09 December 2009

जादू का सफ़रनामा

हां तो मैंने कल ही आपसे कहा था ना कि मैं घूमने जा रहा हूं....अपनी पिछली पोस्‍ट चढ़ाने के बाद मैं फ़ौरन गाड़ी में जाके अपनी सीट पर बैठ गया । आगे बढ़ने से पहले दो बातों के जवाब दे दूं । IMG_5149

रंजन अंकल..मैं मम्‍मी-पापा के साथ पूरा गया तो था, पर पापा की ऑफीशियल-ट्रिप उतनी मज़ेदार ट्रिप नहीं है कि चर्चा की जाए । और पाब्‍ला अंकल मेरे माथे पर जो निशान आप देख रहे हैं, असल में वो मेरी किसी शरारत से लगी चोट नहीं है । मम्‍मी 'डिठौना' लगाती हैं फिर उस पर टैल्‍कम-पाउडर लगा देती हैं ताकि काजल फैल ना सके । वरना मैं अपने हाथों से काजल को फैलाकर काले मुंह का बंदर बन जाता
हूं ।

घर से निकलकर हम पहुंचे वेस्टर्न-एक्‍सप्रेस-हाईवे । हाईवे पहुंचकर जब गाड़ी दौड़ने लगी तो मेरी मस्‍ती शुरू हो गयी । पता है मैंने अपनी मम्‍मी की आंख पर अपना सिर भी टकरा दिया था । मुझे तो कुछ नहीं हुआ पर मम्‍मी को थोड़ी देर के लिए दर्द हुआ । कित्‍ती नाज़ुक हैं ना मेरी मम्‍मी । फिर हम ऋत्विक भैया के स्‍कूल पहुंचे । और उन्‍हें पिक-अप करते हुए आगे बढ़े ।

गोरेगांव पहुंचे तो हमने सोचा एक ब्रेक लिया जाए । ओबेरॉय मॉल के सामने रूककर मैं पापा के कह रहा हूं--'अंदर चलिए ना' । ये फ़ोटो ऋत्विक भैया ने खींची है । IMG_5150पापा ने देखा कि गाड़ी के ग्‍लास में हम दोनों बढिया दिख रहे हैं । तो उन्‍होंने ख़ुद ही एक तस्‍वीर खींच डाली । ध्‍यान से देखिए मैं कैमेरा छीनने की कितनी कोशिश कर रहा हूं । IMG_5152ओबेरॉय मॉल के प्रवेश-द्वार पर 'मैक्‍डोनाल्‍ड' है । जहां 'ये' वाले अंकल जाने कितने दिनों से बैठे हैं । थकते तक नहीं । मैंने सोचा 'इनके' हाल-चाल पूछ लिए जाएं वो भी 'इन्‍हीं' की गोद में बैठकर ।
IMG_5154IMG_5157मैंने सोचा कि 'पत्‍थर-अंकल' की ये सजीली पोशाक ज़रूर 'टेस्‍टी' होगी । तो उसे मैंने उसे चखकर देख लिया ।   IMG_5155पत्‍थर-अंकल को चाटने के बाद जब हम चले तो मैं सो गया । जब मेरी नींद खुली तो देखा कि हम 'बांद्र-वरली-सी-लिंक' पर से गुज़र रहे हैं । मम्‍मा ने फौरन कैमेरा उठाया और चलती गाड़ी से ये तस्‍वीर खींची ।
IMG_5159 अब आप सोच रहे होंगे कि आखि़र हम जा कहां रहे हैं । ये जानने के लिए इंतज़ार कीजिए कल की मेरी 'पोस्‍ट' का । कैसी लगीं ये तस्‍वीरें । फिलहाल मैं ऊधम मचाने जा रहा हूं । मैं जादू हूं ना कुछ भी कर सकता हूं ।

3 comments:

SaJ said...

Jadooji...aur kya kya jadoo karnewale ho aap???

रंजन said...

जादू.. पत्थर अंकल के पास आइसक्रिम मिलती है..यम यम.. खाई क्या? बहुत प्यारे लग रहे हो..

प्यार.

pratima sinha said...

हाँ भई जादू जी, यही तो हम भी पूछने वाले थे, मैक’डी अंकल के बर्गर भी खाए या उनकी पोशाक चख कर ही पेट भर लिया.

जादू क्‍यों

हम हैं जादू के मम्‍मी-पापा ।
'जादू' अपनी मुस्‍कानें लेकर आया है हमारी दुनिया में ।
हम चाहते हैं कि ये मुस्‍कानें हम दुनिया के साथ बांटें ।

जादुई दिन

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