19 May 2010

जादू के स्‍टंट: कंप्‍यूटर-ट्रॉली पर

थोड़े दिन पहले मैंने आपको बताया था कि कैसे मैं रसोई में ट्रॉलियों को

उलट-पुलट करता हूं। दरअसल जब से मैंने चलना शुरू किया है, तब से घर का कोई कोना मुझसे अछूता नहीं है। मैं सोफे पर चढ़ जाता हूं। और उसके टिकने वाले हिस्‍से पर भी चढ़ना चाहता हूं। मैं बेडरूम में खिड़की पर चढ़ जाता हूं। और चलते-फिरते मैं हर जगह खींचतान करता रहता हूं। कभी टेलीफोन का तार खींच देता हूं। तो कभी बेडरूम में जाकर पापा के कपड़ों की आलमारी खोलकर सारे कपड़े बिखेर-कर उनके ऊपर बैठ जाता हूं। ये सब मेरे पसंदीदा काम हैं।

एक दिन मैं मौका पाकर पापा के डेस्‍क-टॉप को explore करने लगा। आप सोच रहे होंगे कि मैं कंप्‍यूटर पर कुछ कर रहा था। जी नहीं....मैं तो बस ट्रॉली पर चढ़ गया और मैंने यहां-वहां हाथ मारना शुरू किया। सबसे पहले फाइल-रैक का दरवाज़ा खोला।
1उसके बाद लगा कि यहां तो काम की कोई चीज़ दिख नहीं रही है। 2फिर एक बात मन में आई। लगा कि पापा की गोद में बैठकर जैसे की-बोर्ड की पिटाई की जाती है, वैसे ही अकेले-अकेले की जाए।
3मैं की-बोर्ड की तरफ बढ़ा ही था कि तभी मेरा ध्‍यान पापा के पेन-स्‍टैन्‍ड तरफ चला गया। बस शामत आ गयी सब चीज़ों की। मैंने जैसे ही क़ैंची उठाई, मम्‍मा ने फ़ौरन मुझे ट्रॉली से नीचे उतार दिया। 4देखिए कितनी ऊंचाई पर चढ़ा था मैं। 5 मैं जादू हूं ना--मैं कुछ भी कर सकता हूं।

8 comments:

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

जादू के जादू का जवाब नहीं!

Udan Tashtari said...

अरे, अभी गिर पड़ोगे तो सब जादू धरा रह जयेगा..जादू दिखाओ मगर जरा हाथ की सफई से. कहीं बच्चे चोट न खा जाना.
जबलपुरिया ज्यादा होशियारी में चोट खाने के आदि होते हैं..पापा से पूछ लेना. :)

राम त्यागी said...

Careful ...aur papa ki cheejon ko haath nahi lagaane ka :)

देवेश प्रताप said...

ओहो ......जादू भाई आप तो कमाल के स्टंट अभी से कर रहे हो .....

माधव said...

कमाल का स्टंट है, अक्षय कुमार भी फेल है

http://madhavrai.blogspot.com/

Sanjeet Tripathi said...

aie jadoo bhaiya, takin stunt karne se pahle dekh bhi to liya karo ki kahan chadh rahe ho, dekh ke chadha karo bhai nai to fisal jaoge to gadbad ho jayegi na, vaise stunt karte to badhiya ho

डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर said...

अभी संभल कर जादू दिखाओ जी....
जय हिन्द, जय बुन्देलखण्ड

अक्षयांशी सिंह सेंगर-Akshayanshi said...

जादू जी कम्र्यूटर न गिरा लेना...

जादू क्‍यों

हम हैं जादू के मम्‍मी-पापा ।
'जादू' अपनी मुस्‍कानें लेकर आया है हमारी दुनिया में ।
हम चाहते हैं कि ये मुस्‍कानें हम दुनिया के साथ बांटें ।

जादुई दिन

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