28 November 2009

जादू का मॉर्निंग-वॉक

जब हम इलाहाबाद गए थे तो डॉक्‍टर मामा ने मम्‍मी से कहा था कि जादू के लिए अब 'वॉकर' ख़रीदने का वक्‍त आ गया है । फिर अभी कुछ दिन पहले उन्‍होंने फ़ोन पर भी कहा कि बढिया 'झालरदार' वॉकर ख़रीदा जाए, ताकि जादू मज़े से घर में घूम सके । दरअसल मैं घिसट-घिसटकर आजकल पूरे घर में घूमता हूं । और रसोई मेरी पसंदीदा जगह है । इसलिए हॉल से सीधे रसोई की तरफ़ भागता हूं मैं । ऐसे में अकसर मेरा ध्‍यान ऐसी चीज़ों पर जा सकता है जिनसे चोट लग सकती है । जैसे कि तीन दिन पहले मैं 'गाव-तकिए' या 'मसनद' पर चढ़ कर दूसरी तरफ़ उतर गया । ज़ाहिर है कि सिर के बदल गिर भी सकता था । इसी तरह से मैं 'सैटी' पर हाथ रखकर एकदम खड़ा हो
गया । और जब टेलीफोन की बेल बजी तो एकदम चौंककर पीछे हटा और गिरने की बजाए बैठ गया । गिरता तो मेरे सिर में चोट लगती और मैं ज़ोर-ज़ोर से रोता ।

इसलिए मेरे लिए कल रात एक 'वॉकर' ख़रीद दिया गया है । आज सुबह से मैंने इस पर खेलना भी शुरू कर दिया है । ये देखिए ।

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मेरे वॉकर पर डॉक्‍टर मामा के कहे मुताबिक़ काफी चीज़ें लगी हैं । और खींच-तान करके मैं उन्‍हें तोड़ने पर उतारू हूं । उम्‍मीद है कि दो तीन दिनों में मैं इसे तोड़
डालूंगा ।
IMG_4990 कहिए ये पोज़ कैसा लगा । मेरी नज़र पापा के कैमेरे पर हमेशा ही रहती है । मैं चाहता हूं कि इस कैमेरे को खाकर देखूं । इसका स्‍वाद अच्‍छा ही लगता होगा । क्‍योंकि तस्‍वीरें इत्‍ती अच्‍छी जो आती हैं कैमेरे से ।
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IMG_4994 मम्‍मी की तरफ़ देखकर हंस रहा हूं मैं । लेकिन मम्‍मी को 'खु़श' करने के लिए नहीं । दरअसल वॉकर पर मुझे मज़ा बहुत आ रहा है ।
IMG_4999 अच्‍छा तो मैं चला 'वॉक' करने । आपने आज 'मॉर्निंग-वॉक' की क्‍या । क्‍या कहा...नहीं की ? छी: गंदे । आज ईद है आप सबको ईद-मुबारक ।

16 November 2009

आज जादू मम्‍मी को 'हैपी-बर्थडे' कह रहा है !

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

आज मेरी मम्‍मी का जन्‍मदिन है । पिछली रात से ही मुझे बुख़ार आ गया । पता नहीं क्‍या वजह थी । पर रात को तीन बजे के बाद से मैं बहुत रो रहा था ।

मम्‍मी ने किसी तरह से चुप कराया । और सुलाया ।

 

 



सुबह डॉक्‍टर से बात की । और अब मैं इस वक्‍त उनके पास जा रहा हूं । हालांकि दिन में मैंने थोड़ी मस्‍ती भी की । आज मैं अपनी मम्‍मी को 'हैपी-बर्थडे' कहते हुए उनकी और मेरी कुछ तस्‍वीरें दिखला रहा हूं । देखिए ये स्‍लाइड-शो ।



मम्‍मी की बर्थडे-पार्टी बाद में होगी ।

इंतज़ार कीजिएगा तस्‍वीरों का ।

14 November 2009

नानी आप बहुत याद आओगी ।

 

पिछले कई दिनों से मैं अपने ब्‍लॉग पर आकर अपने बारे में आपको ख़बरें नहीं दे
सका । और इसकी एक वजह थी । दरअसल दस अक्‍तूबर को मेरी नानी जी का निधन हो गया और उसके बाद हम इलाहाबाद चले गए  । मेरी नानी वहीं तो रहती थीं ना । नानी पिछले दिनों यहां आई थीं और मैंने उनके साथ थोड़ी शरारतें भी की थीं । ये देखिए मैं नानी की गोद में किस तरह सो रहा हूं ।


IMG_4050 नानी जी मुझे देखने को कब से लालायित थीं । उनकी तबियत कई दिनों से ख़राब थी और इसके बावजूद वो बंबई आई थीं । मुझे तो यही लगता है कि वो मुझे देखने आई होंगी । जब वो बंबई आई थीं तो मुझे गोद में लेकर उन्‍हें कितना अच्‍छा लगा था मैं बता नहीं सकता । उन्‍होंने कितने सारे लोकगीत गाए थे मुझे गोद में लेकर । उनकी गोद में जाकर मैं ज़रा भी रोया नहीं था ।



मैंने सोचा था कि थोड़ा बड़ा हो जाऊंगा तो अपनी कहानियां नानी को सुनाऊंगा और नानी की कहानियां सुनूंगा । सर्दियों के दिनों में इलाहाबाद जाकर नानी के साथ दही-जलेबी खाऊंगा और छत पर धूप सेंकते हुए उनसे ढेर सारी बातें करूंगा । पर अब ये कभी नहीं हो पायेगा । नानी आप इत्‍ती जल्‍दी क्‍यों चली गयी ।


mai fotos 001                           मेरी मम्‍मी और नानी की ये तस्‍वीर देखिए ।

आज बाल दिवस है । आप सभी को शुभकामनाएं ।

जादू क्‍यों

हम हैं जादू के मम्‍मी-पापा ।
'जादू' अपनी मुस्‍कानें लेकर आया है हमारी दुनिया में ।
हम चाहते हैं कि ये मुस्‍कानें हम दुनिया के साथ बांटें ।

जादुई दिन

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