25 May 2010

जादू पहुंचा 'विविध-भारती' के स्‍टूडियोज़ में

 

पता है जब भी हम घूमने जाते हैं, तो पापा-मम्‍मा के ऑफिस के सामने से निकलते हैं और मम्‍मा बताती हैं कि वो रहा हमारा ऑफिस यानी विविध-भारती। मैं जब बहुत-छोटा था तब एक बार मम्‍मा ऑफिस लेकर गईं थीं। जहां मैं कमल अंकल से मिला था। वो किस्‍सा मैं आपको फिर कभी सुनवाऊंगा। बहरहाल....शुक्रवार को पापा जब नाइट-ट्रांस्‍मीशन के लिए जा रहे थे, तो मैंने साफ़ तौर पर कह दिया कि मैं भी साथ चलूंगा।

अब मम्‍मा चक्‍कर में पड़ गयीं कि अब क्‍या होगा। आजकल वैसे भी जब पापा तैयार होकर घर से बाहर जाते हैं तो मैं अपने 'शूज़' लेकर दरवाज़े पर आ जाता हूं। इसका मतलब ये है कि मैं भी साथ चलूंगा। अगर मेरी बात मान ली गयी तो ठीक....पर अगर पापा मुझे छोड़कर अकेले चलें जाएं तो मैं आसमान सिर पर उठा लेता हूं। इसलिए अकसर पापा मुझे सुबह 'सैर' करवाने ले जाते हैं। ताकि मैं ऑफिस जाते वक्‍त उन्‍हें 'तंग' ना करूं। पर भला घूमने से 'जादू' का मन कभी भरता है। आप ही बताईये।

तो भई...मैंने तय कर लिया था कि पापा के साथ आज तो जाना ही है। पापा सोचने लगे कि अगर 'जादू' अकेला गया, तो फिर वो रेडियो पर अपने प्रोग्राम कैसे करेंगे। इसलिए तय किया गया कि मम्‍मा भी साथ जायेंगी। बस फिर क्‍या था....मैंने अपनी वॉटर-बॉटल और टिफिन पैक किया और शूज़ लेकर दरवाज़े के पास आ गया। 'शूज़' तो मम्‍मा-पापा ही पहनाते हैं ना। तो इस तरह मैं पहुंचा पापा के स्‍टूडियो। यानी विविध-भारती। जाते ही वहां मिल गये 'मंगेश-अंकल'। ( उनके बारे में मैंने पहले यहां और यहां बताया है, याद है ना) । मंगेश अंकल अपनी 'शिफ्ट' ख़त्‍म करके घर जा रहे थे। और चाहते थे कि मैं भी साथ चलूं। रास्‍ते में वो 'एलफान्‍सो मैंगो' भी लेने वाले थे, अपनी पसंदीदा 'शॉप' से। पर मैं तो विविध-भारती में ही रूकना चाहता था। इसलिए उनकी गाड़ी में बैठते ही मैंने 'हंगामा' कर दिया। आखिरकार मंगेश अंकल को अकेले ही जाना पड़ा। मैंने जाते-जाते उनसे कह दिया कि मैं 'फिर कभी' उनके घर ज़रूर आऊंगा। 

इसके बाद मुझे मिले अशोक सोनावणे अंकल। जिन्‍होंने अपना 'गॉगल' लगाया तो मैं उनके पास गया ही नहीं। मुझे 'गॉगल' तो बस आदि भैया, समीर अंकल के और अपने ऊपर ही अच्‍छा लगता है। सही है ना। 
Pविविध-भारती में इतनी सारी खुली जगह दिखी कि मैं फौरन वहां भाग-दौड़ करने लगा। इसके बाद मम्‍मा मुझे 'ड्यूटी-रूम' लेकर गयीं और बताया कि वहां क्‍या होता है। मैंने कैन्‍टीन भी देखा। धमाचौकड़ी भी की। इस दौरान पापा ट्रांसमीशन संभाल चुके थे। उनकी आवाज़ सुनकर मैं चौंक गया। मुझे लगा कि मेरे पापा की आवाज़ चारों तरफ कैसे सुनाई दे रही है, जबकि वो दिख तो रहे नहीं हैं। ये देखकर मम्‍मा बहुत हंसीं। और मुझे ले गयीं 'कन्‍ट्रोल-रूम'।

 



वहां 'कांच' के उस पार पापा ट्रांसमीशन करते दिख रहे थे। पहले तो मैं थोड़ी देर तक अपनी हॉकी से खेलता रहा वहां पर। उसके बाद मेरा मन किया कि मैं पापा के साथ खेलूं। अब भला पापा कहां खेल सकते थे। उन्‍हें तो रेडियो-प्रोग्राम करना था। मम्‍मा ने बड़ी मुश्किल से मुझे समझाया और 'स्टूडियो-कॉरीडोर' में ले गयीं। इत्‍ता लंबा, शानदार और ख़ाली गलियारा देखकर मुझे लगा कि यहां तो बहुत क्रिकेट और हॉकी खेली जा सकती है। मैं अपना बैट-बॉल और हॉकी लेकर गया ही था। बस मेरा खेल शुरू हो गया।

 

 



मौज-मस्‍ती काफी हो गयी थी। और फिर मुझे नींद भी आ रही थी, इसलिए मम्‍मा मुझे घर ले आईं।

लेकिन विविध-भारती के स्‍टूडियोज़ में जाकर बड़ा मज़ा आया। सच्‍ची।

8 comments:

Vivek Rastogi said...

वाह जादू जी, विविध-भारती में भी हॉकी और क्रिकेट खेल आये :)

बहुत बढ़िया !! :)

रंजन said...

हमने सूना था.. पापा प्रोग्राम करते करते कोमेंट्री करने लग गए थे.. अब समझ आया उस दिन जादू जी खेल रहे थे..

प्यार...

बी एस पाबला said...

विविध-भारती में भी हॉकी और क्रिकेट!!

गजब :-)

Udan Tashtari said...

समीर अंकल और आदि भईया से काम्पटिशन ...क्या बदमाशी है यार जादू...तुम तो वाकई कुछ भी कर सकते हो...

मत लौटाना अशोक अंकल के गोगल...भारी जम रहे हो इसमें. अब वो जाने अपने लिए नये गॉगल लें...ये तो हमारे जादू का हो गया...ऐसई थोडे जबलपुरिया हैं.


जौन चीज पर हाथ धर दें, बो हमाई!!!

दीपक 'मशाल' said...

जादू बेटा मेरा गोगल नहीं अच्छा लगता क्या??? :(
अच्छा लगा तुम्हारा पापा के ऑफिस घूमने का किस्सा.. खुश रहो..

PD said...

क्या बात है.. होकी-क्रिकेट दोनों साथ साथ खेलना तुमसे सीखे.. :)

माधव said...

mindblowing

Sanjeet Tripathi said...

badhiya dhamala machaya matlab jadoo sahab ne, gud hai machate rahne ka dhamal,
vaise jadoo bhaiya kuchh yad dila diya aapne,
pahli bar jab ham akashwani gaye the apni recording ke liye to class 3 me padhte the, ek bar hamse kaha gaya ki 2-3 aur friends ko le ke aana, recording me der thi, bas fir kya tha galiyare se lekar bahar sab jagah ham 4 friends ne jo dhamala machaya ki sab pareshan..

जादू क्‍यों

हम हैं जादू के मम्‍मी-पापा ।
'जादू' अपनी मुस्‍कानें लेकर आया है हमारी दुनिया में ।
हम चाहते हैं कि ये मुस्‍कानें हम दुनिया के साथ बांटें ।

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