14 August 2009

डॉक्‍टर-डॉक्‍टर सुनो पुकार.....

 

 

पिछले छह-सात दिनों से मैं ग़ायब था । आप लोगों ने मुझे पूछा ही नहीं । अरे मैं वही 'जादू' हूं...शरारती जादू । दरअसल मैं इसलिए अपने 'ब्‍लॉग' पर नहीं आ पाया क्‍योंकि इन दिनों मेरी तबियत ज़रा 'नासाज़' थी । नहीं..नहीं कोई बड़ी बात नहीं थी, बस ज़रा उल्‍टी-वुल्‍टी हो रही थी । हुआ यूं कि डॉक्‍टर-अंकल की सलाह पर मम्‍मा ने मुझे दाल-चावल, फलों का जूस, पल्‍प वग़ैरह खिलाना शुरू किया । इसमे मुझे banana और apple खाने में बड़ा मज़ा आया । केला मम्‍मी अपनी उंगली से खिलाती हैं....मुझे लगता है कि मम्‍मा के हाथ में ही मिठास है इसलिए मैं उनकी उंगली पकड़ पकड़ के चूसने की कोशिश करने लगा हूं ।  और ऐसा मैं दिन में कई बार करता हूं । ये देखिए । मैं किस तरह केला खाता हूं । IMG_3655अरे हां 'आलू का चोखा' खिलाने के लिए मम्‍मी को कहा था डॉक्‍टर मामा ने, अरे वही कविता वाले डॉक्‍टर मामा । मुझे 'चोखा' बड़ा पसंद आया । इसे कुछ लोग 'आलू का भुर्ता' भी कहते हैं । मैंने खूब चटख़ारे लेकर खाया । लेकिन फिलहाल दाल-चावल मुझे ज़रा भी पसंद नहीं आया । मैं लगातार नख़रे कर रहा था फिर भी मम्‍मी खिलाए जा रही थीं ज़बर्दस्‍ती । सो मैंने उल्‍टी कर दी । और अगले दिन मम्‍मी ने फिर वही किया, मैंने फिर उल्‍टी कर दी । अब मम्‍मी को कौन समझाए कि मैं ज़रा बड़ा हो रहा हूं, मेरी पसंद-नापसंद भी कोई चीज़ है । क्‍यों खिलाया मुझे दाल-चावल । लो अब भुगतो । फिर मुझे दो-तीन दिन तक दाल-चावल खाने पर उल्‍टी होती रही । ''दाल-चावल मतलब पिसे-हुए दाल-चावल का पानी'' । लेकिन अब मम्‍मी 'डर' गयी हैं और मुझे दाल-चावल देना फिलहाल बंद कर दिया है । और इस बात को लेकर चिंतित हैं कि मुझे प्रोटीन कहां से मिलेगा । और मुझे क्‍या-कैसे खिलाया जाए ।
IMG_3656वैसे आपको बता दूं कि जब मैं अपनी मम्‍मा के गर्भ में था तभी से मुझे 'मीठा' बहुत पसंद है । पापा अकसर मम्‍मा के लिए 'घसीटा' के गुलाब-जामुन लाते थे, और इसे खाते ही मैं मम्‍मा के गर्भ में उछलकूद मचा देता था । एक और चीज़ मम्‍मा के गर्भ में रहते हुए मुझे बड़ी पसंद थी और वो थी आईसक्रीम । 'नेचुरल' की आईसक्रीम मम्‍मा को बहुत पसंद है और अकसर वो इसे खाती-रहती थीं । उनके खाते ही मैं उछलकूद मचा देता था । 

ये तो हुईं खाने-पीने की बातें । उन्‍हीं दिनों में मेरी मम्‍मा मुझे कविताएं और कहानियां पढ़-पढ़कर सुनाती थीं और उन्‍हें सुनकर भी मैं उछलकूद मचा देता था । पता है फ़ैज़ अहमद 'फ़ैज़' की कुछ ग़ज़लें और नज़्में मुझे बहुत पसंद आती थीं और आज भी पसंद हैं । इसी तरह 'वह कदंब का पेड़' भी मुझे अच्‍छी लगती थी । और भी कुछ चीज़ें हैं जो पसंद आती थीं । 

 



मम्‍मी की ओर से आज एक कविता---जो बचपन में उन्‍होंने खूब गाई ।


डॉक्टर डॉक्‍टर सुनो पुकार gudia

मेरी गुडिया पडी बीमार
रात को बरसा झम-झम पानी 
उसमें भीगी गुडिया रानी
गीले कपडे दिए उतार
फिर भी गुडिया पडी बीमार
ओहो, इसको तेज बुखार
सौ से ऊपर डिग्री चार
दवा की है ये चार खुराक
सुबह-दोपहर-शाम और रात
फीस लगेगी हर इक बार
आज नगद और कल हो उधार
फीस ?
जब तक गुडिया रहे बीमार
तब तक पैसे रहे उधार।


 


अरे हां, डॉक्‍टर मामा ने एक मज़ेदार बात लिखी है पिछली पोस्‍ट पर टिप्‍पणी में । पढिए ज़रा ।

भई जादू जी,
देखा हमारा असर ?
इशिता और अनुवर्तिका दीदी भी कविता सुनाने लग गयीं ; सुनाने क्या लिखने ही लग
गयीं !
तो,इसी बात पर
कुछ भी नहीं हैं उनसे कम
कविता लिख सकते हैं हम
हमारे लिये भी बायें हाथ का खेल है यह
और लो; "फटाफट" लिख भी डाली (हालाँकि लिखी है दाहिने हाथ से) :

राखी आयी राखी आयी
जादू जी की राखी आयी
प्यारी नन्ही गोल कलाई
उस पर पहली बार सजाई
की उस दिन जो खीर-चटाई
या फिर रबड़ी दूध-मलाई
और जो "टीथर" मम्मी लायी
उनमें मजा नहीं वो भाई
मौज नहीं वो उनमें आयी
जो अब जाकर मैंने पायी
राखी खायी राखी खायी
जादू जी ने राखी खायी

वैसे एक बात बता दें तुम्हें - बच कर रहना ।
दुनिया में सबसे छुतही बीमारी है - कविता ।
देखो ना; हमसे इशिता और अनुवर्तिका दीदी को लग गयी और फिर उनसे वापस हमें !
पाण्डे अंकल (ज्ञानदत पाण्डेय) को जो लगी,सो अलग !!
है कि नहीं ?


अच्‍छा अब मैं चला । नींद आ रही है मुझे । आपको भी कविता की बीमारी लगी क्‍या......और हां । 'जादुई-तस्‍वीरें' पर क्लिक कीजिए और मेरी नई तस्‍वीरें देखिए । अब लगातार आयेंगी मेरी नई तस्‍वीरें ।  


9 comments:

संगीता पुरी said...

तुम ब्‍लाग जगत से गायब थे .. कितने तुम्‍हें याद कर रहे थे .. रचना आंटी ने तुमसे कितनी उम्‍मीदें लगा रखी है .. उनके ब्‍लाग पर जाकर देखो .. और हां , जन्‍माष्‍टमी और स्‍वतंत्रता दिवस की तुम्‍हें बहुत बहुत बधाई !!

जितेन्द़ भगत said...

ओ मेरे बालकृष्‍ण, मजे से खाओ पीयो, पर उम्र के हि‍साब से:)

"डॉक्टर मामा" said...

अरे !
गुड़िया वाली यह कविता तो हमने भी खूब गायी है बचपन में !

तब क्या पता था कि एक दिन कम्बख़्त ख़ुद ही डॉक्टर बन जायेंगे और इसी तरह फ़ीस की उधारी रखकर फोकट में इलाज करना पड़ेगा लोगों का !!
:-D

विनय ‘नज़र’ said...

श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ। जय श्री कृष्ण!!
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INDIAN DEITIES

सैयद | Syed said...

जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ।

...तबियत कैसी है अब आपकी ?

रंजन said...

जादू तुम्हे बहुत मिस किया.. और बहुत याद किया.. पता है तुम्हारा एडमिशन रामप्यारी की स्कुल में भी करा दिया था हमने..

तबियत का ख्याल रखना.. कुछ खास नहीं बस मौसम का असर है..


प्यार..

noopur said...

khoob khao...aur maze karo...aur tum bhi kavita likho na....hum sab padhenge...tumhari kavitayein...

ज्ञानदत्त पाण्डेय | Gyandutt Pandey said...

जल्दी जल्दी लिखा करो प्यारे। तबियत का मर्जिन रख कर कुछ पोस्टें ड्राफ्ट में रख लिया करो! न हो तो अपने मम्मी-पापा को बोल दो तुम्हारे बदले लिख दिया करें।
मन जो लगा रहता है।

सागर नाहर said...

पता है जब हम आपके घर आये थे तब हमने भी घसीटा के नर्म-नर्म गुलाब जामुन खाये थे।
एक बाट कहूं पापा- मम्मी से मत कहना, मम्मी ने पापा पर गुस्सा किया था कि ज्यादा गुलाब जामुन नहीं मत खाओ वरना पेट दुखेगा, क्या मम्मी अब भी पापा को इसी तरह डाँटती रहती है?

जादू क्‍यों

हम हैं जादू के मम्‍मी-पापा ।
'जादू' अपनी मुस्‍कानें लेकर आया है हमारी दुनिया में ।
हम चाहते हैं कि ये मुस्‍कानें हम दुनिया के साथ बांटें ।

जादुई दिन

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