28 March 2010

जादू लेकर आया है ताज़ा शरारतों का बुलेटिन

आज मैं कुछ बातें तय करके आया हूं । आज मैंने ये तय कर रखा है कि अपनी ताज़ा शरारतें आपको बताऊंगा ।

तो चलिए शुरू करते हैं मेरी ताज़ा शरारतों का बुलेटिन ।

 


 

 


1. हमारे शहर में पानी की किल्‍लत होने लगी है । इसलिए मम्‍मा ने एक बाल्‍टी भर रखी थी रसोई के कामों के लिए । पास ही स्‍टील की टंकी पर चावल का एक पैकेट रखा था । जो सामने वाली शॉप से 'जिगर' अंकल ने भेजा था । मम्‍मा बिज़ी रही होंगी तो उन्‍होंने उसे वहां छोड़ दिया । सारी व्‍यवस्‍था ऐसी थी कि एक हाथ मारा जाए तो badmash jadoo चावल का पैकेट बाल्‍टी में छलांग लगा देगा । मैं रसोई में पहुंचा और मार दिया हाथ । फिर क्‍या था । चावल गिर गए पानी में । और मैंने खूब छपाछप की । मम्‍मा ने कहा कि--'अरे जादू ये क्‍या किया तुमने' । मैं स्‍पीड भागा हॉल की तरफ और खिलौनों में ऐसे मगन हो गया जैसे कुछ हुआ ही ना हो । फिर चुपके से नज़रें उठाकर देखा, मम्‍मा  मुझे ग़ुस्‍से में देख रही थीं ।  मैंने उनकी निगाहों को 'इग्‍नोर' किया और अपने खिलौनों में मगन रहा ।  लेकिन मन नहीं माना तो फिर मम्‍मा की तरफ बडे प्‍यार से  देखा और मुस्‍कुरा दिया । मेरी 'स्‍माइल' से शायद मम्‍मा को प्‍यार आ गया । उन्‍होंने मुझे गोद में उठा लिया और बोलीं--'जादू तू बहुत नटखट है' । अगले दो तीन दिनों तक मम्‍मा चावल सुखाती रहीं । कभी धूप में तो कभी पंखे के नीचे । और मैं फैले हुए चावल पर हाथ पैर मारता हुआ अगली शरारत की प्‍लानिंग करता रहा ।



2. बेडरूम में मुझे बेड और उसके साथ लगी खिड़की पर खेलने में बड़ा मज़ा आता है । मैं रोज़ सुबह उठकर वहां पापा के साथ धमाचौकड़ी भी मचाता हूं । और परदे के पीछे छिपकर 'छिप्‍पी' (छिपा-छिप्‍पी) वाला खेल भी खेलता हूं । और 'हा हा हा' करके हंसता भी हूं । एक शाम मम्‍मा मुझे तैयार कर रही थीं । उनका ध्‍यान यहां-वहां भटका तो मैंने पता है क्‍या किया । टेल्‍कम पाउडर के डिब्‍बे को पूरा उलट दिया । बेड पर पाउडर ही पाउडर फैल गया और मैं सफेद मुंह का बंदर बन गया । थोड़ा सा पाउडर खाके भी देखा । पर उसके टेस्‍ट अच्‍छा नहीं लगा ।



3. आजकल पापा मुझसे बचके रहते हैं । अपने डेस्‍कटॉप पर काम करते हुए वो अगर B and W की-बोर्ड वाला सेक्‍शन बाहर खींच कर छोड़ दें तो मैं पंजों के बल उचकके उसे पकड़कर खड़ा हो जाता हूं और माउस से यहां वहां क्लिक करके खींचम-तान मचा देता हूं । की बोर्ड और माउस की पिटाई भी करता हूं । पापा फोन पर बात कर रहे थे । उनका कुछ काम चल रहा था 'पी.सी.' पर । मैंने मौक़ा देखा और जा पहुंचा वहां पर । माउस खींचा और उठा-पटक, खींचम-तान सब की । जब पापा लौटे तो देखा कि उनका तैयार 'वर्ड-डॉक्‍यूमेन्‍ट' गा़यब है । सारी विन्‍डोज़ बंद हो चुकी हैं । मीडिया-प्‍लेयर पर गाना बजाया जा रहा है । ये सब किसने किया बताईये । ....'जादू' से हो गया । हे हे हे ।

 

 

 



4. पापा कभी-कभी अपनी स्क्रिप्‍ट्स और रिसर्च का काम घर पर भी करते हैं । एक दिन उन्‍होंने अपने ब्‍लैंक-पेजेस का पूरा रीम शो-केस के एक सेक्‍शन में छिपा दिया । और उसमें से निकाल निकाल के वो अपना लिखने का काम करते रहते थे । अब 'जादू' की नज़रों से भला कुछ छिप सका है । मैंने शो-केस के मैगनेट से बंद रहने वाले दरवाजों को खींचने की अच्‍छी प्रैक्टिस कर ली है । बस एक दिन मौक़ा ताड़ के पापा की पूरी फाइल खीच ली और सारे कोरे काग़ज़ गिरा दिये । बाकी काम पंखे ने किया । कमरे में चारों तरफ कोरे काग़ज़ फैल गये । कुछ को मैंने मोड़ कर गुड़ी-मुड़ी भी कर
दिया ।

अख़बारों के साथ तो मैं रोज़ ही ऐसा करता हूं ।  

5. एक दिन पापा ने सोचा कि आई-पी-एल का अपना पसंदीदा मैच देखें । रिमोट ढूंढा । फर्श पर पड़ा था । उन्‍हें लगा कि रिमोट हल्‍का क्‍यों लग रहा है । अरे मैंने पिछले remote हिस्‍से को खोलकर बैटरियां निकाल ली थीं । उन्‍हें चूसा, पर उनमें टेस्‍ट ही नहीं था । फेंक दिया । पापा खोज-खोजकर परेशान हो गए तब जाकर उन्‍हें बैटरी मिली । पर एक ही मिली  । दूसरी बैटरी खोज-खोजकर थक गए तो अपने पास से एक नई बैटरी निकालकर रिमोट में लगाई और मैच देखा । तब तक कई ओवर निकल गए थे । मुझे बड़ा मज़ा आया । लेकिन अब रिमोट मेरी पहुंच से दूर रखा जाने लगा है । पर बैटरियों पर मेरी ख़ास नज़र रहती है ।

6. एक दिन मैं पापा की एक्‍सटर्नल हार्ड-डिस्‍क गिरा चुका हूं । अच्‍छा हुआ उनका डेटा लॉस्‍ट नहीं हुआ । वरना सबसे ज्‍यादा नुकसान तो गानों का होता ना ।

 

 


7. पिछले दिनों मैंने सोचा कि मम्‍मी पापा बंबई में बहुत बोर हो गए हैं । उन्‍हें कहीं घुमा लाऊं । खूब सोचा और फिर लगा कि अहमदाबाद चलना चाहिए । पास भी है, और वहां ज्‍यादा गर्मी नहीं पड़ती । जब एयर-पोर्ट के सिक्‍युरिटी-चेक पर पर महिला-सिक्‍यूरिटी ने अपना मेटल-डिटेक्‍टर मेरे सामने लाया तो मैंने झट-से उसे कसके पकड़ लिया और सोचा कि इसे घर ले चलते हैं । इससे खेलने में मज़ा आयेगा । सिक्‍युरिटी वाली आंटी को मज़ा आ गया । वो हंसके बोली--'ओह सो क्‍यूट बेबी' । मैंने उनकी बात पर कोई रिस्‍पांन्‍स नहीं दिया । लेकिन प्‍लेन में चढते वक्‍त 'क़तार' में एक आन्‍टी के लंबे बाल बड़े अच्‍छे लगे तो मैंने फौरन हाथ बढ़ाकर ज़ोर से खींच लिए । उन्‍होंने मुड़के देखा, मम्‍मा ने सॉरी कहा तो वो ज़ोर से हंस पड़ीं । और बोलीं--कोई बात नहीं । मेरा बेटा भी ऐसे ही बाल खींचता है । लो और खींच लो बाल ।

मुझे लगता है कि आज के बुलेटिन के लिए इतना काफी है । चलते चलते एक बात सुन लीजिए । एक लड़की है जो रोज़ शाम को मुझे नीचे बिल्डिंग के कंपाउंड में मिलती है । सात आठ साल ही होगी । मैं उसे दीदी-वीदी कुछ नहीं कहता । जब भी वो मिलती है मैं उसके बाल खींचता हूं । और वो हमेशा मुझे देखकर बाल खिंचवाने चली आती है । एक दिन मैंने उसकी आंख में उंगली भी डाल दी थी । हे हे हे ।

अब मैं चलता हूं शरारत करने । बाक़ी की शरारतों के बारे में बाद में बताऊंगा ।


मैं जादू हूं ना । मैं कुछ भी कर सकता हूं ।

10 comments:

संगीता पुरी said...

तुम्‍हारा जादू अच्‍छा लगा .. हमेशा ऐसे ही बुलेटिन सुनाया करो !!

रंजन said...

baap re..... mauj karo jaadu ji..

love

बी एस पाबला said...

बड़ा मज़ेदार बुलेटिन था भई
जादूगर-जादूगरनी का तो हाल देखते बनता होगा :-)

मनीषा पांडे said...

जादू की तो बात ही निराली है। जादू जैसा कोई नहीं। यार तुम मेरे भी बाल खींच लेना मिलने पर।

Suman said...

nice

डॉक्टर मामा said...

"हम्म्म्म्म"; तो रिमोट की दूसरी बैटरी मिली नहीं अभी तक ?
पापा से कहो- जरा तुम्हारे पेट का एक्स-रे करवा के देखें । कहीं वहाँ न पड़ी हो ! :-))

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

लगता है आज पापा का पीसी फ्री मिल गया। पूरे महिने का बुलेटिन पेल दिया। पर शरारतें करने के साथ बहुत कुछ सीखना भी जरूरी है। अब जरा पोस्ट टाइप करो तो वाक्य समाप्त करो तो अंतिम वाक्य के बाद बिना स्पेस छोड़े पूर्ण विराम या प्रश्नवाचक चिन्ह लगाओ। ठीक शब्द के बाद जैसे अर्द्धविराम लगाते हैं। वरना या तो ऐसा लगेगा कि अगले वाक्य के पहले लगाया है या फिर अगली लाइन में टपक पड़ेगा, जैसे आज हुआ है।

Udan Tashtari said...

ऐसी गजब बदमाशी..पूरे जबलपुरिया हो भई जादू. चावल तो अच्छा किया धो दिये. वो तो वैसे भी धिने ही पड़ते, इसमें तो मम्मी को थैंक्यू बोलना चाहिये था. :)

सुनाते रहो आगे भी बुलेटिन..इन्तजार करेंगे. कुछ तोड़ो भी तो. बिना उसके क्या मजा आयेगा.

mukti said...

हा हा हा हा !!! मेरी दीदी का बेटा भी ऐसा ही शरारती है. और देखो कैसे एक दाँत दिखाकर हँस रहा है. छैतान कहीं का.

सुशील कुमार छौक्कर said...

वाह क्या जादू है "जादू" की शरारतों मे। बेटी की शरारतें भी याद आ गई।

जादू क्‍यों

हम हैं जादू के मम्‍मी-पापा ।
'जादू' अपनी मुस्‍कानें लेकर आया है हमारी दुनिया में ।
हम चाहते हैं कि ये मुस्‍कानें हम दुनिया के साथ बांटें ।

जादुई दिन

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