16 September 2009

देखिए 'जादू' का फ़ैशन-शो

एक दिन पता है क्‍या हुआ । मेरी मम्‍मी ने मेरे बहुत सारे कपड़े निकाले । कुछ तो मम्‍मी-पापा ख़रीद कर लाए थे और कुछ दादा-दादी, नानी, बुआ, मौसी, मामा-मामी, चाचा-चाची, अंकल-आंटी वग़ैरह ने दिए थे । मम्‍मी ने ये सारे कपड़े करीने-से रख दिये थे क्‍योंकि इनमें से ज्‍यादातर मेरे नाप के नहीं थे । मैं छोटा-सा जो था ना । पर अब मैं बड़ा होता जा रहा हूं । मम्‍मी कह रही थीं कि ''आज निकालेंगे-कल निकालेंगे'' सोचते-सोचते दिन बीते जा रहे हैं । इसलिए आज ही सारे कपड़े 'चेक' किये जाएं कि इनमें से कौन-से कपड़े जादू को आते हैं और कौन-से नहीं आते हैं ।

जैसे ही मम्‍मी ने कपड़े निकाले मैंने फौरन उन पर हमला करके उनकी 'तह' ख़राब कर दी । 
aमम्‍मी ने मेरे नाप के कपड़ों को एक तरफ़ तह लगाकर रख दिया और नाप-से कुछ बड़े कपड़ों को दूसरी तरफ रख दिया । लेकिन मैंने फिर उन पर 'हमला' कर दिया । और उनके बीच कैसे घुस गया ये देखिए ।
bये क्रम देर तक चलता रहा । मम्‍मी तह करतीं, कपड़े जमातीं और मैं उनके बीच जाकर सब ख़राब कर देता । मम्‍मी ने पहले तो आंखें दिखाईं पर फिर उनको मेरी ये 'अदा' अच्‍छी लग गयी और उन्‍होंने मेरी ढेर सारी तस्‍वीरें खींच लीं । 
cकभी मैं किसी 'कैप' या टोपी को पहनकर देखता तो कभी किसी कपड़े को चखने की कोशिश करता । इस दौरान मैंने खूब 'शोर' भी करता रहा । dकपड़ों की क्‍या हालत हुई ये तो आप समझ सकते हैं  । पर मम्‍मी को मैं कितना तंग करता हूं इसकी शायद आप कल्‍पना भी नहीं कर सकते । मैं जादू हूं ना मैं कुछ भी कर सकता हूं ।e 

fअब तक मम्‍मी ने कपड़ों का 'सिलेक्‍शन' कर लिया था । अब बारी थी उनको पहनकर देखने की यानी 'फ़ैशन शो' की । चूंकि मैंने अभी चलना सीखा नहीं है...छोटा-सा तो हूं, इसलिए मेरा फैशन शो कुछ अलग तरह का था । उसकी तस्‍वीरें देखने के लिए आईये 'जादुई तस्‍वीरों' पर ।

 



बताईये कैसी लगी ये पोस्‍ट । क्‍या आप अपने कपड़ों का इस तरह 'सिलेक्‍शन' करते
हैं ।

8 comments:

Udan Tashtari said...

जबरजंग फैशन शो रहा जादू का.

कित्ते सारे तो हैं, एक एक करके पहनोगे तो ही बड़े हो जाओगे. :)

बहुत प्यारे!!

हिमांशु । Himanshu said...

सुन्दर कपड़े-सुन्दर जादू ! तस्वीरें भी बहुत सुन्दर हैं ।

तोहार डॉक्टर मामा "कविता वाले" said...

"जादुई-तस्वीरन" मां ख़ुदै गर्मी की बातन करत हो और फिर इहाँ ख़ुदै तरह-तरह के कपड़वन पहनै की भी! मुला अइसन मां तो कपड़वन उतारे जात हैं,भइया। वइसनौ आजकल का लेटेस्ट फैसनवै है - कपड़वन क उतारना। बड़े-बड़े फ़िल्मी हीरो लोगन तक स्टेजवा पर सर्ट-उतारू डान्स कर रहे हैं ।

तौ जब लगे तुम लेटेस्ट फैसनवा सीखो अउर ओहू मां आपन फोटुआ हिंचवाय के भेजो, तब लगे ई लो -
गरमी अउर कपड़वा उतारै पर भी एक ठो कवितवा है हमरे स्टॉक मां :

एक बार छिड़ गयी बहस यह हवा और सूरज में
कौन अधिक बलवान शक्तिशाली है हममें तुममें

बहुत देर तक चली बहस पर हो न सका कुछ निर्णय
दोनों ने तब किया अन्त में मिल करके यह निश्चय

चलते राही के कपड़े जो सहज उतरवा लेगा
वही अधिक बलवान शक्तिशाली भी कहलायेगा

फिर क्या पवन चला सन-सन पहले थी उसकी बारी
वस्त्र उड़ा कर ले जाने में लगा शक्ति दी सारी

लेकिन ज्यों-ज्यों वेग पवन का पल-पल बढ़ता जाता
त्यों-त्यों पथिक वस्त्र अपने कसता लपेटता जाता

हारा पवन अन्त में सूरज ने गर्मी फ़ैलायी
बढ़ती जलती हुई धूप से सब दुनिया अकुलाई

कहीं किसी भी तरु का कोई पत्ता एक न हिलता
आग बरसती थी मानों, कण-कण तृण-तृण था जलता

तर हो गया पसीने से तन, भीगे कपड़े सारे
घबरा गया पथिक उसने झट अपने वस्त्र उतारे

दूर फेंक उनको जा बैठा पा छाया एक तरु की
हुई बहस इस तरह ख़त्म यह हवा और सूरज की

एकरे आगे क कमवा "उड़न-तश्तरी" जी के है, ई तो तुम जनबै करत हो ।

noopur said...

saare outfits bahot aache hain....pahnkar tum bahot smart laoge....i m daam sure ....thodi kum shatani kiya karo ...kahin mummy tumhari pitayee na kar de....par woh kar hi nahi sakti..tum ho hi itne cute!!!!!!!!!

ritvik said...

waha....!kya jalwaa he jadoo ke fasion.

ज्ञानदत्त पाण्डेय | Gyandutt Pandey said...

इन रंगबिरंगे कपड़ों में जादू को ढ़ूंढ़ निकालना भी पहेली है न!

रंजन said...

वाह जादू.. वाकई तुम्हारा फैशन शो तो शानदार है..

Devavrat said...

jadoo ne mujh par apna jadoo kajalwa dikhadiya.

जादू क्‍यों

हम हैं जादू के मम्‍मी-पापा ।
'जादू' अपनी मुस्‍कानें लेकर आया है हमारी दुनिया में ।
हम चाहते हैं कि ये मुस्‍कानें हम दुनिया के साथ बांटें ।

जादुई दिन

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