09 September 2010

जादू पहुंचा अपनी ददिहाल जबलपुर

पता है कल सबेरे-सबेरे मैं अपने दादा-दादी के पास जबलपुर पहुंच गया।
मैं पहली बार अपने दादा-दादी के पास आया हूं। जबलपुर तक का ये सफ़र मेरे लिए आसान नहीं रहा। कल रवाना होते वक्‍त सबसे बड़ी दिक्‍कत ये हुई कि मुंबई में ऑटो और टैक्‍सी की हड़ताल हो गई। हमें तो टैक्‍सी से ही छत्रपति शिवाजी टर्मिनस यानी वी.टी. तक आना था। बहरहाल...तरकीब ये निकाली गई कि प्रदीप अंकल हमारी गाड़ी में साथ में बोरीवली स्‍टेशन जायेंगे और फिर गाड़ी लेकर वापस आ जाएंगे। 

प्रदीप अंकल ऑफिस से निकलकर आए, थोड़ा उनका इंतज़ार भी करना पड़ा और किसी तरह हम पहुंचे बोरीवली स्‍टेशन। एक बार फिर टैक्‍सी वालों से बात की गई। पर कोई राज़ी नहीं था। प्राइवेट टैक्सियों वाले भी जाते हुए डर रहे थे। इसलिए तय हुआ कि लोकल-ट्रेन से जाना ही ठीक रहेगा। यूं तो लोकल-ट्रेन में मैं दूसरी बार बैठा था। पर मुझे इस बार भी बहुत मज़ा आया। IMG_7652हमारे पास समय कम था। और धीमी लोकल से हम पहुंचने वाले थे दादर। जहां ट्रेन दो ही मिनिट रूकती है। डेढ़ बजे दादर पहुंचे। अब सिर्फ पंद्रह मिनिट थे हमारे पास। अच्‍छी बात ये थी कि मेरे भारी-भरकम सूटकेस को उठाने के लिए अचानक ही एक कुली-अंकल मिल गये थे। और उन्‍होंने हमें ना केवल समय पर प्‍लेटफार्म पर पहुंचाया बल्कि ठीक से सामान भी जमा दिया। इस दौरान मैंने पापा-मम्‍मा को ये बातें करते सुना कि अगर गाड़ी छूट गयी तो किसी और गाड़ी में इंतज़ाम कर लेंगे।

इस दौरान कोई टेन्‍शन में नहीं आया। ना मैं, ना मम्मा-पापा। बैठते ही गाड़ी चल पड़ी। और मुझे मिल गयी विन्‍डो सीट। ये देखिए। विन्‍डो-सीट का 'जादू'।
IMG_7653जादू ट्रेन में जाए और मस्ती ना करे--ऐसा कैसे हो सकता है। इस पूरे सफ़र में मैंने सबसे दोस्‍ती कर ली। पूरी बोगी में सारे लोग यही कह रहे थे--'जादू यहां आओ' 'जादू ऊपर मत चढ़ो' 'जादू बिस्किट खाओगे' 'जादू टॉफी खाओगे'। सबने मेरा बहुत ख़्याल रखा। इससे सबसे ज्‍यादा राहत मिली मम्‍मा को। दोपहर को उन्‍होंने थोड़ी नींद ले ली। इस दौरान पापा मुझ पर 'नज़र' रखे हुए थे।     
IMG_7660जब दौड़ते-कूदते बोर हो गया तो ख़ाली मिडिल बर्थ बैठकर अपना ब्‍लॉक वाला गेम खेला। और जब इससे भी बोर हो गया तो सारे ब्‍लॉक उठा-उठाकर फेंके। ज़ाहिर है कि सबने ब्‍लॉक उठा-उठाकर दिये।  
IMG_7664

ट्रेन में मैंने खाना भी खाया। अब आप ये तो जानते ही हैं कि मै बिना शरारत के कोई काम नहीं कर सकता। खाना खाते वक्‍त मैंने मम्‍मा-पापा को बहुत तंग किया।
IMG_7658रात को मैं आसानी से सोया नहीं। और जब सोया तो बीच-बीच में जागता रहा। सुबह साढ़े पांच बजे जब नींद खुली तो मुझे बहुत तेज़ भूख लगी थी। मम्‍मा को लगा कि ए.सी. कम हो गया है इसलिए शायद मुझे गर्मी लग रही है। बड़ी देर बाद मम्‍मा-पापा को समझ आया कि मुझे भूख लगी है। खाना खाने के बाद मैं फिर से खेलने लगा। साढ़े छह बजे हम जबलपुर पहुंच गए। ये देखिए दादाजी के साथ मेरी मौज-मस्‍ती।
IMG_7670और ये रही हमारी हुड़दंगी टोली। एक तरफ फ़ाजिल भैया और दूसरी तरफ शेबी दीदी। हम तीनों मिलकर पूरे घर को सिर पर उठा लेते हैं। पता है मैं कल दोपहर ज़रा भी नहीं सोया। क्‍योंकि मुझे तो खेलना था ना। बड़ी मुश्किल से शाम को छह बजे ज़बर्द्रस्‍ती सुलाया गया।

IMG_7686 जबलपुर में मैं क्‍या-क्‍या मौज-मस्‍ती करूंगा--इसकी ख़बर आपको इस ब्‍लॉग और जादुई-तस्‍वीरों से मिलती रहेगी। मैं चला खोवे की जलेबी लेने।
मैं जादू हूं ना मैं कुछ भी कर सकता हूं।

17 comments:

Anonymous said...

दिल खुश हो गया तुम्हारी मस्ती देखकर...


प्यार.

रंजन said...

दिल खुश हो गया तुम्हारी मस्ती देखकर...


प्यार.

डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर said...

अच्छा तुरंत मौज मस्ती भी शुरू हो गई. थोडा सेहत का ध्यान भी रखना, आजकल मौसम खराब है.
जय हिन्द, जय बुन्देलखण्ड और साथ में जय श्री राम

गिरीश बिल्लोरे said...

स्वागतम
मेरे इन नम्बर्स पर बताएं हम किधर मिलें
9926471072
9479756905
दर्शन मिलेंगे आपके
जादू को असीम स्नेह

Suresh Chiplunkar said...

वाह जादू जी,
क्या बात है, ईद की मीठी सिवईयों जैसी मीठी मुस्कान…

annapurna said...

जादू, तुमको ईद बहुत-बहुत मुबारक !

हाँ, जब क्षीरखुरमा और सेवियां खाना तो उनकी तस्वीर यहाँ लगा देना, मैं डाउनलोड कर लूंगी फिर हम दोनों एक साथ उनका स्वाद लेंगे.

ऐ ! ये खोवे की जलेबी क्या होती हैं ? मुझे बताना. मुझे नही मालूम.

माधव said...

congrats , enjoy the company of Grand Father/mother or others

byeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeee

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

सचमुच, आपकी पोस्ट बहुत बढ़िया है।
--
इसकी चर्चा बाल चर्चा मंच पर भी है!
http://mayankkhatima.blogspot.com/2010/09/16.html

pratima sinha said...

प्यारे जादू को ढेर सारा प्यार और ईद की मीठी-मीठी बधाइयाँ .

संगीता पुरी said...

इतनी शैतानी .. प्यारे जादू को ढेर सारा प्यार !!

महेन्द्र मिश्र said...

वाह जादूजी,
बहुत अच्छा लगा की आप ददिहाल में ईद मनाने आ गए हैं . जबलपुर में आपका स्वागत है .. ईद की भी शुभकामनाये और बधाई.
महेंद्र मिश्र
मोबाइल - 9926382551

प्रवीण पाण्डेय said...

जादू जी, दादू जी
मिलकर खेलें खेल-खिलौना।

Udan Tashtari said...

ईद की मुबारकबाद.


खोवे की जलेबी-बड़कुल के यहाँ से...ऐश करो बाबू!!

दीपक 'मशाल' said...

ऐ जादू... बच्चे तू जादू है या नशा है???? :)

Archana said...

ह्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म.....तो जबलपुर वाले हो.......ठीक है.....पहले तो....ईद मुबारक....

Vivek Rastogi said...

जबलपुर वालों सावधान मुंबई से जादू आ गया है, वहाँ खेलने... :)

और वैसे भी ट्रेन में जादू मस्ती न करे तो मजा ही क्या है।

sunheriyaadein said...

Wow!!! Yeh padhke toh mujhe apne bachpan ke din yaad aa gaye. Bahut mazaa aaya. Jadooji, aap aise hi masti karte rahiye!

जादू क्‍यों

हम हैं जादू के मम्‍मी-पापा ।
'जादू' अपनी मुस्‍कानें लेकर आया है हमारी दुनिया में ।
हम चाहते हैं कि ये मुस्‍कानें हम दुनिया के साथ बांटें ।

जादुई दिन

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