26 August 2010

'जादू' की खोज-ख़बर।

तकरीबन एक महीने से मैंने अपनी कोई खोज-ख़बर नहीं दी।


इसकी बहुत सारी वजहें थीं। एक तो ये कि इस दौरान मैं बीच-बीच में बीमार रहा। मुंबई में इन दिनों बारिश बहुत हो रही है। और सर्दी-जुकाम, बुख़ार वग़ैरह फैले हैं। तो इस दौरान पहले मुझे ज़ुकाम हुआ, फिर जब तक वो ठीक होता, पेट का इनफेक्‍शन हो गया, और इसके बाद ज़ुकाम फिर से लौटा, फिर तीसरी बार भी लौटा। यानी इस बीच मैं लगातार बिज़ी रहा। डॉक्‍टर अंकल से कई बार मुलाक़ात करनी पड़ी।

लेकिन मेरी मौज-मस्ती में कोई कमी नहीं आई है। बल्कि मेरी शरारतें तो अब रोज़ाना बढ़ती चली जा रही हैं। आज मैं साइड-टेबल पर चढ़कर सीधे हॉल की विन्‍डो तक पहुंच गया। और वहां से बाहर का नज़ारा देखने लगा। पापा-मम्‍मा एकदम डर गए। हॉल की खिड़की पर ग्रिल है। पर बिना बेस वाला। पापा कह रहे थे कि अब फ़ौरन इस ग्रिल का बेस लगावाना होगा। जादू यहां तक भी पहुंचने लगा है। 

 


मैं इस वक्‍त जब ये ब्‍लॉग लिख रहा हूं, मम्‍मा संगीत का रियाज़ कर रही हैं। मैं बीच-बीच में जाकर उन्‍हें तंग कर आता हूं। मम्‍मा का 'की-‍बोर्ड' मुझे भी बजाना होता है। जबकि मेरे पास अपना एक की-बोर्ड है। इस बारे में फिर कभी बातें की जायेंगी। इस बीच पंद्रह अगस्‍त भी आई और रक्षाबंधन भी। मैंने दोनों त्‍यौहार मनाए। पर आपको ख़बर नहीं कर सका। चलिए अब लौट आया हूं तो अपनी ख़बर देता रहूंगा।



पता है जबलपुर से शेबी दीदी ने मेरी राखी भेजी है। शबाना बुआ की बेटी हैं शेबी दीदी। यानी मेरी बहन। उस दिन जब राखी का कुरियर मिला तो सबसे पहले दरवाज़े पर मैं लपका। मम्‍मा से लिफाफा छीन लिया और उसे फाड़ने की कोशिश भी की। फिर मम्‍मा ने समझाया कि इसमें राखी है। इसे फाड़ते नहीं हैं। मैं समझ गया और पहले ध्‍यान से पूरी चिट्ठी पढ़ी। दीदी ने लिखा है---'हमें नहीं लगता कि तुम बहुत शरारत करते होगे'
मैंने सोचा--वो तो आपको तब पता चलेगा जब मैं जबलपुर आऊंगा अगले महीने।
आगे उन्‍होंने लिखा है--''इसे अकेले मत पढ़ना। सबको पढ़ाना।'' लीजिए सबको पढ़ा दिया ना।  b

देखिए राखी बांधने से पहले मैंने शेबी दीदी के भेजे ख़त से कैसे 'छिप्‍पी' खेली।  
c

dबताईये मेरी कलाई पर ये राखी कैसी लग रही है।
aलेकिन बांधने के फौरन बाद ही मैंने डोरी खींच ली और उसे चखने लगा।
z आपने एक बात ग़ौर की। आजकल मेरे बाल इतने बड़े हो गए हैं कि मम्‍मा को चोटी करनी पड़ती है। क्‍या आपके बाल भी इत्‍ते बड़े हैं।


अच्‍छा अब मैं चलता हूं। कल फिर मिलेंगे।

8 comments:

आदित्य said...

मेरे बाल भी बड़े है.. बहुत बड़े..

Anonymous said...

मैं तो सोच रही थी कि जादू इत्ते दिन से झां खेल रहा हैं.
क्या कहा ? तुम्हे नही पता झां खेल क्या होता हैं, चलो हम बताते हैं - मम्मा के दुपट्टे या पापा के रूमाल से चेहरा ढक लो और बोलो - झां यानि जादू छिप गया.
जब मम्मा पापा तुम्हारे चेहरे से नकाब हटा ले तो ताली बजा कर हंस देना यानि जादू दिखने लगा.
जादू को माह-ऐ-रमजान की ढेर सारी शुभकामनाएं. मेरी तरफ से बहुत सारे छुहारे खा लेना.
अब तुम खेलो झां.. मैं चली.. टा टा

अन्नपूर्णा

माधव said...

good

baby kumari said...

tumhe dekh ke bahut achha lga betu ji. rakhi bahut sunder hai. soch rhi thi ki hmara pyara jadoo khan hai ajkl? dher sara pyar aur shubhkamnayen!

sanjay patel said...

जादू भैया इन्दौर वाले संजय ताऊ की राम राम और दुआ सलाम. बहुत बड़े हो गए हो भाई. मम्मी और पापा से कहना अब तुम्हारे लिये बायोकेमिक या होम्योपैथी दवाइयाँ बहुत मुफ़ीद होंगी. तुम्हारे पार्थ भैया को भी हमने बचपन में ये गोलियाँ खिलाईं थीं और अब मुश्किल ये है कि उन्हें अपना वज़न कम करने जिम जाना पड़ता है. पापा को बताना कि शायद २६ या २८ नम्बर की होतीं हैं ये गोलियाँ ..अब देखो तुम भी सोचोगे कि ताऊ ने गोलियाँ भी बताई और ठीक से नाम भी न बताया..क्या करूं बेटे ! अब मेरी मेमोरी भी धीरे धीरे धीमी होती जा रही है..पचास का जो हो चला हूँ..पर चूँकि पापा-म्म्मी तुम्हें बहुत प्यार करते हैं तो मुम्बई जैसे बड़े शहर में किसी होम्योपैथिस्ट को खोज ही लेंगे.....इससे तुम्हारा रेज़िस्टेंस और हाज़मा दोनो शानदार हो जाएंगे..so take care...हम अब चलते हैं...तुम्हारी ताई आवाज़ लगा रही है...कह रहीं हैं...साढ़े आठ बज गए..अब खाना कब खाओगे....चलता हूँ....love you...

"डॉक्टर मामा" said...

इस तरह सरेआम अपनी बीमारियों का ढिंढोरा पीटकर कम से कम हमारी नाक तो न कटवाओ ।

लोग भला क्या सोचेंगे हमारे बारे में ?

रावेंद्रकुमार रवि said...

मनभावन होने के कारण इस पोस्ट को
"सरस चर्चा" में
शामिल किया गया है!

Chinmayee said...

बहुत मज़ा आया.... जादू

जादू क्‍यों

हम हैं जादू के मम्‍मी-पापा ।
'जादू' अपनी मुस्‍कानें लेकर आया है हमारी दुनिया में ।
हम चाहते हैं कि ये मुस्‍कानें हम दुनिया के साथ बांटें ।

जादुई दिन

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