20 May 2010

जादू ने मम्‍मा को दिलवाया हारमोनियम।।

बहुत दिनों से मम्‍मा को नया हारमोनियम चाहिए था। लेकिन पता नहीं क्‍यों हम शॉप पर जा ही नहीं पा रहे थे। जब बहुत ज़्यादा दिन हो गये और टलता चला जा रहा था तो मैंने कहा--बस बहुत हो गया, आज तो मम्‍मा को नया हारमोनियम दिलाना ही होगा। बस फिर क्‍या था। मैंने मम्‍मा से कह दिया कि आज हम भार्गवाज़ जायेंगे। मुंबई के बांद्रा में है भार्गवाज़ म्‍यूजिक। जहां बढिया साज़ मिलते हैं।

हम एक डेढ़ घंटे का सफ़र तय करके भार्गवाज़ पहुंचे। मैंने वहां ज़रा भी परेशान नहीं किया। ना ही रास्‍ते में परेशान किया। मम्‍मी को नया हारमोनियम जो दिला रहा था भई। जब हारमोनियम आ गया तो मम्‍मा ने सोचा कि इसका उद्घाटन भी कर दिया जाए। बस मम्‍मा ने बॉक्‍स खोला और रियाज़ शुरू किया।
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मैंने सोचा कि हारमोनियम तो मैंने दिलवाया और मम्‍मा अब अकेले रियाज़ करना चाहती हैं। ऐसा नहीं होगा। इसलिए मैंने फौरन मम्‍मा के पास अपनी जगह बना ली। पहले मम्‍मा के साथ ही हारमोनियम पर हाथ चलाए।
5उसके बाद मम्‍मा से कहा कि आप ज़रा बाज़ू हटिए। थोड़ा रियाज़ मैं अकेले करना चाहता हूं।
6मुझे पहली बार हारमोनियम मिला था। वैसे भी मेरी 'हाइट' अभी ज़रा कम ही है इसलिए मैं समझ नहीं पा रहा था कि बैठे बैठे बजाऊं या खड़े होकर बजाना ठीक रहेगा। 7ये देखिए अनूप जलोटा अंकल की तरह और गुलाम अली चाचा की तरह मैंने अपना हाथ कैसे हवा में लहराया है। आप पूछेंगे कि ये अदा मैंने किससे सीखी। तो जवाब होगा, किसी से नहीं। ये मेरा ओरीजनल स्‍टाइल है। 8फिर लगा कि मैं हारमोनियम बजाने में ज़रा कच्‍चा हूं। इसलिए मम्‍मा से थोड़ा सीखना चाहिए। तो मम्‍मा की गोदी में जा बैठा। और ध्‍यान से 'सरगम' सीखने लगा।
9अब तक मम्‍मा समझ गयीं थीं कि उनका रियाज़ हो नहीं रहा है। बल्कि सारी मस्‍ती मेरी हो रही है। इसलिए उन्‍होंने मुझे वॉकर पर बैठा दिया। उन्‍हें लगा होगा कि उनकी ये 'तरकीब' कारगर रहेगी। पर मैं तो जादू हूं ना, मैं कुछ भी कर सकता हूं।  10

ये देखिए। मैंने लगातार यही किया। वॉकर पर से भी हारमोनियम की कुंजियों पर हाथ चलाना जारी रखा। आजकल अकसर ही हो रहा है। मैं मम्‍मा को रेगुलर रियाज़ करवाता हूं। मैं ना करवाऊं, तो मम्‍मा रियाज़ करेंगी ही नहीं। कितना काम करना पड़ता है मुझे। कभी मम्‍मा के रियाज़ का ख़्याल तो कभी पापा के कंप्‍यूटर का। इस‍ीलिए तो मैं दिन भर बड़ा 'बिज़ी' रहता हूं।  11अच्‍छा अब अगर आपके पास हारमोनियम या कोई और साज़ है तो आप दस बार सरगम बजाईये। तब तक मैं ज़रा फुटबॉल खेलकर आता हूं। मैं जादू हूं ना, मैं कुछ भी कर सकता हूं।

5 comments:

Udan Tashtari said...

मेरे पास तबला है..सरगम बज ही नहीं रही..:)


अपनी मम्मी से कहो कि पॉडकास्ट करें गा कर.

रंजन said...

भाई आप इसपर मेहबानी रखना..

प्यार...

PD said...

गजब ढा रहे हो जादू..

मेरा एक मित्र है, उसकी माँ प्रोफ़ेसर है और पिता वकील.. कुल मिलकर उसके घर में सभी खूब बकबकिया हैं.. उसी तर्ज पे सोचता हूँ कि जादू का क्या होगा? सखी-सहेली और यादें उनकी उजालों के बीच में.. :P (just kidding :D)

माधव said...

वाह जादू , क्या बात है , मजा आ गया देख कर

PIYUSH MEHTA-SURAT said...

जादूजी,
क्या आप अकेले ही अपने मम्माजी का हार्मोनियम वादन और गायन सुनते रहेंगे । उनको बोलिये जरूर की आप के इस ब्लोग के पाठक भी सुनना और देख़ना चाहते है । इसके बदलेमें मैं आपको मेरा बजाया हुआ माऊथ ओरगन यहीं सुना और दिख़ा देता हूँ । जो आपके मम्मा और पापा विविध भारती के फोन इन कार्यक्रममें कई बार बजवा चूके है । पर आप को पूरी धून दिख़ाता हूँ । पर मेरी बात याद रख़के मम्मा के पिछे ही पड़ जाना ।

http://radionamaa.blogspot.com/2010/01/blog-post_05.html

पियुष महेता ।
सुरत-395001.

जादू क्‍यों

हम हैं जादू के मम्‍मी-पापा ।
'जादू' अपनी मुस्‍कानें लेकर आया है हमारी दुनिया में ।
हम चाहते हैं कि ये मुस्‍कानें हम दुनिया के साथ बांटें ।

जादुई दिन

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