01 April 2010

चलिए जादू के साथ गाना सुनें ।

आपको पता ही होगा कि मेरे मम्‍मी-पापा का ताल्‍लुक रेडियो से है । पापा  संगीत का एक ब्‍लॉग भी लिखते हैं और फिर मम्‍मा ने तो शास्‍त्रीय-संगीत भी सीखा है । यानी मेरे घर में संगीत का माहौल है । अकसर गाने गूंजते रहते हैं । गुनगुनाने की आवाज़ आती रहती है । मैं जब अपनी मम्‍मा के पेट में था तब कुछ ख़ास गाने सुनकर 'किक' मारता था । संगीत का मेरा शौक़ इतना पुराना है । आज सबेरे मैं अपनी 'रेगुलर स्‍टडी' कर रहा था अपने वॉकर पर बैठकर । रीडिंग करने से पहले मैंने पापा की कंप्‍यूटर-टेबल से हेडफोन अपनी टेबल पर खींच लिया था ।
1अचानक मुझे लगा कि हेड-फोन पर 'म्‍यूजिक' बज रहा है । और मेरा ध्‍यान तक नहीं
है । मैंने सोचा कि आज की 'स्‍टडी' दोपहर को की जाएगी । अभी तो म्‍यूजिक ही सुन लिया जाए । पहले मैंने सोचा कि ईयर-पीस पर मुंह लगाकर बोला जाता है । और वहीं से सुना जाता है इसलिए हैलो हैलो किया । हैलो हैलो माइक टेस्टिंग वन टू थ्री ।  2 फिर समझ में आ गया कि 'माइक' नहीं है ये । ये तो हेडफोन है । माइक तो मेरे 'गिटार' के साथ आया है । जी हां आजकल मैं गिटार भी बजाता हूं और उसके साथ माइक से गाने और खाने का काम करता हूं । फिर कभी बताऊंगा इस बारे में । हां तो हेडफोन से मैंने गाना सुनना शुरू कर दिया । अहा कित्‍ता मज़ा आ रहा है ।  
3 ये गाना मुझे बड़ा पसंद आया । इतना कि मैं मुस्‍कुरा पड़ा ।
4
मैं इस सोच में पड़ गया कि गाना आखिर कहां से बज रहा है और क्‍या इसी धुन पर मैंने पहले भी कुछ सुना है ।
5 wow एक कान से भी सुनाई देता है । फिर तो किताब भी पढ़ो और गाना भी सुनो । दो काम एक साथ । पापा की तरह मल्‍टी-टास्किंग ।
6सचमुच संगीत में 'जादू' होता है । और जादू में 'संगीत' । डान्‍स करने का मन कर रहा है । 7अरे वाह ऐसे तो मैं गा सकता हूं । ये लो ।
8बस बहुत हो गया गाना । अब मुझे है हेडफोन खाना ।  
9 अरे कित्‍ती देर हो गयी । आज की 'स्टडी' कौन करेगा । चलिए पढिए । A B C D । आप भी बोलिए a for apple… b for ??????

10अब बताईये कि मैं कौन-सा गाना सुन रहा था । बताईये बताईये ।
और चलते चलते आपको ये बता दूं कि आजकल मैं अपने पैरों पर खड़े होकर थोड़ा थोड़ा चलने भी लगा हूं । और कुछ नए शब्‍द भी गढ़ने लगा हूं । इसके बारे में फिर कभी । मैं जादू हूं ना कुछ भी कर सकता हूं ।

9 comments:

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

एक्टिंग बढ़िया कर लेते हो। वैसे तुम्हें कैमरा मैन अच्छा मिला है।

सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi said...

जादू जी वॉल्‍यूम को बहुत कम रखिएगा... आपके कान बहुत सेंसेटिव होते हैं... जरा सी आवाज तेज हुई नहीं कि कान में खराबी आ सकती है....

और हां हैडफोन को साफ करके लगाना...

और जमकर शास्‍त्रीय संगीत सुनना...

सैयद | Syed said...

अच्छा अब जल्दी से एक शास्त्रीय संगीत सुना दो अपनी आवाज में.... क्यूंकि जादू तो कुछ भी कर सकता है.... :

Mired Mirage said...

वाह! एक कान से सुन सकते हो तो दूसरे कान से पढ़ सकते हो? आप तो कुछ भी कर सकते हो।
घुघूती बासूती

डॉक्टर मामा said...

"अब बताईये कि मैं कौन-सा गाना सुन रहा था । बताईये बताईये ।" -जादू
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कोई भी नही। बस यूं ही झूठ-मूठ हेडफ़ोन लगाकर हम सबको बेवकूफ़ बना रहे थे ।

आज पहली अप्रैल जो है !

mukti said...

हाँ, जादू जी पक्का हमलोगों को बेवकूफ़ बना रहे हैं...बना लें. हमलोग जादू जी के लिये कुछ भी बन सकते हैं. गाड़ी, घोड़ा, कुर्सी, बेवकूफ़ कुछ भी...है ना जादू जी.

Udan Tashtari said...

ऐसा जादू..गजब कर रहे हो भाई..सही जबलपुरिया बन रहे हो!!

डॉक्टर मामा said...

आज 03 अप्रैल 2010 का दिन तो बघुत ही ख़ास है,जादू !

आज तुम ठीक एक साल,एक महीने,एक हफ़्ते और एक दिन के हो गये !
तुम्हीं बताओ,अब भला फिर कब आयेगा ऐसा दिन ?

ज्ञानदत्त पाण्डेय Gyandutt Pandey said...

ऐसा जादू..गजब कर रहे हो भाई..सही इलाहाबादी बन रहे हो!!

जादू क्‍यों

हम हैं जादू के मम्‍मी-पापा ।
'जादू' अपनी मुस्‍कानें लेकर आया है हमारी दुनिया में ।
हम चाहते हैं कि ये मुस्‍कानें हम दुनिया के साथ बांटें ।

जादुई दिन

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