06 December 2009

जादू-जी और पारले-जी

जब से मेरा वॉकर आया है मेरी तो मौज हो गयी है । पहले मैं ज़मीन पर रेंगते हुए मौज-मस्‍ती करता था । अख़बार से लेकर मोबाइल और कलम से लेकर बरतन तक हर चीज़ को अपने मुंह में डाल लेता था । लेकिन वॉकर के आने के बाद मैं पूरे घर में चहलक़दमी करता हूं । और क्‍या करता हूं बताऊं क्‍या :



1. किचन में जाकर ट्रॉलीयों को खोल लेता हूं ।
2. पापा की कंप्यूटर-ट्रॉली पर जाकर की-बोर्ड की पिटाई करता हूं
3. सोफे पर रखी हर चीज़ का बुरा हाल करता हूं ।
4. मौक़ा मिलते ही बाल्टियों के भीतर हाथ डाल देता हूं । ‍
5. सेन्‍टर-टेबल पर रखी हर चीज़ पर हमला कर देता हूं ।


कल रात की मज़ेदार बात सुनिए । मम्‍मी किचन में थीं और पापा अपने कंप्‍यूटर पर कुछ कर रहे थे ( ज़्यादातर वो कंप्‍यूटर पर ही तो काम करते रहते हैं ) हम बाहर से घूमकर आए थे । मम्‍मा 'जिगर अंकल' ( हमारे नियमित ग्रॉसरी-स्‍टोर वाले) से 'पारले-जी' का पैकेट लाईं थीं और बेख़बरी में उन्‍होंने पैकेट रखा सेन्‍टर-टेबल पर और मुझे वॉकर पर रख दिया फिर लग गयीं रसोई में 'डिनर' तैयार करने । मैंने पहले तो यहां-वहां हाथ मारा । मोबाइल-चार्जर का वायर खींच दिया । अख़बार को तोड़-मरोड़ कर फेंक दिया । रिमोट को अपने क़ब्‍ज़े में कर लिया । उसके बाद मेरी नज़र पड़ी पारले-जी के पैकेट
पर । 

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जब हम घूम रहे थे तो मम्‍मा ने पैकेट को खोलकर एक दो बिस्किट मुझे खिला दिये थे, यानी पैकेट खुला हुआ था और जल्‍दी में यहीं मम्‍मा से ग़लती से हो गयी । मैंने पैकेट
उठाया और उसमें से बिस्किट निकाल लिए ।  IMG_5054अब बिस्किट तो होते ही खाने के लिए हैं । और जब इस तरह ख़ज़ाना हाथ लग जाए तो भला कोई मौक़ा छोड़ता है । बस मैंने भी बिस्किटों की दावत उड़ानी शुरू कर दी । IMG_5055एक एक करके कई बिस्किटों को चखा और रख दिया । फिर सोचा कि सारे बिस्किट खाली कर दिये जाएं तो कैसा रहे । तो मैंने पूरा पैकेट ही उलट दिया । IMG_5062पैकेट खाली हो गया, अब बचा रैपर । हर चीज़ के रैपर में मेरी बड़ी दिलचस्‍पी रहती
है । मैंने सोचा कि बिस्किट तो चख लिए पर अब पैकेट भी तो चखकर देखा जाए ।

IMG_5064फिर लगा 'अरे बाप रे' ये तो बड़ी गड़बड़ हो गयी । मैंने तो सारा घर गंदा कर दिया । अब सफ़ाई कौन करेगा ।
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मैं जादू हूं ना कुछ भी कर सकता हूं ।

6 comments:

संगीता पुरी said...

बहुत बढिया किया .. सफाई का काम मम्‍मा पर छोड दो .. तेरा काम तो सिर्फ मस्‍ती करना है !!

Aayush Maan said...

Ye to vakei JADOO hai

अफ़लातून said...

क्या शानदार जादू !
@ संगीताजी,
सफ़ाई का काम युनुस पर क्यों नहीं ? युनुस भी यह पुनीत काम करते ही होंगे ।

रंजन said...

वाह जादू.. पारेले G ताकत वाले बिस्किट है.. लगे रहो..

ज्ञानदत्त G.D. Pandey said...

जमाये रहो प्यारे! वाकर आया तो समझो भावी इतिहास तुम्हारा है!

Anonymous said...

जादू को देखकर पापू कितने खुश हैं, इस खुशी का कोई मुतबादिल नहीं...

जादू क्‍यों

हम हैं जादू के मम्‍मी-पापा ।
'जादू' अपनी मुस्‍कानें लेकर आया है हमारी दुनिया में ।
हम चाहते हैं कि ये मुस्‍कानें हम दुनिया के साथ बांटें ।

जादुई दिन

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