी मना करूंगा।
IMG_7987फिर मैंने बिल्‍ली मौसी से कहा कि अब मैं चलता हूं। देर हो रही है। दरअसल मैं पापा के साथ बाइक पर घूमने आया हूं। आजकल मुझे गाड़ी के बजाए बाइक पर घूमना बहुत पसंद है। हालांकि पापा को ये ख़तरनाक लगता है। पर एकदम सुबह कभी-कभी वो मुझे बाइक पर ले जाते हैं। बिल्‍ली मौसी ने मुझसे हाथ मिलाया और मुझे 'हैपी दीवाली' भी कहा। मैंने कहा कि शाम को मिलते हैं। मैं आपके लिए दूध-मिठाई लाऊंगा।   
IMG_7989तो इस तरह बिल्‍ली-मौसी से सुबह-सुबह बड़ी अच्‍छी मुलाक़ात रही। उन्‍होंने हम बच्‍चों से एक request भी की है, आवाज़ वाले पटाख़े ना फोड़ने की। हम सभी बिल्‍ली मौसी की बात मानेंगे। और कोशिश करेंगे कि हमारी दीवाली से उन्‍हें दिक्‍कत ना हो।  

IMG_7996इस तस्‍वीर में मैं पापा से कह रहा हूं कि बाइक लेकर चलिए।
अभी-अभी मैं अमृतसर की यात्रा से लौटा हूं। जल्‍दी ही इस सफर का ब्‍यौरा और तस्‍वीरें आपको दिखाता हूं।

पिछले महीने बहुत बिज़ी रहा। मुझे आजकल बच्‍चों को होने वाली बीमारी hand foot mouth हो गयी थी। एक हफ्ते में अपने आप वो ठीक हो गई। उसके बाद खाने की किसी चीज़ से एलर्जी हो गई है। मम्‍मा ने एक डायरी बनाई है और नोट कर रही हैं ताकि पता चले कि किस चीज़ से एलर्जी हुई है। शायद गाय के दूध से है एलर्जी।

अच्छा चलता हूं। बहुत काम है। पूरे घर को सजाना है।
आप सभी को दीपावली को हार्दिक शुभकामनाएं।

जादू क्‍यों

हम हैं जादू के मम्‍मी-पापा ।
'जादू' अपनी मुस्‍कानें लेकर आया है हमारी दुनिया में ।
हम चाहते हैं कि ये मुस्‍कानें हम दुनिया के साथ बांटें ।

जादुई दिन

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