29 June 2010

मम्‍मा-पापा को शादी की सालगिरह मुबारक

Picture 003पता है, आज मेरे मम्‍मा-पापा की शादी की सालगिरह है।
इसलिए मैं उन्‍हें दे रहा हूं बधाई।

 


आज मैंने सोचा है कि आज मैं उन्‍हें ज्‍यादा डिस्‍टर्ब नहीं करूंगा।
ख़ासतौर पर मम्‍मा को। क्‍योंकि उन्‍हें दिन भर चकर-घिन्‍नी जैसा घुमाता हूं मैं।
आज मैं कोशिश करूंगा कि थोड़ी कम बदमाशी करूं।

पता है। आज सबेरे जब मम्‍मा-पापा चाय पी रहे थे, तो मैंने अपनी मम्‍मा को एक गिफ्ट भी दिया, शादी की सालगिरह पर।

मैं जादू हूं ना, मैं कुछ भी कर सकता हूं।
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और मैंने पापा के कंधे पर चढ़कर मस्‍ती भी की।
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हां तो मैं कह रहा था कि आज मैं मम्‍मी-पापा को ज्‍यादा डिस्टर्ब नहीं करूंगा। वैसे भी डॉक्‍टर मामा ने इस अवसर पर इलाहाबाद से मेरे लिए एक ऐसी चीज़ भेजी है जिसमें मैं पूरी तरह से 'बिज़ी' रह सकता हूं...वो भी बहुत देर तक। डॉक्‍टर मामा ने मेरे यानी जादू के लिए 'जादुई ड्रॉइंग बुक' भेजी है। ये सब देखते हुए मुझे ज़रा हैरत हुई कि मम्‍मा-पापा की वेडिंग एनीवर्सरी पर मेरे लिए तोहफ़ा क्‍यों। डॉक्‍टर मामा ने इसे क्लियर किया है। उन्‍होंने लिखा है---'अरे भई आज जब तुम हमारी भेजी इन जादुई किताबों पर तस्‍वीर बनाओगे या उनमें रंग भरोगे तब तुम्‍हें ऐसा करते देखकर उन्‍हें जो खुशी मिलेगी इससे बढ़कर भला कोई तोहफा उनके लिए हो सकता है क्‍या।'


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मामा ने मम्‍मा-पापा के लिए एक बड़ा-सा पैकेट भी भेजा है। पर मुझे तो अपनी बुक मिल चुकी थीं। इसलिए मैंने उसे सिर्फ उलट-पलट कर ही देखा। तो आज 'जादू' अपने मम्‍मा-पापा को शादी की सालगिरह की बधाई दे रहा है। शाम को एक निजी पार्टी होगी। उसके बारे में वक्‍त मिला तो ज़रूर बताऊंगा। अब देखिए ना कित्‍ता बिज़ी हूं मैं।

अभी तक आज के अख़बार नहीं फाड़े--उन्‍हें फाड़ना बाकी है।
किचन की ट्रॉलियों से खींचतान नहीं की।
शू-रैक से जूते नहीं निकाले।
बाथरूम में घुसपैठ नहीं की।
पापा का चश्‍मा नहीं खींचा।
बेडरूम में जाकर छिपा नहीं।
सोफे पर चढ़ा नहीं।
रिमोट को छिपाया नहीं।

...............................बाप रे। आज तो मैंने कुछ भी नहीं किया। अच्‍छा चलता हूं।  
शाम की तैयारी भी तो करनी है।

20 June 2010

जादू ने कहा पापा से--'हैपी फादर्स डे'

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

पता है आज 'फादर्स डे' है। यानी पितृ दिवस।


आज सबेरे मैं अपने पापा के साथ ख़ूब खेला।

 


वो तो रोज़ खेलता हूं।


और उन्‍हें हैपी फादर्स डे भी कहा।

मैं अपने पापा से बहुत प्‍यार करता हूं। पता है रोज़ शाम को जब उनके दफ्तर से घर लौटने का वक्‍त होता है...तो मुझे अहसास हो जाता है कि पापा आने वाले हैं। जबकि मुझे घड़ी देखना नहीं आता। अगर किसी वजह से पापा को देर हो जाए या उनका कुछ और शेड्यूल रहे तो मुझे घर में ज़रा-भी अच्‍छा नहीं लगता और मैं मम्‍मा को परेशान कर के रख देता हूं।

दरअसल रोज़ शाम को पापा दफ्तर से आते ही मेरे साथ ख़ूब उछल-कूद मचाते हैं, धमाचौकड़ी करते हैं। हम पूरे घर में खिलौने बिखेर देते हैं। पूरे घर में दौड़ते हैं...हंगामा मचाते हैं। मैं बॉल फेंकता हूं पापा दौड़कर पकड़ते हैं। फिर मैं पापा के ऊपर घोड़ा भी बनता हूं। और उछल उछलकर खेलता हूं। इसलिए शाम को मैं उन्‍हें बहुत मिस करता हूं।

वैसे तो रोज़ सबेरे जब मेरी नींद खुलती है, तो मैं आवाज़ देकर फ़ौरन उन्‍हें बुलाता हूं। फिर हम बेड पर धमाचौकड़ी करते हैं। मैं पापा के ऊपर घोड़ा बनकर खेलता हूं। विन्‍डो से बाहर का नज़ारा देखता हूं। पर जब पापा मॉर्निंग-ट्रान्‍स्‍मीशन में होते हैं--तो मुझे अच्‍छा नहीं लगता। नींद खुलती है तो पापा घर में दिखते नहीं हैं।

 



वैसे आजकल मैं मम्‍मा के बग़ैर...पापा के साथ गाड़ी पर घूमता हूं। कार में भी और बाइक पर भी। इस तरह मुझे घूमने का मौक़ा ज्‍यादा मिल जाता है। हम अकसर घर का ज़रूरी सामान लेने साथ में जाते हैं। कुल मिलाकर मैं आजकल पापा का 'राइट-हैन्‍ड' बन गया हूं। अरे भई मदद करता हूं उनकी। ''सच्‍ची''। 
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चलिए आपको दिखाऊं पापा के साथ मैं कैसे मस्‍ती करता हूं।
पापा कंप्‍यूटर पर काम कर रहे हैं और मैं उनके कंधों पर मस्‍ती कर रहा हूं। हे हे हे।
Picture 7यहां मैं पापा के साथ ब‍िल्डिंग के टेरेस पर हूं। पीछे दूर खाड़ी के पार आपको गोराई विलेज में बने प्रसिद्ध बौद्ध पैगोडा का नुकीला शिखर दिख रहा होगा।
IMG_5661मैं रोज़ पापा के साथ ये खेल खेलता हूं। लिस्‍ट पढिए ज़रा।


छिपा-छिपी
पकड़ा-पकड़ी
हॉकी
क्रिकेट
फुटबॉल
हॉकी से क्रिकेट
बैट से हॉकी
बैट से फुटबॉल
फुटबॉल से क्रिकेट
हॉकी से फुटबॉल वग़ैरह। अब


मैं जादू हूं ना मैं कुछ भी कर सकता हूं।

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अब देखिए ना ऊपर वाले फोटो में मैं और पापा एक दूसरे की नकल कर रहे हैं।
और ये फोटो तब का है जब पहली बार पापा ने मुझे गोद लिया था।
IMG_2265इलाहाबाद और बनारस के बीच एक ढाबे पर पापा की गोद में। यहां की चाय बड़ी शानदार होती है। ऐसा पापा कहते हैं। IMG_4761 आजकल मैं पापा के रेडियो प्रोग्राम ध्‍यान से सुनता हूं। सेट-टॉप बॉक्‍स के ज़रिए जब टी.वी.पर विविध-भारती सुनाई देती है और जब पापा बोलते हैं तो मैं एकदम से चौंक भी जाता हूं। मुझे समझ नहीं आता कि पापा घर में तो हैं नहीं, फिर ये आवाज़ कहां से आ रही है। अरे भई मेरे पापा हैं ना...वो भी तो कुछ भी कर सकते हैं। 


जादू की ओर से पापा को हैपी फादर्स डे। 

14 June 2010

डॉक्‍टर मामा ने लिखी 'जादू' पर कविता

पता है, डॉक्‍टर मामा ने मेरे लिए एक कविता लिखी है।
अपनी पिछली ही पोस्‍ट में मैंने आपको बताया था कि मेरे डॉक्‍टर मामा का जन्‍मदिन है। मैंने अपने डॉक्‍टर मामा पर कविता भी लिखी थी और एक छोटा-सा तोहफ़ा भी भेजा था। 
Jadoo Gift-2
और एक गाना भी सुनवाया था--'मामाजी के रॉकेट पर हम चांद की सैर को जायेंगे'।


डॉक्‍टर मामा ने मुझे return gift में क्‍या भेजा है पता है।
ये देखिए।
mail.google.com 
 
हा हा हा। उन्‍होंने लिखा है--

बस ये समझ लो कि रॉकेट पर
तो नहीं,लेकिन अपनी पीठ पर बैठाकर हम तुम्हें सैर को ले जा रहे हैं ।


तो लीजिए।


डॉक्‍टर मामा की चिट्ठी और कविता दोनों पढिए।



प्यारे-प्यारे जादू,
दो दिन से समय ही नहीं मिल पा रहा था, तो आज दिन में हमने ये किया कि जब तक
हमारा एक मरीज़ ऑपरेशन थियेटर से बाहर निकले और दूसरा अन्दर आये, तब तक हमने सर्जन्स रूम में बैठकर फटाफट पाँच-दस मिनट में तुम्हारे ऊपर एक कविता लिख ही डाली । सिस्टर्स लोग यही समझती रहीं कि हम बैठकर पेशेन्ट्स के ऑपरेशन नोट्स लिख रहे हैं । उन्हें क्या पता कि हम "जादू के मामा" हैं - हम भी कहीं भी,कभी भी,
कुछ भी कर सकते हैं ।

तो यह रही हमारी "कविता" तुम्हारे लिये - तुम्हारे जितनी ही छोटी ।
ज़ाहिर है कि कविता बहुत ही उच्च कोटि की है; क्यों कि एक तो हमारी लिखी हुई है,
दूसरे तुम्हारे पर लिखी गयी है :

हँस सकता है रो सकता है
जब चाहे जग-सो सकता है
रात-रात भर अपने मम्मी-
पापा को जगवा सकता है ।
माइक्रोफ़ोन से सुन सकता है
इयर फ़ोन पर कह सकता है
खटर-पटर कर की-बोर्ड पर
कम्प्यूटर पर/(जाने क्या-क्या) लिख सकता है ।
हाथ में आयी किसी चीज़ के
पुर्जे-पुर्जे कर सकता है
उलट-पुलट कर पूरे घर को
जो भी पाये खा सकता है ।
दुनिया जिसको शेर समझती
उसको भालू कह सकता है
क्योंकि यह "जादू"है भइया
कभी भी,कुछ भी कर सकता है ।
- डॉक्टर मामा

09 June 2010

डॉक्‍टर मामा के लिए जादू की कविता और गाना।

पता है, आज मेरे डॉक्‍टर मामा का जन्‍मदिन है।


अरे वही डॉक्‍टर मामा जिन्‍होंने इत्‍ती सारी कविताएं और पहेलियां बुझाईं हैं मेरे लिए।
मेरे डॉक्‍टर मामा इलाहाबाद में रहते हैं। और मेरे पैदा होने से लेकर अब तक उन्‍होंने मुझसे बहुत सारी बातें की हैं। चिट्ठियां लिखी हैं। गाने सुनवाए हैं और कविताएं भी भेजी हैं। आपमें से जो लोग मेरे ब्‍लॉग पर नियमित आते रहते हैं, वो डॉक्‍टर मामा को ज़रूर पहचानते होंगे। ख़ासकर समीर अंकल। जिन पर वो हमेशा पहेलियों के बाउंसर मारते रहते हैं।


नवंबर में जब मैं इलाहाबाद गया था तब तो मैं छोटा-सा था ना, पर डॉक्‍टर मामा की गोद में खूब उछल-कूद की थी मैंने। बड़ा मज़ा आया था। अरे हां..याद आया। डॉक्‍टर मामा मुझे इलाहाबाद में रेडियो की दुनिया की जानी-मानी हस्‍ती बड़े भैया यानी श्री विजय बोस से मिलवाने भी ले गए थे। और मैंने 'बड़े भैया' से बहुत सारी बातें पूछीं। सच्‍ची। ये देखिए तस्‍वीर। IMG_4715मम्‍मा कहती हैं कि इलाहाबाद में रहने वाले और रेडियो सुनने वाले सभी लोग 'बड़े भैया' को जानते हैं। उनसे सबकी बचपन की यादें जुड़ी हैं। देखिए मेरी भी यादें जुड़ गयीं ना। हां तो आज डॉक्‍टर मामा का जन्‍मदिन है इसलिए सबसे पहले उनके लिए ये केक।
1चॉकलेट-केक है ये। अभी दो दिन पहले मैं मम्‍मा-पापा के साथ ribbons and ballons  गया था। मम्‍मा ने सोचा कि 'पेस्‍ट्रीज़' पैक कराके घर ले आयेंगे। लेकिन मैं जैसे ही शॉप में पहुंचा मुझे फौरन याद आ गया कि मेरा birthday cake तो यहीं से लिया गया था। बस मैंने जिद पकड़ ली और पाइनएपल और फ्रेश-फ्रूट-पेस्ट्री चखकर ही माना। मम्‍मा को बड़ी हैरत हुई कि मुझे कैसे याद है ये शॉप। मैं जादू हूं ना कुछ भी कर सकता हूं।


केक तो हो गया, अब ज़रा डॉक्‍टर मामा को एक गाना भी सुनवा दिया जाए। भई डॉक्‍टर मामा का जन्‍मदिन है तो 'मामाजी' वाला ही गाना सुनते हैं--

song: mama ji ke rocket pe hum


singer: asha bhosle
film: didi
lyrics: sahir
music: n. dutta
year: 1959



मज़ा आया ना। अब वो कविता, जो मैंने डॉक्‍टर मामा के लिए लिखी है--ख़ास उनके जन्‍मदिन पर।

डॉक्‍टर मामा कितने अच्‍छे
थोड़े बड़े हैं थोड़े बच्‍चे
दिल के हैं ये कितने सच्‍चे
पतंग उड़ाने में हैं कच्‍चे kite

कभी-कभी ये छत पर जाते

टाई लगाकर पतंग उड़ाते

पतंग उड़ाकर फोटो खिंचाते

पहेलियां भी खूब बुझाते

डॉक्‍टर मामा कलाकार हैं 
ज्ञान के ये भंडार हैं

सचमुच बड़े मज़ेदार हैं
डॉक्‍टर मामा शानदार हैं

कितना अच्‍छा हो अगर
..……………………..

डॉक्‍टर मामा बच्‍चे बन जाएं

जादू के संग नाचें-गाएं

पतंग उड़ाएं, पेंच लड़ाएं

कंचे खेलें, सायकिल चलाएं

मेरे डॉक्‍टर मामा को
जन्‍मदिन की शुभकामनाएं


डॉक्‍टर मामा, कैसी  लगी मेरी कविता। आपको जन्‍मदिन की एक बार फिर खूब सारी शुभकामनाएं। अब मैं जा रहा हूं केक खाने।
वैसे भी....
मैं जादू हूं ना, मैं कुछ भी कर सकता हूं।

जादू क्‍यों

हम हैं जादू के मम्‍मी-पापा ।
'जादू' अपनी मुस्‍कानें लेकर आया है हमारी दुनिया में ।
हम चाहते हैं कि ये मुस्‍कानें हम दुनिया के साथ बांटें ।

जादुई दिन

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