06 April 2010

समोसे और बॉल के बीच आप क्‍या चुनेंगे

मंगेश अंकल के घर गणेशोत्‍सव के बाद भी गया था पर उस वक्‍त की तस्‍वीरें मैंने आपको नहीं दिखाईं । इस संडे की शाम मैं मंगेश अंकल के घर गया मौज-मस्‍ती करने के लिए । सामवेद भैया ने पहुंचते ही मुझे इत्ती बड़ी-सी बॉल दे दी खेलने के लिए ।
बॉल से खेलना अपनी जगह है । पर जब बॉल और समोसे के बीच किसी एक को चुनना हो तो फ़ैसला ज्‍यादा मुश्किल नहीं होता । 

समोसा सफाचट अब फिर से बॉल की बारी । बॉल है या पहाड़ । बाप रे ।  सब बातचीत में लगे हैं । पापा और अंकल IPL का मैच भी देख रहे हैं । उस पर चर्चा भी हो रही है । और मुझे मिल गया है बदमाशी करने का वक्‍त । 
अरे वाह क्‍या 'सिक्‍स' मारा है । चलो इसी बात पर डान्‍स करें । बल्‍ले-बल्‍ले ।  
टी.वी. पर मैच में बॉल बहुत छोटी दिख रही है । चलो इस बॉल को टी.वी. में घुसा देते हैं ।
सामवेद भैया का अगले दिन इंग्लिश का एक्‍ज़ाम था । पर जब 'जादू' सामने हो तो पढ़ाई और रिवीजन की चिंता करने की क्‍या ज़रूरत है । वैसे सामवेद भैया ने अपनी पढ़ाई दिन में ही कर ली थी ।
मंगेश अंकल और मैं । हम लोग IPL में अलग अलग टीमों का सपोर्ट करते हैं ।
शिल्‍पा आन्‍टी तो 'डायटीशियन' भी हैं । उनसे मैंने अपनी 'डाइट' डिस्‍कस की ।  वो क्‍या है ना कि मैं खाने के मामले में बड़ा 'चूज़ी' हूं ।
अगली बार मैं दिन की रोशनी में जाऊंगा । ताकि वहां से आपको मुंबई और संजय गांधी नेशनल पार्क का शानदार नज़ारा भी दिखाऊं । मैं जादू हूं ना, मैं कुछ भी कर सकता हूं ।

4 comments:

कुश said...

समोसे याद दिला दिए.. सुबह सुबह भूख लग गयी..
अभी से ही दईत डिस्कस कर रहे हो.. अच्छा है..

baby kumari said...

wah jadoo. khoob msti kro.

सुशील कुमार छौक्कर said...

जादू की मस्तीयाँ वाह भई वाह।

Udan Tashtari said...

न समोसा..न बॉल..हम तो जादू को चुन लेंगे तो दोनों साथ में मिल जायेगा!! :)

जादू क्‍यों

हम हैं जादू के मम्‍मी-पापा ।
'जादू' अपनी मुस्‍कानें लेकर आया है हमारी दुनिया में ।
हम चाहते हैं कि ये मुस्‍कानें हम दुनिया के साथ बांटें ।

जादुई दिन

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