28 February 2010

डॉक्‍टर-मामा का भेजा खिलौना और चोर-पुलिस का खेल

मेरे बर्थडे पर डॉक्‍टर मामा ने मुझे एक ही दिन पहले एक खिलौना भेजा कुरियर से । कुरियर वाले ने इसे मम्‍मी को देने से पहले ही घर के सामने हाथ से छोड़ दिया, मेरा मतलब उसके हाथ से छूट गया । जबकि डॉक्‍टर मामा ने उस पर लिख दिया था Don't Drop. ख़ैर--उसमें जो खिलौना था उसे देखकर मेरा मन ललच उठा । पर मम्‍मी ने कहा कि तुम्‍हारा बर्थडे तो कल है ना तो इससे आज मत खेलो । मैं मन मारके रह गया । बहरहाल मेरे जन्‍मदिन के दिन मुझे मौक़ा मिल ही गया फिर देखिए मैंने क्या किया । पहले मैंने इस खिलौने को पहचाना
1उसके बाद मैंने इसका पीछा करना शुरू किया । बैटरी से चलने वाला ये खिलौना पूरे हॉल में 'जादू जादू' कहकर गाना गाता हुआ घूम रहा था ।  और मैं था उसके पीछे ।

2इसके

बाद पता है क्‍या हुआ । मेरे भीतर जिद आ गयी कि मैं इसे पकड़ कर ही रहूंगा 3पीछा जारी है । चोर पुलिस का खेल चल रहा है ।  4अरे बाबा रे । ये खिलौना तो बड़ा ही तेज़ है । मुझे चकमा देता जा रहा है । कोई आयडिया लगाना पड़ेगा । 5ये बात । अब मैंने इसे कान पकड़कर खींच लिया है । अंय इसका एक कान तो कल ही टूट गया था जब कुरियर वाले ने इसे गिरा दिया था । मैंने तो इसकी कान की जगह लगी एल.ई.डी. को खींचकर उसका वायर भी बाहर निकाल लिया है ।
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जैसे ही मैंने ज़रा सी ढील दी, ये खिलौने वाला बच्‍चा छूटकर भाग निकला और मुझे मुंह चिढ़ाने लगा । पहले उस तरफ गया । 7और फिर इस तरफ चला आया ।  मैं थोड़ी देर बैठकर इसकी शरारत देखता रहा । 8 उसके बाद फिर-से उसे सज़ा दी । कान पकड़कर खींचने की सज़ा ।
9इस बीच मम्‍मी आ गयीं । और उन्‍होंने बेचारे को बचा लिया ।
10 पर जैसे ही मम्‍मी का ध्‍यान भटका मैं फिर से शुरू हो गया ।
11पर चिंता मत कीजिए । सब सही-सलामत है । बैटरी एक्‍जॉस्‍ट हो गयी है । इसलिए खिलौना फिलहाल शांत है । पापा के पास एक्‍स्‍ट्रा बैटरीज़ हैं । जब वो लगायेंगे फिर से चोर-पुलिस का खेल शुरू हो जायेगा । 

27 February 2010

इस तरह मनाया जादू ने अपना पहला जन्‍मदिन

पता है कल मेरा बर्थ-डे था । मम्‍मी-पापा जाने कब से इस दिन का इंतज़ार कर रहे
थे । हालांकि कुछ महीने पहले नानी का निधन हो गया था इसलिए इस साल मेरे जन्‍मदिन के सारे 'आयोजन' कैंसिल कर दिये गए थे ।

 


चूंकि पिछली रात मैं देर तक जागा था इसलिए ज़ाहिर था कि नींद का अपना कोटा पूरा करके ही जागना था, फिर चाहे वो जन्‍मदिन ही क्‍यों ना हो । आजकल मेरी एक आदत बन गई है । जागते ही सबसे पहले मैं बेडरूम की खिड़की से जायज़ लेता हूं कि मेरे पास-पड़ोस में सब कुछ ठीक चल रहा है या नहीं । कल भी सबसे पहले मैंने खिड़की पर खड़े होकर कॉलोनी का जायज़ा लिया । IMG_5960 बाहर धूप खिली हुई थी । बंबई में आजकल गर्मी की शुरूआत हो रही है । हालांकि रातें थोड़ी ठंडी होती हैं । जब मैंने देखा कि सब ठीक चल रहा है । लोग काम पर जा रहे हैं । बच्‍चे खेल रहे हैं । शहर का सारा काम व्‍यवस्थित तरीक़े से चल रहा है । इसलिए मैं अपनी दिनचर्या की शुरूआत कर सकता हूं ।

मम्‍मी-पापा मेरे जागने का इंतज़ार कर रहे थे । मेरे जागते ही फ़ौरन उन्‍होंने मुझे हैपी-बर्थडे कहा । मुझे बहुत अच्‍छा लगा । पापा के साथ बेड पर मैंने पकड़ा-पकड़ी का खेल खेला । ये खेल मैं रोज़ सुबह उठते ही खेलता हूं । कल भी खेला ।
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सुबह जन्‍मदिन की बधाई का पहला फ़ोन आया मेरे दादा-दादी और बुआ का । और पहला एस.एम.एस आया इलाहाबाद से डॉक्‍टर मामा का । उसके बाद ननिहाल से फ़ोन आए और फिर तो दिन भर फ़ोन-कॉल्‍स का तांता लगा रहा । इसी दौरान मम्‍मी ने कल अपने ब्‍लॉग पर मेरे जन्‍म के बारे में अपनी डायरी लिखी । आने पढ़ी क्‍या । यहां पढियेगा । नहा-धोकर मैं तैयार हुआ, तब तक पापा ने कमरे में सजावट कर दी थी । जैसे ही एक बलून दीवार से निकलकर गिरा, मैंने उसे लपक लिया ।
IMG_5981 उसके बाद मैं बलून से बहुत देर तक खेलता रहा । डॉक्‍टर-मामा ने कुरियर से मुझे बर्थ-डे गिफ्ट भेज दिया था । जो मुझे पच्‍चीस तारीख़ को दोपहर को ही मिल गया था । लेकिन मम्‍मी ने मुझे इसे अपने जन्‍मदिन पर ही खेलने दिया । IMG_5986 पता है ये 'जादू-जादू' बोलकर मुझे चिढ़ा रहा था । हंस रहा था । मैंने भी इसे पूरे हॉल में खूब दौड़ाया । इस बारे में विस्‍तार से कल पढियेगा । कल का दिन ज़ोरदार मस्‍ती करने का दिन था और मैं अपनी मस्‍ती में मगन रहा ।

उस दिन 'शॉपर्स-स्‍टॉप' में पता है क्‍या हुआ । मम्‍मी-पापा मेरे जन्‍मदिन की शॉपिंग कर रहे थे तभी मुझे एक गाड़ी पसंद आ गयी । वैसे तो मैंने उस दिन पूरे शॉपर्स-स्‍टॉप का सामान बिखेर दिया था । पर दो गाडियों पर मैं खूब खेला । उसमें से एक पापा ने मुझे खरीदकर दे दी ।


IMG_5980IMG_6010जब इस गाड़ी से मैं खेल-खेलकर बोर हो गया तो पता है मैंने क्‍या किया । खुद ही देख लीजिए ।


IMG_6030मैं गाड़ी की उस जगह पर जाकर बैठ गया जहां बिल्डिंग ब्‍लॉक्‍स रखे जाते हैं । मज़े की बात ये है कि जब हम मंदिर जा रहे थे तब भी फ़ोन आ गया । और मैं देखने लगा कि मुझे तो किसी से फोन पर बात करने मिल ही नहीं रही है । सारी बातें तो मम्‍मा-पापा ही कर रहे हैं । ये देखिए ।


IMG_6000फिर हम 'रिबन्‍स एंड बलून्‍स' गए । और मैंने वहां अपना पसंदीदा 'ब्‍लैक-फॉरेस्‍ट' केक ख़रीदा । केक-शॉप पर मैंने बहुत मस्‍ती की ।

मम्मा पेस्‍ट्री खा रही थीं । मैंने उस पर हाथ मार दिया । और उनसे जिद करके खूब सारी पेस्‍ट्री भी खाई ।
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घर आकर केक काटा जाना था । मौसी और ऋत्विक भैया भी आ गए थे । सबने मेरे लिए 'हैपी बर्थडे टू यू जादू' गाया और फिर मैंने केक काटा ।


IMG_6016IMG_6019IMG_6014 IMG_6039इस तरह मैंने सादगी से अपना जन्‍मदिन मनाया, खूब मस्‍ती की, खूब केक खाया और आखिर में पापा के साथ मिलकर सबको बाय-बाय भी किया ।


IMG_6041अनगिनत लोगों ने मुझे जन्‍मदिन की बधाईयां दीं । पापा की 'फेसबुक' पर । मम्‍मा के ब्‍लॉग पर । हम सबके ई-मेल पर । फ़ोन पर । सबको 'जादू' की तरफ से बहुत बहुत धन्‍यवाद । अपना प्‍यार इसी तरह बनाए रखिए । मैं भी ऐसे ही मौज-मस्‍ती करता रहूंगा । मैं जादूं हूं ना मैं कुछ भी कर सकता हूं ।

जादू क्‍यों

हम हैं जादू के मम्‍मी-पापा ।
'जादू' अपनी मुस्‍कानें लेकर आया है हमारी दुनिया में ।
हम चाहते हैं कि ये मुस्‍कानें हम दुनिया के साथ बांटें ।

जादुई दिन

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