27 August 2009

जादू चला फोटो-स्‍टूडियो

पता है कल मेरा 'मंथली बर्थडे' था । कल मैं पूरे छह महीने का हो गया ।
अब आप सोच रहे होंगे कि कल मैंने क्‍या किया ये भी तो आपको बताऊं । कल मम्‍मी-पापा मुझे 'रवि-अंकल' के पास लेकर गए । अरे रवि-रतलामी अंकल नहीं भई । रवि IMG0043A अंकल तो हमारे फोटोग्राफर हैं । मम्‍मी के 'प्रेग्‍नेन्‍सी-फोटोज़' भी उन्‍होंने ही खींचे थे । हमारे घर के सारे फोटोज़ वो ही खींचते हैं । कल जब मैं उनके पास फोटो खिंचवाने गया तो बड़ा मज़ा आया । सब-के-सब मुझे हंसाने की कोशिश में लगे थे । पर स्‍टूडियो का अंधेरा और तेज़ स्‍पॉट-लाइट्स देखकर मैं ज़रा-भी नहीं हंसा । बल्कि चेहरे पर परेशानी वाले भाव ले आया । फोटोग्राफर अंकल ने जब मेरी गोद से ज़रा-सी दूर 'रिफ्लेक्‍टर' रखा और फोटो खींचने के लिए फोकस किया...मैंने झट से 'रिफ्लेक्‍टर' पर हाथ मार दिया । बेचारे.....आखि़रकार उन्‍हें फिर से सारी तैयारी करनी पड़ी । तो इस तरह उन्‍हें एकाध शॉट मेरे हंसने का मिल ही गया । खिलखिलाने के जो शॉट पापा ने लिए हैं वो तो नहीं ही मिल पाए ।  कुछ तस्‍वीरें रवि अंकल ने खींचीं हैं और जैसा कि हर पेशेवर-फोटोग्राफ़र को 'मर्ज़' होता है...वो उन्‍हें 'करेक्‍ट' करेंगे उसके बाद प्रिंट करके देंगे । तब तक मैं बेसब्री से इंतज़ार कर रहा हूं । हां रवि-अंकल ने कहा है कि जादू को एक बार फिर से लेकर आईये । मैं फिर से 'ट्राइ' करूंगा और उसके 'नेचुरल फोटो' लूंगा । करिए करिए रवि अंकल, 'ट्राइ' करके देख लीजिए । पर याद रखिए मेरे 'मूड' का कोई ठिकाना नहीं है ।




आजकल मैं 'पल्‍टी-मास्‍टर' हो गया हूं । दिन भर पलट-पलटकर आसपास रखी चीज़ों को झपटने का काम करता हूं । कभी मोबाइल, कभी रिमोट, कभी तकिया, कभी चादर, कभी अख़बार या पत्रिकाएं....जो कुछ 'ग़लती-से' मेरे आसपास छूटा उसे मैं अपने क़ब्‍ज़े में करता हूं और फिर सीधे उसे 'चखने' की कोशिश करता हूं । ये लीजिए मेरी पल्‍टी मारने की कुछ और तस्‍वीरें देखिए ।
IMG_3729सामने जो खिलौना पड़ा है उसे देखकर मैं उसे पकड़ने लपका हूं । और ये आ गया खिलौना मेरे क़ब्‍ज़े में
IMG_3730 लेकिन इतने से भला मुझे तसल्‍ली कहां होने वाली है । अब मैं देख तो कैमेरे पर रहा हूं ( जो कि मेरी आदत है, सामने कैमेरा हो तो मैं भला कहीं और क्‍यों देखूं ) लेकिन मुझे चाहिए कुछ और । जाना है कहीं नज़रें हैं कहीं ।


IMG_3732 ओफ्फो कितना काम करना पड़ता है मुझे । देखिए ना कितना थक गया हूं । ये मेरे आराम करने की एक 'अदा' है ।
IMG_3735 चलो चलो अब ज़रा शोर किया जाए । हल्‍ला-गुल्‍ला मचाया जाए ।

IMG_3739कविता वाले डॉक्‍टर मामा ने मेरे लिए एक गीत भेजा है । लेकिन मैं उसे आज नहीं सुनवा पा रहा हूं । कल सुनवाता हूं । इंतज़ार कीजिए । मैं तो चला । 

5 comments:

संगीता पुरी said...

करिए करिए रवि अंकल, 'ट्राइ' करके देख लीजिए । पर याद रखिए मेरे 'मूड' का कोई ठिकाना नहीं है ।
पूरा स्‍टूडियो घर पर ही मंगवा लो .. तभी नेचुरल फोटो हो पाएगी !!

mehek said...

6 maah mubarak ho paltimaar:),bahut sunder photos hai.

Nirmla Kapila said...

भई छ: माह मे ही इतने शैतान हो गये हो? खूब जादू चल रहा है तुम्हारा बधाई

ज्ञानदत्त पाण्डेय | Gyandutt Pandey said...

कम ऑन! इतना जबरदस्त भुजंगासन कर लेते हो पलटने के साथ साथ कि योगासन का गुरू मानने का मन करता है!

Ritvik said...

jadoo tum ab 6 mahine ke hogye ho to ab palti marne ke alava bhagne ki praktis karo.

जादू क्‍यों

हम हैं जादू के मम्‍मी-पापा ।
'जादू' अपनी मुस्‍कानें लेकर आया है हमारी दुनिया में ।
हम चाहते हैं कि ये मुस्‍कानें हम दुनिया के साथ बांटें ।

जादुई दिन

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