29 August 2009

डॉक्‍टर मामा कहते हैं कविताई छुतहा रोग है

सब लोगों को जादू की राम राम नमस्‍ते । कैसे हैं आप । पता है इलाहाबाद वाली ईषिता दीदी ने एक कविता भेजी है । कविता वाले डॉक्‍टर मामा ने सही कहा था कि कविताई छुतहा रोग है । अब सबके सब कविता कर रहे हैं । इससे पहले भी ईषिता दीदी एक कविता भेज चुकी हैं ।


जादू भैया कैसे हो
दिन भर जादू-सा दिखलाते
जाने क्‍या तुम जतन लगाते
कैसे कैसे शो दिखलाते
शो दिखलाकर रौब जमाते
ये सारे शो हिट हो जाते
मंद मंद मुस्‍काते हो
जादू भैया कैसे हो ।।
सुनते हैं तुम अच्छे हो
मन के कोमल सच्‍चे हो
छोटे से तुम बच्‍चे हो
जादू भैया कैसे हो ।
मोबाइल देख मुस्‍काते हो
जैसे कुछ समझाते हो
जाने क्‍या क्‍या कहते सुनते
दिन भर हंसते रोते गाते
खुद ही कहते खुद ही सुनते
खुद ही समझ इतराते हो
जादू भैया कैसे हो ।
कभी एक संग हंसते रोते
मुस्‍का मुस्‍का कर दू धू पीते
शू शू करते पॉटी करते
गला फाड़ चिल्‍लाने लगते
गुस्‍सा होने पर मम्‍मी का
हंसकर दिल बहलाने लगते
जादू भैया कैसे हो ।।
अदा बहुत दिखलाते हो
हमको बहुत रिझाते हो
सबका दिल बहलाते हो
इलाहाबाद नहीं क्‍यों आते हो
क्‍यों इतना भाव खाते हो
जादू भैया कैसे हो ।।


डॉक्‍टर मामा तो कवता और गीत भेजते ही रहते हैं । देखा आपने है ना कविताई छुतहा रोग ।

4 comments:

संगीता पुरी said...

वाह !! एक दो वर्ष में तो तुमपर लिखी कविताओं का संग्रह प्रकाशित हो जाएगा !!

अर्शिया said...

Sahee kahte hain.
( Treasurer-S. T. )

Udan Tashtari said...

कविताई छुतहा रोग-मामा जी सही कह रहे हैं!!

ज्ञानदत्त पाण्डेय | Gyandutt Pandey said...

डाक्टर कहते हैं तो सही कहते होंगे रोग के बारे में! :-)

जादू क्‍यों

हम हैं जादू के मम्‍मी-पापा ।
'जादू' अपनी मुस्‍कानें लेकर आया है हमारी दुनिया में ।
हम चाहते हैं कि ये मुस्‍कानें हम दुनिया के साथ बांटें ।

जादुई दिन

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