26 July 2010

'जादू' ने मनाया ऋत्विक भैया का बर्थडे।

पता है शनिवार को ऋत्विक भैया का बर्थडे था।
बारिश बहुत हो रही थी। मैंने सोचा कौन इत्‍ती दूर तक जाएगा इसलिए ऋत्विक भैया को ही बुलवा लिया। कहा यहीं आईये बर्थडे मनाते हैं।

शायद आपको पता नहीं है कि अपना बर्थडे छोड़कर बाक़ी सभी का जन्‍मदिन मैं ख़ास तरीक़े से मनवाता हूं। पहले तो ऋत्विक भैया की खिलाई-पिलाई की गयी। ताकि उनमें थोड़ी ताक़त आ जाए मेरा मुक़ाबला करने की। उसके बाद मैंने अपना बैट उठाया और उन्‍हें जन्‍मदिन की बधाई देनी शुरू कर दी। इस हरे वाले बैट से ऋत्विक भैया की ख़ूब पिटाई की मैंने

1उसके बाद लगा कि ज्‍यादा मज़ा नहीं आ रहा है तो मैं अपना 'ब्‍लू' बैट भी ले आया। यहां देखिए--दो-दो बैटों से ऋत्विक भैया की पिटाई की। और वो बेचार हंसते रहे।  2फिर लगा कि अभी कसर बाक़ी है। इसलिए मैं सोफे पर चढ गया और उनके बाल खींचने लगा।
3पता है अगर कोई मुझसे बाल खिंचवाए तो बाल मज़बूत बन जाते हैं। जैसे पापा के बाल मैं रोज़ मज़बूत करता हूं। मम्‍मा के भी। अब ऋत्विक भैया के बाल मज़बूत बनाने की बारी थी। ये था मेरा तोहफ़ा उनकी सालगिरह पर।
4 बाल खींचने के लिए ऋत्विक भैया की पीठ पर चढ़ने में बड़ा मज़ा आया।
5उसके बाद उनकी पीठ पर धौल जमाने में भी मज़ा आया।
6 ऋत्चिक भैया कह रहे थे कि ये उनका 'बेस्‍ट बर्थडे' था। मैंने जो मनाया था। अब हर साल वो बर्थडे पर मुझसे पिटाई करवाया करेंगे।

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क्‍या आपको अपना बर्थडे मनाना है मेरे साथ।
तो मेरे बैट तैयार हैं।
मैं जादू हूं ना मैं कुछ भी कर सकता हूं।

19 July 2010

'जादू' के ब्‍लॉग का पहला बर्थडे है आज।

पता है। आज उन्‍नीस जुलाई है।

आज का दिन आपके लिए भले ही कोई मायने ना रखता हो पर मेरे लिए बहुत मायने रखता है। आज मेरे ब्‍लॉग की पहली सालगिरह है। पिछले साल आज ही दिन मेरा ब्‍लॉग शुरू हुआ था।

इस पूरे साल मैं ज्‍यादा पोस्‍टें तो नहीं लिख पाया। पर आपका बहुत सारा प्‍यार मुझे मिला। सच्‍ची मैं चाहता तो यही हूं कि रोज़ एक पोस्‍ट लिखकर अपने हाल-चाल और अपनी शरारतें आप तक पहुंचाऊं। पर कितना तो बिज़ी रहता हूं मैं। घर पर कितनी मौज मस्‍ती। और आजकल तो बाहर भी जाने लगा हूं घूमने। पता है अभी दो दिन पहले पापा के साथ मैं अकेले मलाड तक गया था। इत्‍ती दूर तक बिल्‍कुल अकेले। और मैंने पापा को ज़रा भी तंग नहीं किया। बारिश भी हो रही थी। लौटते वक्‍त तो मैं सो गया। फिर पापा ने कुशन लगाकर मेरी सीट को रिक्‍लाइन किया और आराम से गाड़ी चलाकर मुझे घर लेकर आए।

आज मैं सबसे पहले अपने ब्‍लॉग को हैपी बर्थडे तो कह दूं ज़रा।
आप भी बिल्‍ली मौसी और मेरे साथ गाईये।



और अब ज़रा मेरी ताज़ा तस्‍वीरें देखिए।
IMG_7076एक दिन मैं मम्‍मा-पापा के साथ 'क्रोमा' गया था। पापा की तरह मुझे भी 'क्रोमा' जाना बड़ा पसंद है। वहां नए-नए गैजेट्स जो देखने मिलते हैं। वहां बड़े-बड़े एल.सी.डी. को देखकर मेरा तो मन कर गया कि मुझे इनके भीतर जाना है। और फिर मैंने कोशिश शुरू कर दी।
IMG_7184क्‍या मैं इन जापानी आंटी के साथ एल.सी.डी. के अंदर नहीं जा सकता। वो तो पापा ने मना कर दिया नहीं तो पहुंच ही जाता। अरे मैं जादू हूं ना मैं कुछ भी कर सकता हूं। देखिए ना यहां 'हाइपरसिटी' में मैं इस बड़े-से 'डॉगी-डॉगी भू भू' से बातें कर रहा हूं। इसे गले भी लगा रहा हूं। मेरा मन किया कि इसे अपने घर ले आऊं। पर मम्‍मा ने कहा इत्‍ता बड़ा डॉगी हमारी गाड़ी में कैसे जायेगा। अगली बार ट्रक लेकर आएंगे तब ले चलेंगे।
IMG_7064मम्‍मा-पापा की बातें सुनकर मुझे बड़ी हंसी आती है। IMG_6933उन्‍हें लगता है कि मैं उनके बहाने समझ नहीं रहा हूं। पर आजकल मुझे सब समझ आता है। पापा कहते हैं बॉल लाओ तो मैं फौरन बॉल और बैट लेकर खेलने के लिए तैयार हो जाता हूं। मम्‍मा जब म्‍यूजिक लगाती हैं तो मैं डान्‍स करने लगता हूं। और एक सीक्रेट बात बताऊं क्‍या। आजकल मैं मम्‍मा से म्‍यूजिक की तालीम भी ले रहा हूं। मैंने सिन्‍थेसाइज़र बजाना शुरू कर दिया है।
IMG_7293इसके बारे में विस्‍तार से बाद में बताऊंगा। नीचे की दो तस्‍वीरें देखिए। एक में मैं हाइप‍रसिटी में टहल रहा हूं। और दूसरी तस्‍वीर में मैं वहीं के फर्श पर लोट लगा रहा हूं। क्‍योंकि मम्‍मा ने कहा कि अब घर चलो देर हो रही है। जबकि मैं घर लौटना ही नहीं चाहता था।
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अच्‍छा अब चलता हूं।
आप सब मुझे अपने ब्‍लॉग की पहली सालगिरह की बधाईयां ज़रूर दीजिएगा। मुझे अच्‍छा लगेगा। जल्‍दी ही फिर मिलेंगे।


मैं चला अपनी 'कार' चलाने। पिंक वाली।

01 July 2010

डॉक्‍टर्स डे पर आज आपने अपने डॉक्‍टर को थैंक्‍यू कहा क्‍या।

 

 

 

 

 

 

 

 

पता है आज एक बहुत ख़ास दिन है।


आज से नया महीना तो शुरू हो ही रहा है।
पापा कहते हैं कि जुलाई के महीने की शुरूआत उन्‍हें स्‍कूल शुरू होने की याद दिलाती है।

वैसे आपको ये भी बता दूं कि इसी महीने मेरा ये ब्‍लॉग शुरू हुआ था। यानी जल्‍दी ही आपके 'जादू' का ये ब्‍लॉग एक साल पूरे करने जा रहा है।

 



लेकिन आज का दिन क्‍यों ख़ास है, ये आपको याद आया। आज है 'डॉक्‍टर्स डे'। ये क्‍यों मनाया जाता है इस बारे में ज्‍यादा जानने के लिए यहां चटका लगाएं। और यहां भी।
मैंने सोचा कि आज 'डॉक्‍टर्स डे' के उपलक्ष्‍य में मैं अपने डॉक्‍टरों को धन्‍यवाद तो दे दूं।


सबसे पहले धन्‍यवाद देना चाहूंगा उनको जिन्‍होंने सबसे पहले मुझे गोद में लिया। ये हैं डॉक्‍टर भूपेंद्र अवस्‍थी। जब मैं दुनिया में आया तो ऐसा दिखता था। jaadoo first day fotos_004डॉक्‍टर अवस्‍थी ने ही मेरी जांच की थी। और मुझे पापा की गोद में दिया था। मैं आज भी सूर्या हॉस्पिटल में डॉक्‍टर अवस्‍थी के पास जाता हूं। वहां जाकर मस्‍ती करने में बड़ा मज़ा आता है। डॉक्‍टर हमेशा कहते हैं--'जादू कितना अच्‍छा दिखता है ना'। वो मुझे बहुत प्‍यार करते हैं।

डॉक्‍टर अवस्‍थी तो सांताक्रूज़ में हैं ना। मुझे दूरियों का अंदाज़ा तो नहीं पर पापा कहते हैं कि क़रीब बीस किलोमीटर दूर है उनका हॉस्पिटल। इसलिए बोरीवली में भी मैंने एक डॉक्‍टर अंकल से दोस्‍ती कर ली है। उनका नाम है डॉक्‍टर देवांग शाह। चूंकि मेरे टीकाकरण का सारा जिम्‍मा उन्‍हीं का है इसलिए मैं उनके चेम्‍बर में जाते ही रो देता हूं। मुझे याद आ जाता है कि यहां तो सुई लगती है। 
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डॉक्‍टर शाह बहुत मज़ाकिया हैं और हमेशा मम्‍मा-पापा को हंसाते रहते हैं। मैं उनकी टेबल उलट-पुलट कर देता हूं।


IMG_3972फिर हमारे घर के पास पापा-मम्‍मा के दोस्‍त हैं मुळे दंपति। ये दोनों भी डॉक्‍टर है। यहां डॉक्‍टर अंकल से तो नहीं पर डॉक्‍टर आंटी से मेरी अच्‍छी दोस्‍ती है। मैं उनकी गोद में भी मस्‍ती करता हूं। उनके घर पर एक बहुत प्‍यारा डॉगी डॉगी भू भू है। जिससे मेरी दोस्‍ती हो गई है। 

और अब जिक्र मेरे प्‍यारे डॉक्‍टर मामा का।


डॉक्‍टर मामा इलाहाबाद में हैं और मुझे मेरे पैदा होने के पहले से जानते हैं। उनसे मेरी कितनी दोस्‍ती है इसके बारे में आप यहां पढ़ते ही रहते हैं। पहचाना डॉक्‍टर मामा को।

Doctor Mama और डॉक्‍टरनी मामी का जिक्र भला कैसे छूट जायेगा। ये रही डॉक्‍टरनी मामी। देखिए कित्‍ती सारी चीज़ों के बीच में बैठी हैं। Doctor Mami लीजिये मैंने तो सबको डॉक्‍टर्स डे की शुभकामनाएं दे दीं।
आपने अपने डॉक्‍टर को हैपी डॉक्‍टर्स डे कहा क्‍या। उन्‍हें थैंक्‍यू कहा क्‍या।


चलिए चलिए जल्‍दी कहिए। और फिर मुझे बताईये।
मैं चला फुटबॉल खेलने।

जादू क्‍यों

हम हैं जादू के मम्‍मी-पापा ।
'जादू' अपनी मुस्‍कानें लेकर आया है हमारी दुनिया में ।
हम चाहते हैं कि ये मुस्‍कानें हम दुनिया के साथ बांटें ।

जादुई दिन

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