04 April 2010

निन्‍निन, इंड्रा, ब्रूर्रर्रर्रर्रर, भू-भू और डे..डा

पता है कल डॉक्‍टर मामा का sms आया मम्‍मा-पापा के पास।
हमेशा की तरह उन्‍होंने पहेली बुझाई।

Quiz-what is soooooo special today. 
मम्‍मा-पापा सोचते रहे कि क्‍या ख़ास है।

याद ही नहीं आया।
फिर डॉक्‍टर मामा ने मेरी पिछली पोस्‍ट पर टिप्‍पणी की । 

आज 03 अप्रैल 2010 का दिन तो बहुत ही ख़ास है,जादू !
आज तुम ठीक एक साल, एक महीने, एक हफ़्ते और एक दिन के हो गये !
तुम्हीं बताओ, अब भला फिर कब आयेगा ऐसा दिन ?


  यानी चार बार एक ही एक। है ना मज़ेदार आंकड़ा । देखिए कल का screen shot.
one one one one
और हां....मेरी पिछली पोस्‍ट पर 'उड़नतश्‍तरी' और 'ज्ञानदत्‍त' अंकल की टिप्‍पणियां बड़ी मज़ेदार रहीं ।

उड़नतश्‍तरी अंकल- ऐसा जादू..गजब कर रहे हो भाई..सही जबलपुरिया बन रहे हो!!


ज्ञानदत्‍त अंकल- ऐसा जादू..गजब कर रहे हो भाई..सही इलाहाबादी बन रहे हो!!

आईये अब मैं अपनी इस रविवारीय पोस्‍ट में आपको कुछ मज़ेदार बातें बताऊं ।
पता है..आजकल मैं बहुत बोलता हूं । वैसे तो मैंने तीसरे महीने के आखिर से 'ऊ ऊ' बोलना शुरू कर दिया था । डॉक्‍टर की फाइल के गुलाबी रंग को देखकर मैं बोलता था--'ऊ ऊ' ।

चौथे-पांचवे महीने से मैंने बोलना शुरू किया 'अग्‍गा'।
उन्‍हीं दिनों मैंने बोला—अंगा ।
छठे महीने के आसपास मैं बोला—'बूउउउउउउउउआ'
बीच में कुछ दिनों तक मेरा मूड नहीं हुआ इसलिए मैंने बोलना कम कर दिया।
आठवें महीने में मैंने बोला--दा......दा। चा........चा।
इसी दौरान जब मैं रोता था तो बोलता था--'मई' 'बई' 'बई' । म्‍म्‍म्‍मा । लेकिन अब ये शब्‍द मैं नहीं बोलता ।

दसवें महीने से मैं बोला--का........का।


और 'ना.....न्‍ना.


उन्‍हीं दिनों हाथ हिलाकर टा-टा करने लगा। और बोलने लगा--'ताताताताताता'
चूं‍कि मैं 'अंगा' बोलता था इसलिए मम्‍मा मुझे 'गंगा' बोलना सिखा रही थीं तो मैंने बोला--'गग्‍गा' ।


इन्हीं दिनों मैंने 'दे दे' बोलना शुरू किया । चाहे दूध चाहिए हो, खाना या पानी मैं बोलता----'दे दे दे दे दे द दे' ।

ग्‍यारहवें महीने में मैंने एक नया शब्‍द गढ़ा—इंडा (indaaa)
मम्‍मी ने मौसी को बताया तो उन्‍होंने अंदाज़ा लगाया कि इंडिया से इंडा बोल रहा होगा। कहीं सुना होगा इंडिया। बच्‍चे बड़े ध्‍यान से सुनकर शब्‍दों को याद कर लेते हैं फिर बोलने की कोशिश करते हैं।
 


फिर एक साल का होने से कुछ दिन पहले मैंने दिन भर 'पा....पा', 'पापापापा' की रट लगानी शुरू कर दी । हां 'मम्‍मा' मैं तभी बोलता हूं जब रोता हूं । कई बार तो मैं 'मम्‍मी' भी बोलता हूं रोते समय । लेकिन ऐसे मैं मम्‍मी को 'अत्‍ता' बुलाता हूं । पता है क्यों । क्योंकि सब उन्‍हें ममता बुलाते हैं ।

अपने पहले जन्‍मदिन के बाद से मैंने अपने शब्‍द खुद गढ़ने शुरू कर दिए ।
जैसे---'द...ह्हा' ( Dah……..haaaa!

)
अंड्रा (undraaaa)
आजकल मैं बोलता हूं  'डे---डा' ।
और मम्‍मा पापा का ध्‍यान आकर्षित करना हो तो मैं अजीब-सा मुंह बनाता हूं । मौसी को मेरा ऐसा मुंह बनाना बड़ा पसंद है । जब वो बोलती हैं--'जादू मुंह बनाओ' तो मैं नाक सिकोड़कर और होंठ गोल करके मुंह बनाता हूं । जिससे मौसी बहुत हंसती हैं । ये सिलसिला काफी देर तक चलता रहता है ।

आजकल जब पापा ऑफिस जाने लगते हैं तो कभी मैं टाटा करता हूं । कभी 'नान्‍ना नान्‍ना' करता हूं । और कभी रोता भी हूं । मम्मा जाने लगें तो मैं गला फाड़कर रोता-चिल्‍लाता हूं । और मम्‍मा को वापस आना पड़ता है । 

आजकल मम्‍मा मा मोबाइल उठाकर मैं कोई भी नंबर डायल कर देता हूं । अमूमन ये लास्‍ट डायल नंबर होता है । चूंकि टच-स्‍क्रीन मोबाइल है इसलिए हाथ में लेते ही जाने कैसे-कैसे क्‍या-क्‍या हो जाता है । फिर जब सामने वाली की आवाज़ आती है तो मैं -'हा हा हा' करके हंसता हूं । कई बार सिर्फ मुस्‍कुराता हूं । सामने वाला हैलो हैलो करता रहता है । उसकी आवाज़ ध्‍यान से सुनता रहता हूं । एक बार सविता मौसी से पांच-सात मिनिट तक बात कर चुका हूं ।

आजकल मैं 'डै डा' 'डै डा' बोल रहा हूं । लोग ये अंदाज़ा लगा रहे हैं कि मैं 'डै डा' बोलकर पापा को बुला रहा हूं ।

मम्‍मा मुझे सिखाती हैं---'बोलो बेटा---'जा.........दू'
तो मैं बोलत हूं---'दा.............................................डॉ' ।
कोई भी गाना बजता है तो मैं 'आ आ' करके उसकी कॉपी करता हूं । मैं भी सुर में 'आ--'आ करता हूं ।

कई बार तो आवाज़ को एकदम 'पतली' करके खूब चिल्‍लाता हूं ।
आजकल मैं गाड़ी खूब चलाता हूं 'डर्र.........' 'ब्रूम्‍म्‍म्‍म्‍म्‍म्‍म्‍म्‍म्‍म्‍म्‍म्‍म. 'डिर्रर्रर्रर्रर्रर' और 'अर्रार्रार्रारा' करता रहता हूं ।
गुस्‍सा होने पर या चिढ़ने पर 'निन्‍निन' करता हूं ।


मज़ा आने पर ताली बजाता हूं ।


मम्‍मा ने मुझे डॉगी दिखलाकर सिखलाया 'भौं भौं'। पूसी कैट के लिए 'म्‍याऊं' और चिडिया के लिए 'चूं चूं'। पर मैं डॉगी, कबूतर, पूसी-कैट, चिडिया, गाय....इनमें से कोई भी रास्‍ते चलते दिख जाए तो सबके लिए 'भू-भू' करता हूं। और डॉगी के दिख जाए तो जरूर 'भू-भू' करता हूं । फिर मम्‍मा ढूंढती हैं कि डॉगी कहां दिखा ।

अरे हां। आज संडे के ब्रेकफास्‍ट में मैंने 'टोमटो-एग-ऑमलेट' और जलेबी खाई। कितना खाया कितना गिराया ये आप समझ सकते हैं। बताईये आपने क्‍या खाया । 
IMG_6296 IMG_6295  
अब चलता हूं । आज मुझे संडे वाली नींद लेनी है ।
मैं जादू हूं ना मैं कुछ भी कर सकता हूं ।

7 comments:

mukti said...

हा हा हा हा ! पता है जादू, मेरी दीदी की बिटिया शीतल भी तुम्हारी जितनी बड़ी थी तो "दे दे दे दे" सीख गई थी. किसी को भी कोई चीज़ खाते देखती थी तो हाथ फैलाकर चालू हो जाती थी. और वो भी अपनी मम्मी को "ताता" कहती थी, मतलब नाम लेकर बुलाती थी. थोड़ी बड़ी होने पर दादा-दादी, नाना, मामा, मम्मा पापा सब कहती थी, पर मेरे लाख सिखाने के बाद भी मौसी की जगह "मानू" कहती थी.

सैयद | Syed said...

तत्तत हरर्र बड बद त्र्र्रर कट ...कर्र्र ... दे दे..... ब्रुम्म्म्म .... ताताता....

जादू जी कुछ समझ में आया मैंने आपकी भाषा में क्या कहा ?

Raviratlami said...

आपने हमारे पैरेंटिंग के बीते दिनों की याद दिला दी. शुक्रिया. कभी कभी सोचता हूँ, जब जादू पच्चीस तीस साल (अपने बच्चे को गोद में लेकर) का या पचास साठ साल (अपने पोते को गोद में लेकर) का हो जाएगा, तब वो इसे पढ़ेगा तो क्या जादुई बातें सोचेगा!

बी एस पाबला said...

बढ़िया है जादू है
कोई अंकल जबलपुरिया बनवा रहे तो दुसरे इलाहाबादिया बनवा रहे
जहाँ तक मुझे याद आ रहा कभी गलबहियां थी :-)

बी एस पाबला

PD said...

जादू बेटा, तुम तो पटनिया बन जाओ.. :)

और तुम जलेबी खा रहे हो, एक मुझे भी दो ना.. यहाँ अच्छा जलेबी नहीं मिलता है.. :(

yunus said...

Testing testing

जादू.... jaadoo said...

testing testing. kya kisi ko comment karne me dikkat aa rahi hai ??

जादू क्‍यों

हम हैं जादू के मम्‍मी-पापा ।
'जादू' अपनी मुस्‍कानें लेकर आया है हमारी दुनिया में ।
हम चाहते हैं कि ये मुस्‍कानें हम दुनिया के साथ बांटें ।

जादुई दिन

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