04 September 2010

जादू बना कान्‍हा

पता है 'जन्‍माष्‍टमी' पर मैं कान्‍हा बना था।
जन्‍माष्‍टमी के एक हफ्ते पहले जब मम्‍मा-पापा मेरे लिए 'कान्‍हा-पोशाक' लेने 'सन-प्‍लाज़ा' गए तो मैं वहां बड़ी मस्‍ती कर रहा था। मम्‍मा ने नापने के लिए मुझे जब कान्‍हा का कुरता पहनाया तो मैं उसे पहनकर भाग निकला। सब के सब मेरे पीछे-पीछे भागे। सब कह रहे थे--'अरे कान्‍हा रूको। अरे कन्‍हैया रूको तो सही। अरे धोती तो पहनते जाओ।'
मैं हंसता हुआ भागता चला जा रहा था।

मैंने आपको पहले ही बताया कि आजकल मम्‍मा ऑफिस जा रही हैं। जन्‍माष्‍टमी पर  भी वो ऑफिस जाने वाली थीं। पर फिर नहीं गईं। दिन में तो मैं सोता रहा। पर शाम को मम्‍मा ने मुझे तैयार कर दिया।
2
बस मेरी मौज-मस्‍ती शुरू हो गई। सारे घर में मैं भाग-दौड़ करता रहा। सोफे पर चढ़ा। गाव-तकिये/मसनद को घोड़ा बनाकर चलाता रहा। पापा की रिवॉल्विंग-चेयर पर चढ़ा। कप्‍यूटर के कान मरोड़े। फ़ोन पर बात की। रसोई में गया। आजकल मैं रसोई के प्‍लेटफार्म से लटक जाता हूं। और वहां जो कुछ भी रखा होता है, उसे अपने क़ब्‍ज़े में कर लेता हूं।


1 मम्‍मा की गोद में मस्‍ती करने का मज़ा ही और है। मुझे मम्‍मा के बाल खींचने अच्‍छे लगते हैं।
3 घर पर मौज-मस्‍ती करने के बाद मैं बाहर निकला। पास में 'पेप्‍सी-ग्राउंड' है ना। वहां 'मटकी-फोड़' हो रहा था। जाने कहां कहां से टोलियां आई थीं गोविंदाओं की। लाखों का ईनाम था। शोर भी बहुत हो रहा था। भीड़ भी थी। पर मुझे तो वो सारा नज़ारा देखना था। इसलिए मैंने मम्‍मा से कहा, चलिए पेप्‍सी ग्राउंड में चलें। देखिए लिफ्ट में कितनी शराफ़त से खड़ा हूं मैं।  
7और ये निकला लिफ्ट से बाहर। मम्‍मा का हाथ पकड़े बिना दौड़ लगाकर भाग निकला था मैं। वो तो मम्‍मा ने भागकर मेरा हाथ पकड़ लिया।
8अब दौड़ने की पर‍मीशन मिल गयी है। चलो दौड़ा जाए। पूरे बिल्डिंग के लोगों ने मुझे ख़ूब दुलार किया। सबने मेरे सिर पर हाथ भी फेरा।

9लीजिए। कान्‍हा अपनी शरारतों के बाद थक गये हैं। और सोफे़ पर आराम फ़रमा रहे हैं।

last

मेरी जन्‍माष्‍टमी तो मज़े में बीती। बस 'प्रभात स्‍टूडियो' नहीं जा सका। गुरूवार को बंद होता है ना। शुक्रवार को बारिश बहुत थी। आज कोशिश करेंगे कि कान्‍हा-पोशाक में प्रभात स्‍टूडियो जाएं।

कान्‍हा के भेस में मेरी बाकी तस्‍वीरें देखने के लिए 'जादुई-तस्‍वीरें' पर आईये।

14 comments:

दीपक 'मशाल' said...

आहा.. ये सही है.. वैसे भी कान्हा हो या जादू.. जादू हो या कान्हा.. दोनों एक ही बात हैं.. दोनों सुन्दर, दोनों नटखट..

प्रवीण पाण्डेय said...

बहुत अच्छे जादू जी।

Coral said...

so sweet .......बहुत ही जादुई हो कान्हा तुम !

बी एस पाबला said...

बहुत बढ़िया जादू!

रावेंद्रकुमार रवि said...

बहुत सुंदर लग रहे हो!
मेरी तरफ से
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर
बधाई और शुभकामनाएँ!

--
मेरा कान्हा, मेरा मीत ... ... .
आज सुना दे मुझको कान्हा ... ... .

रंजन said...

वाह् मेरे कान्हा... दिल खुश हो गया..

sunheriyaadein said...

Jadoo lives upto his name...he is truly magical!!! Lovely post and very sweet pics. Mazaa aa gaya padh ke :-)

सैयद | Syed said...

वाह !! बिलकुल नटखट कन्हैया लग रहे हो....

Udan Tashtari said...

वाह रे कान्हा...कुछ गोपियाँ नहीं मिली इतना घूम कर आये तब भी..:)

PD said...

जादू को भी भला कान्हा बनने की जरूरत है भला? वो तो Bydefault कान्हा ही है.. :)

ePandit said...

जन्माष्टमी पर जादू, कृष (कान्हा) बन गया है। बहुत सुन्दर कान्हा।

Amar Deep said...

krishna ka matlab hi hai apne jaadooi paash me jo sab ko baandh le...jaadoo ji bhi to krishna hi hain...

Vivek Rastogi said...

वा वा कान्हा...

हमारीवाणी.कॉम said...

खूबसूरत लग रहा है कान्हा, मतलब जादू!

क्या आप ब्लॉग संकलक हमारीवाणी.कॉम के सदस्य हैं?

जादू क्‍यों

हम हैं जादू के मम्‍मी-पापा ।
'जादू' अपनी मुस्‍कानें लेकर आया है हमारी दुनिया में ।
हम चाहते हैं कि ये मुस्‍कानें हम दुनिया के साथ बांटें ।

जादुई दिन

Lilypie - Personal pictureLilypie Second Birthday tickers

  © Free Blogger Templates Spain by Ourblogtemplates.com 2008

Back to TOP