16 August 2009

यही दिन देसवा स्‍वतंत्र भए : मेरा पहला स्‍वतंत्रता दिवस

पंद्रह अगस्‍त हमारे देश की आज़ादी का दिन होता है । मेरी जिंदगी में ये दिन पहली बार आया । ज़ाहिर है कि मुझे खूब धूम-धाम से इसे मनाना था । इसलिए सबेरे-सबेरे मम्‍मा मुझे एक सोहर सुनाया--

 



'यही दिन देसवा स्‍वतंत्र भए जगमह खुशी छाई हो,
ललना यही सुख राख्‍यो सम्‍हारि मिलहिं बड़ी मुश्किल,
मिलहिं बड़ी मुश्किल हो' ।

 



फिर सविता मौसी का फोन आ गया । उन्‍होंने मुझे एक सोहर सुनवा दिया । यानी कल के दिन मेरे लिए सोहर की बरसात ही होने लगी ।



जौनि अजदिया के बिरवा तिलक-गांधी दिहलन,
तिलक-गांधी दिहलन हो


हो सकता है कि ऐसे कई सोहर कविता वाले डॉक्‍टर मामा को याद हों । नानी के यहां ये परंपरा है कि बच्‍चा पैदा होने पर सोहर गाया जाता है । हां तो मैं बता रहा था कि वैसे तो कल तैयार होकर पापा-मम्‍मी के दफ्तर जाने की योजना थी । फिर अपनी बिल्डिंग में भी तो तिरंगा मुझे ही फहराना था । लेकिन तैयार होने में देर हो गई और मैं दफ्तर नहीं जा सका । हां बिल्डिंग के झंडा-वंदन में ज़रूर शामिल हुआ । फिर घर आकर मैंने अपना तिरंगा लहराया । ये रहीं तस्‍वीरें ।
IMG_3689भारत माता की जय ।

भारत माता की जय ।
IMG_3676
  IMG_3677मेरी बाक़ी तस्‍वीरें आप जादुई-तस्‍वीरें पर देख सकते हैं ।
स्‍वतंत्रता-दिवस की देरी से ही सही शुभकामनाएं । भारत माता की जै ।


7 comments:

सैयद | Syed said...

आपको भी स्वाधीनता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं !

समयचक्र : महेन्द्र मिश्र said...

आपको भी स्वतंत्रता दिवस की शुभकामना

"डॉक्टर मामा" said...

लो भई, इसी बात पर गिलहरी वाली कविता भी सुन लो :

बस्ता बगल दबाये मोहन
जाता था अपने स्कूल ( या - अंगूठा मुँह डाले जादू , जाता था करने छू-छू)
पर उसका था ध्यान बाग में
जहाँ खिले थे सुन्दर फूल

दिखी डाल पर एक गिलहरी
खाती हुई नीम की कौरी

बोला मोहन सुनो गिलहरी
क्यों खाती निमकौरी गदरी** (**=अधपकी;कच्ची)

चली चलो तुम मेरे संग
दूँगा तुमको मेवे फल

कहा गिलहरी ने सुन भाई
नहीं चाहिये मुझे मिठाई

बन्धन है कितना दु:खदाई
आज़ादी कितनी सुखदाई

इसे जानते हैं सब भाई
इससे मीठी नहीं मिठाई

गिलहरी क्या होती है यह बताने के लिये उसका एक वीडियो हम तुम्हें पहले ही भेज चुके हैं ।
और यह कविता लिखी किसने थी, यह बताने के लिये "उड़न-तश्तरी" जी हैं ही !

ज्ञानदत्त पाण्डेय | Gyandutt Pandey said...

वाह, पैदाइशी देश भक्त हो प्यारे। बड़े हो कर भारत मां की खूब सेवा करना।

noopur said...

where r u jadoo?...2 din ho gaye tumne kuch likha nahi...busy ho kaya .....?

Udan Tashtari said...

स्‍वतंत्रता-दिवस की देरी से ही सही, जादू को बधाई और शुभकामनाएं.

सागर नाहर said...

मेरी तरफ से भी बहुत बहुत बधाई।
दफ्तर ना पहुंच पाये तो कोई बात नहीं कमस-कम अपने अपार्टमेन्ट का झंडा तो फहराना था।

जादू क्‍यों

हम हैं जादू के मम्‍मी-पापा ।
'जादू' अपनी मुस्‍कानें लेकर आया है हमारी दुनिया में ।
हम चाहते हैं कि ये मुस्‍कानें हम दुनिया के साथ बांटें ।

जादुई दिन

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