23 July 2009

चलो अंगूठा चूसा जाए

पता है, मेरे शहर में अभी अच्‍छी बारिश हो रही है । हो सकता है कि शहर में पानी की जो किल्‍लत है वो शायद खत्‍म हो जाए । वरना सोचिए कि मैं अभी कुछ महीनों बाद अपने टब में 'छपर छपर' करके कैसे नहाऊंगा । कल जब मैंने कहा कि मैं तो चला अंगूठा चूसने तो 'समीर' अंकल ने कहा अंगूठा तो है ही नहीं मुंह में । अरे मैंने सोचा भला क्‍यों अपनी अंगूठा चूसने वाली फोटो लगाऊं । पर अब देख ही लीजिए । IMG_3319मम्‍मी-पापा दिन भर इस बात से परेशान रहते हैं कि आजकल मुझे अंगूठा चूसने का शौक चढ़ा हुआ है । शायद इस उम्र में सभी बच्‍चों को ये शौक़ चढ़ता होगा । लेकिन समय के साथ ये जुनून खत्‍म हो जाता होगा । पता है, मैं अलग अलग तरह से अंगूठा चूसता हूं । IMG_3071दिलचस्‍प बात ये है कि मैं केवल अंगूठा ही नहीं चूसता । बल्कि जो कुछ हाथ में आ जाए उसे ही चबाना या चूसना चाहता हूं । अख़बार खाने वाली तस्‍वीरें तो आप देख ही चुके हैं । अब ज़रा ये देखिए कि मैं अपने खिलौने को कैसे चूस रहा हूं ।
IMG_3259
लेकिन मुझे इस सबसे रोकने का एक तरीक़ा ये है । इसमें मुझे इसलिए मज़ा आता है क्‍योंकि मैं अपनी शरारतों को छोड़कर मस्‍त सो जाता हूं । IMG_3313और हां अब ज़रा  देखिए लगातार बारिश होने की वजह से मज़ा तो आ रहा है पर मेरे घर का क्‍या हाल है । IMG_3318हां तो अब मैं चला अंगूठा चूसने । वैसे कल आपको बताऊंगा कि मम्‍मी मेरे चबाने और चूसने के लिए क्‍या-क्‍या लाईं हैं । पहले आप बताईये कि आपको मेरी ये अदा कैसी लगी फिर आप भी अंगूठा चूसने का मज़ा लीजिए ।    

12 comments:

Vivek Rastogi said...

पर जादू अंगूठा चूसना अच्छी बात नहीं है।

Udan Tashtari said...

पैर का अंगूठा...वो भी तो चूसो..बड़ा मजेदार रहता है..कपड़े सारे खिड़की पर टंग गये ...अब क्या नंगू बाबा बन कर बैथे हैं हमारे साहेबां?? :)

बहुत प्यारे हो बेटा ...आदित्य ने बताया कि जादू बहुत प्यारा बच्चा है, उसे गोद में खिलाईये ...तुम दोनों मेरे एक एक काँधे पर बैठना और लविजा बिटिया गोद मे..फिर तीनों को स्कूल पहुँचा दूँगा....बुढ़ापे में और क्या काम है ही!! :)


मम्मी पापा का नाम नहीं बताया..उनसे कहो कि ताऊ आये हैं...नमस्ते तो करें. :)

हिमांशु । Himanshu said...

समीर जी की बात का खयाल रखना । पैर का अँगूठा चूसना तो अच्छा माना जाता है, कुछ बेहतर लक्षण । किशन कन्हैया भी पैर का ही अँगूठा चूस मस्त रहा करते थे ।

रंजन said...

जादू जी.. गंदी बात.. लगता है तुम्हारे दांत आ रहे है.. पापा के बोलो डेन्टान की दो दो गोली सुबह शाम लो.. बड़ी मीठी होती है.. ज्यादा जानकारी यहां http://aadityaranjan.blogspot.com/2008/12/blog-post.html

और हाँ मम्मी से कहना हाथ बार बार धुलवाने के लिये..

प्यार..
जादू..

जादू.... jaadoo said...

रंजन चाचा शुक्रिया । मैंने पापा से कह दिया है डेन्‍टान लाने को । और मम्‍मी पहले ही इत्‍ते हाथ धुलाती थीं अब और ज्‍यादा धुला रही हैं ।

रंजन said...

बस जादू अब तु चकाचक हो जायेगा.. और पहले दांत की खबर सुना देना हमको..

प्यार..

ज्ञानदत्त पाण्डेय | Gyandutt Pandey said...

क्या बड़ी बड़ी चमकदार आंखें हैं - जादू करतीं। मम्मी तुम्हारी कजरौटे से माथे पर कोने में टीका नहीं लगातीं - नजर न लग जाये!
:-)

अनिल कान्त : said...

नाम भी जादू और काम भी जादू करना

PD said...

अरे जादू बेटे, तुम अंगूठा चूस रहे हो या फिर सीटी बजाने कि प्रैक्टिस कर रहे हो?
बजाओ, खूब सीटी बजाओ.. आगे चल कर यही काम आयेगा.. :D

PD said...

@ समीर जी - अरे आप तो जादू के मम्मी पापा को अच्छे से जानते हैं.. थोड़ा दिमाग पर जोड़ डालिये, सब याद आ जायेगा.. जादू के जन्म पर शायद आपने भी उन्हें बधाई दी हो.. :)

सागर नाहर said...

बेटा अभी से सीटिया बजाना चालू? अंगूठा चूसने का तो बहाना है....
ये चौथे फोटो में जो आपको सजा मिली है, वह बार बार सागर अंकल के साथ हुई चैट को लीक करने की वजह से मिली है।
आप चैट लीक करोगे तो मैं भी आपकी उस गर्लफ्रेन्ड की बात सबको बता दूंगा.. :)

Anonymous said...

Ritvik
ase hi haste rahena.

जादू क्‍यों

हम हैं जादू के मम्‍मी-पापा ।
'जादू' अपनी मुस्‍कानें लेकर आया है हमारी दुनिया में ।
हम चाहते हैं कि ये मुस्‍कानें हम दुनिया के साथ बांटें ।

जादुई दिन

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