30 August 2010

मम्‍मा गईं स्‍टूडियो, जादू रहा घर पर

शुक्रवार को मम्‍मा मुझे घर छोड़कर पहली बार ऑफिस गईं। मम्‍मा-पापा को पता था कि ये मौक़ा बड़ा नाजुक है। इसलिए पापा ने छुट्टी ली थी। वैसे आजकल मैं थोड़ी-थोड़ी देर के लिए 'बेबी-सिटिंग' भी जाता हूं--सामने वाली बिल्डिंग में। मेरी एक फ्रैन्‍ड है वहां--वल्‍लरी। वो मुझसे कुछ साल बड़ी है। जब तक वो वहां रहती है तब तक तो मुझे अच्‍छा लगता है। वो जैसे ही स्‍कूल चली जाती है तो मैं रोना शुरू कर देता हूं। फिर मम्‍मा को मुझे लेने आना पड़ता है। मम्‍मा ने सोचा, कि जब जादू इतनी-सी देर बेबी-सिटिंग में नहीं रह सकता तो फिर सात घंटे मेरे बग़ैर कैसे रहेगा। इसलिए पापा ने छुट्टी ली। पापा और जादू घर पे। और मम्‍मा ऑफिस में।

पापा के साथ मैंने दिन भर ख़ूब मौज-मस्‍ती की। उन्‍हें तंग भी नहीं किया। लेकिन मम्‍मा की बात तो अलग ही है ना। वो मेरी हर बात समझ जाती हैं। किस वक्‍त मुझे भूख लगी है, प्‍यास लगी है, नींद आ रही है, खेलना है, 'शू' आई है, कब मुझे गाना सुनना है--ये सब मम्‍मा फ़ौरन समझ जाती हैं। पर पापा इस मामले में थोड़े-से कच्‍चे हैं। थोड़ा-बहुत वो भी समझ जाते हैं। IMG_7473बहरहाल...जब मम्‍मा ऑफिस जा रही थीं, तो काफ़ी उदास थीं। शायद उन्‍हें मुझे छोड़कर ऑफिस जाना अच्‍छा नहीं लग रहा होगा। वैसे भी क़रीब दो साल बाद वो ऑफिस जा रही थीं। अजीब-सा लग रहा होगा उन्‍हें। मम्‍मा जब निकलने वाली थीं, तो मैंने देखा कि उनकी आंखों में ऑंसू थे। मुझे प्‍यार करने के लिए जब उन्‍होंने गोदी में उठाया--तो मैंने उन्‍हें समझाया---'रो मत मम्‍मा। मैं पापा के साथ रह लूंगा। उन्‍हें तंग भी नहीं करूंगा'। मम्‍मा ने पापा को नसीहतों की लंबी फे़हरिस्‍त दी और फिर निकल पड़ीं।
IMG_7497मम्‍मा ऑफिस चली गयीं। और मैं सो गया। लेकिन जब उठा तो मुझे बिल्‍कुल अच्‍छा नहीं लगा। इसलिए मैं लंच-टाइम में उन्‍हें लेने ऑफिस चला गया। सोचा कि चलो खाना साथ खाया जाए। लंच में मैं मम्‍मा की गोद से नहीं उतर रहा था। लग रहा था कि अभी मम्‍मा मुझे छोड़कर ऑफिस चली जाएंगी। बहरहाल लंच के बाद भी मम्‍मा चली गयीं। मैं पापा के साथ खेलता रहा। फिर सो भी गया।
IMG_7461मम्‍मा के लौटने के बाद उठा। और झट से उनकी गोद में चला गया। हालांकि अभी मम्‍मा कुछ ही दिनों के लिए ऑफिस जाने वाली हैं। फिर थोड़े दिनों की छुट्टी। लेकिन अब इसकी आदत डालनी होगी। मम्‍मा ज्‍यादा दिन तो घर में नहीं रह सकतीं ना।


IMG_7504

हमारे शहर में दो-तीन दिनों से ज़ोरदार बारिश हो रही है। बारिश में मुझे बहुत मज़ा आता है। साइड-टेबल पर चढ़कर मैं हॉल की विन्‍डो से बारिश देखता हूं। शनिवार को जब हम 'हाइपरसिटी' से लौट रहे थे तो मैं गाड़ी की विन्‍डो और विन्‍ड-स्‍क्रीन पर पड़ती पानी की बूंदों को छूने की कोशिश कर रहा था। और उस पर पड़ती रोशनी देखकर मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था। पापा जब छाता लगाकर मुझे ले जाते हैं तो मैं ऊपर मुड़कर छाता ही  देखता रहता हूं। और उसे हटाने की कोशिश भी करता हूं। आपके शहर में बारिश हो रही है या नहीं।

मम्‍मा इस पूरे हफ्ते ऑफिस में होंगी और मैं पापा के साथ घर पर। चलता हूं। जितनी देर मम्‍मा के साथ मस्‍ती कर लूं, उतना अच्‍छा है।

13 comments:

रंजन said...

अंतिम फोटो बहुत मजेदार है जादू..

बहुत प्यारी.. बेटा आदत डाल लो.. पापा भी ज्यादा दिन छुट्टी नहीं लेने वाले...

आदि भी मम्मा से ऐसे ही मिलता था.. ये देखो..

http://aadityaranjan.blogspot.com/2009/01/blog-post_22.html


प्यार..

Udan Tashtari said...

जब तक वो वहां रहती है तब तक तो मुझे अच्‍छा लगता है। वो जैसे ही स्‍कूल चली जाती है तो मैं रोना शुरू कर देता हूं।

-प्यूर जबलपुरिया लक्षण हैं बाबू...संभलना जरा.

वैसे सही कहा...मम्मा की बात अलग है. :)

प्रवीण पाण्डेय said...

आपकी मुस्कान में तो जादू है। आप तो सबको प्रसन्न रखोगे।

Nishant Dixit said...

यूं तो बस एक दिन की बात है जो निकल गया ....लेकिन महसूस करें तो बड़ा ही खूबसूरत अहसास है |

Nishant Dixit said...
This comment has been removed by the author.
satish kundan said...

Bahut pyara hai jadu aapka...mera dular bol dijiyega jadu ko!!!!!!!!

माधव said...

nice

Akshita (Pakhi) said...

जितनी देर मम्‍मा के साथ मस्‍ती कर लूं, उतना अच्‍छा है...Sahi kaha jadu.

चित्र तो और भी खूबसूरत...!!
_______________________
'पाखी की दुनिया' में अब सी-प्लेन में घूमने की तैयारी...

samvetswar.blogspot.com said...

अले, अले बिलकुल सही कहा - मम्मा की बात ही अलग है। वो तो तस्वीर देख कर ही समझ आ रहा है।

पापा को अच्छे से नाच नचाओ, जादू। Keep it up.

रावेंद्रकुमार रवि said...

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जादू की बातों में तो है
सचमुच जादूगरी झलकती!

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विनीत कुमार said...

मुझे तो सकेन्ड लास्ट वाली अच्छी लगी।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (ਦਰ. ਰੂਪ ਚੰਦ੍ਰ ਸ਼ਾਸਤਰੀ “ਮਯੰਕ”) said...

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर बधाई और शुभकामनाएँ!
--
बाल चर्चा मंच पर भी आपकी चर्चा है!
--
http://mayankkhatima.blogspot.com/2010/09/14.html

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (ਦਰ. ਰੂਪ ਚੰਦ੍ਰ ਸ਼ਾਸਤਰੀ “ਮਯੰਕ”) said...

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर बधाई और शुभकामनाएँ!
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बाल चर्चा मंच पर भी आपकी चर्चा है!
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http://mayankkhatima.blogspot.com/2010/09/14.html

जादू क्‍यों

हम हैं जादू के मम्‍मी-पापा ।
'जादू' अपनी मुस्‍कानें लेकर आया है हमारी दुनिया में ।
हम चाहते हैं कि ये मुस्‍कानें हम दुनिया के साथ बांटें ।

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