21 December 2009

जादू ने मनाया पापा का पहला जन्‍मदिन

बीस दिसंबर को पापा का बर्थडे होता है । उन्‍नीस की रात हम ज़रा घूमने गए थे । और खाना-वाना खा के सो गए । अचानक मम्‍मा ने पापा को रात बारह बजकर पांच मिनिट पर जगा दिया । पापा को इसकी उम्‍मीद नहीं थी । हॉल में केक रखा हुआ
था । केक देखकर पापा की बजाय मैं ज्‍यादा उत्‍साहित हो गया । और फौरन केक पर हमला करने आ पहुंचा । वो तो मम्‍मा ने किसी तरह रोक लिया । वरना मैं केक पर अपना हाथ छाप चुका होता ।
cake 1कुछ ही पलों बाद मुझे लगा कि अरे केक सामने है और मैं इतने सीधे-सादे तरीक़े से शांत बैठा हूं । भला ऐसा कैसे हो सकता है । तो एक बार फिर मैंने कोशिश शुरू कर
दी । cake 2इस बार मैं केक पर हाथ साफ़..मेरा मतलब हाथ छपाने में कामयाब हो गया । क्रीम हाथ में आया तो ज़ाहिर है कि उसे मुंह में लेना अच्‍छा रहता है । इस कोशिश में मैंने क्रीम अपने गाल पर लगा लिया । और बंदर बन गया । cake 3इतनी शरारतों के बाद आखिरकार केक काटने की बारी आई । और आधी रात के बाद पापा ने अपने पहले जन्‍मदिन का केक काटा । मेरे पैदा होने के बाद ये पापा का पहला जन्‍मदिन था । इसलिए मेरे लिए तो ये पापा का पहला जन्‍मदिन हुआ ना । ckae4फिर मुझे भी केक खिलाया गया । पता है । मैंने केक चेहरे पर लगा लगा कर खाया । और अपनी फेवरेट चीज़ों की लिस्‍ट में इसे भी शामिल कर लिया ।

पापा के बर्थडे की पार्टी बीस की शाम को हुई । उसकी रिपोर्ट मैं कल दूंगा । फिलहाल केक खा लिया है और मैं सोने जा रहा हूं ।

 

मैं जादू हूं ना मैं कुछ भी कर सकता हूं ।

12 December 2009

वरली सी-फेस पर जादू का फ़ोटो-सेशन

अपनी पिछली पोस्‍ट में मैंने आपको बताया कि किस तरह मैंने हाजी अली और महालक्ष्‍मी की सैर की । ज़ाहिर है कि इसके बाद मुझे भूख लग गई । वरली-सी-फेस पहुंचकर मम्‍मी-पापा ने मुझे खाना खिलाया । सविता मौसी हमें महालक्ष्‍मी मंदिर पर ही मिल गयी थीं । जब मैं खाना खा रहा था तब सविता मौसी और ऋत्विक भैया वरली सी-फेस पर समुद्र देख रहे थे । सब बड़े लोगों ने आलू के परांठे, आलू-बड़े वग़ैरह भी खाए ।
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इसके बाद वरली-सी-फेस पर तस्‍वीरें खींची गयीं । ये देखिए मैं ऋत्विक भैया की गोद में शरारत कर रहा हूं । पीछे आपको दू...र बांद्रा-वरली-सी-लिंक भी दिख रहा होगा ।
IMG_5175इसके बाद मम्‍मा और जादू की तस्‍वीर खींची गयी । मम्‍मी और जादू की और भी तस्‍वीरें खींची थी पापा ने ।
IMG_5176मम्‍मी-पापा की गोद में जादू । 
ऋत्विक भैया की खींची तस्‍वीरIMG_5181 जादू, मौसी की गोद में ।
IMG_5188समुद्र किनारे जाकर मैं सोच में पड़ गया कि मैं इत्‍ता छोटा क्‍यूं समंदर इतना बड़ा क्‍यों । IMG_5186समुद्र के किनारे जाकर डूबते हुए सूरज को देखना और अंगूठा चूसना बड़ा मज़ेदार होता है । आप भी करके देखिए । इसमें अपने आप हंसी भी आती है ।
IMG_5199मैं बदमाश हूं पक्‍का । मम्‍मी को दिया धक्‍का ।

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ये रहा मेरे पहले सैर-सपाटे का ब्‍यौरा । आगे-आगे देखिए मैं बंबई की कैसी सैर करवाता हूं आपको ।

10 December 2009

जादू पहुंचा हाजी-अली और महालक्ष्‍मी मंदिर

पिछली पोस्‍ट में मैंने अपने सैर पर निकलने का ब्‍यौरा दिया था और बताया था कि घर से निकलकर ऋत्विक भैया को स्‍कूल से पिक-अप करते हुए हम जा पहुंचे ओबेरॉय
मॉल । लेकिन अभी तक मैंने आपको ये नहीं बताया कि हम जा कहां रहे थे । बांद्रा-वरली-सी-लिंक को पार करके हम वरली आ पहुंचे और फिर पहुंचे हाजी-अली और महालक्ष्‍मी मंदिर । हम घर से यहीं आने के लिए तो निकले थे । 
IMG_5165हाजी अली का ये नज़ारा आपने बहुत सारी फिल्‍मों में देखा होगा । पापा कहते हैं कि ए.आर.रहमान ने फिल्‍म 'फि़ज़ां' में शानदार क़व्‍वाली बनाई थी हाजी अली की । समुद्र में जब दूसरी तरफ़ नज़र घुमाएं तो ये दृश्‍य दिखता है । सामने नेहरू प्‍लेनेटेरियम की गोल इमारत है ।  IMG_5166यहां इतनी कड़ी धूप थी कि मम्‍मी ने अपना दुपट्टा मुझे ओढ़ा दिया ।
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हम हाजी-अली के रास्‍ते पर आगे बढ़ रहे थे ।  तभी मैंने देखा कि एक नाव पर एक पक्षी बैठा था । मम्‍मी-पापा फ़ौरन समझ गए और उन्‍होंने मुझे बताया कि ये बगुला
है । IMG_5169हाजी-अली से लौटते हुए मैं शायद थक गया था इसलिए बाहर आते-आते मैं पापा की गोद में सो गया ।   IMG_5171

यहां से हम पहुंचे महालक्ष्‍मी-मंदिर । जहां बेहद भीड़ थी । शोर सुनकर मेरी नींद खुल गई ।   
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महालक्ष्‍मी मंदिर से हम हीरा-पन्‍ना मॉल में गए । और फिर वापसी । जिसके बारे में मैं कल आपको बताऊंगा । आपको मेरा ये सैर-सपाटा कैसा लगा ज़रूर बताईये । फिलहाल मैं चला अपने वॉकर पर मस्‍ती करने ।

मैं जादू हूं ना कुछ भी कर सकता हूं ।

09 December 2009

जादू का सफ़रनामा

हां तो मैंने कल ही आपसे कहा था ना कि मैं घूमने जा रहा हूं....अपनी पिछली पोस्‍ट चढ़ाने के बाद मैं फ़ौरन गाड़ी में जाके अपनी सीट पर बैठ गया । आगे बढ़ने से पहले दो बातों के जवाब दे दूं । IMG_5149

रंजन अंकल..मैं मम्‍मी-पापा के साथ पूरा गया तो था, पर पापा की ऑफीशियल-ट्रिप उतनी मज़ेदार ट्रिप नहीं है कि चर्चा की जाए । और पाब्‍ला अंकल मेरे माथे पर जो निशान आप देख रहे हैं, असल में वो मेरी किसी शरारत से लगी चोट नहीं है । मम्‍मी 'डिठौना' लगाती हैं फिर उस पर टैल्‍कम-पाउडर लगा देती हैं ताकि काजल फैल ना सके । वरना मैं अपने हाथों से काजल को फैलाकर काले मुंह का बंदर बन जाता
हूं ।

घर से निकलकर हम पहुंचे वेस्टर्न-एक्‍सप्रेस-हाईवे । हाईवे पहुंचकर जब गाड़ी दौड़ने लगी तो मेरी मस्‍ती शुरू हो गयी । पता है मैंने अपनी मम्‍मी की आंख पर अपना सिर भी टकरा दिया था । मुझे तो कुछ नहीं हुआ पर मम्‍मी को थोड़ी देर के लिए दर्द हुआ । कित्‍ती नाज़ुक हैं ना मेरी मम्‍मी । फिर हम ऋत्विक भैया के स्‍कूल पहुंचे । और उन्‍हें पिक-अप करते हुए आगे बढ़े ।

गोरेगांव पहुंचे तो हमने सोचा एक ब्रेक लिया जाए । ओबेरॉय मॉल के सामने रूककर मैं पापा के कह रहा हूं--'अंदर चलिए ना' । ये फ़ोटो ऋत्विक भैया ने खींची है । IMG_5150पापा ने देखा कि गाड़ी के ग्‍लास में हम दोनों बढिया दिख रहे हैं । तो उन्‍होंने ख़ुद ही एक तस्‍वीर खींच डाली । ध्‍यान से देखिए मैं कैमेरा छीनने की कितनी कोशिश कर रहा हूं । IMG_5152ओबेरॉय मॉल के प्रवेश-द्वार पर 'मैक्‍डोनाल्‍ड' है । जहां 'ये' वाले अंकल जाने कितने दिनों से बैठे हैं । थकते तक नहीं । मैंने सोचा 'इनके' हाल-चाल पूछ लिए जाएं वो भी 'इन्‍हीं' की गोद में बैठकर ।
IMG_5154IMG_5157मैंने सोचा कि 'पत्‍थर-अंकल' की ये सजीली पोशाक ज़रूर 'टेस्‍टी' होगी । तो उसे मैंने उसे चखकर देख लिया ।   IMG_5155पत्‍थर-अंकल को चाटने के बाद जब हम चले तो मैं सो गया । जब मेरी नींद खुली तो देखा कि हम 'बांद्र-वरली-सी-लिंक' पर से गुज़र रहे हैं । मम्‍मा ने फौरन कैमेरा उठाया और चलती गाड़ी से ये तस्‍वीर खींची ।
IMG_5159 अब आप सोच रहे होंगे कि आखि़र हम जा कहां रहे हैं । ये जानने के लिए इंतज़ार कीजिए कल की मेरी 'पोस्‍ट' का । कैसी लगीं ये तस्‍वीरें । फिलहाल मैं ऊधम मचाने जा रहा हूं । मैं जादू हूं ना कुछ भी कर सकता हूं ।

08 December 2009

अहा........जादू चला घूमने

आप तो जानते ही हैं कि मैं रहता हूं बंबई में, oh I mean मुंबई ।


यहां अगर एक छोर से दूसरे छोर तक जाएं तो बड़ा समय लगता है । आज सबेरे-सबेरे तय हुआ है कि हम लोग घूमने जायेंगे । मैंने इतनी मस्‍ती की कि मम्‍मी-पापा तयशुदा वक्‍त से एक घंटे लेट हो चुके हैं । इस तस्‍वीर में देखिए कि मैं एकदम सीधा-सादा बच्‍चा तैयार होकर बैठा हूं । बस निकल रहा हूं । शाम को लौटूंगा तो बाकी बातें बताऊंगा ।  

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वैसे इतना बताता जाऊं कि जहां भी जा रहा हूं उसके लिए आज जिंदगी में पहली बार मैं बांद्रा-वरली-सी-लिंक पार करूंगा । इंतज़ार कीजिए अगली पोस्‍ट का । तो अब आपका ये जादू चला घूमने । आप क्‍या कर रहे हैं बताईये बताईये ।

 

 

 



मैं जादू हूं ना, मैं कुछ भी कर सकता हूं ।

06 December 2009

जादू-जी और पारले-जी

जब से मेरा वॉकर आया है मेरी तो मौज हो गयी है । पहले मैं ज़मीन पर रेंगते हुए मौज-मस्‍ती करता था । अख़बार से लेकर मोबाइल और कलम से लेकर बरतन तक हर चीज़ को अपने मुंह में डाल लेता था । लेकिन वॉकर के आने के बाद मैं पूरे घर में चहलक़दमी करता हूं । और क्‍या करता हूं बताऊं क्‍या :



1. किचन में जाकर ट्रॉलीयों को खोल लेता हूं ।
2. पापा की कंप्यूटर-ट्रॉली पर जाकर की-बोर्ड की पिटाई करता हूं
3. सोफे पर रखी हर चीज़ का बुरा हाल करता हूं ।
4. मौक़ा मिलते ही बाल्टियों के भीतर हाथ डाल देता हूं । ‍
5. सेन्‍टर-टेबल पर रखी हर चीज़ पर हमला कर देता हूं ।


कल रात की मज़ेदार बात सुनिए । मम्‍मी किचन में थीं और पापा अपने कंप्‍यूटर पर कुछ कर रहे थे ( ज़्यादातर वो कंप्‍यूटर पर ही तो काम करते रहते हैं ) हम बाहर से घूमकर आए थे । मम्‍मा 'जिगर अंकल' ( हमारे नियमित ग्रॉसरी-स्‍टोर वाले) से 'पारले-जी' का पैकेट लाईं थीं और बेख़बरी में उन्‍होंने पैकेट रखा सेन्‍टर-टेबल पर और मुझे वॉकर पर रख दिया फिर लग गयीं रसोई में 'डिनर' तैयार करने । मैंने पहले तो यहां-वहां हाथ मारा । मोबाइल-चार्जर का वायर खींच दिया । अख़बार को तोड़-मरोड़ कर फेंक दिया । रिमोट को अपने क़ब्‍ज़े में कर लिया । उसके बाद मेरी नज़र पड़ी पारले-जी के पैकेट
पर । 

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जब हम घूम रहे थे तो मम्‍मा ने पैकेट को खोलकर एक दो बिस्किट मुझे खिला दिये थे, यानी पैकेट खुला हुआ था और जल्‍दी में यहीं मम्‍मा से ग़लती से हो गयी । मैंने पैकेट
उठाया और उसमें से बिस्किट निकाल लिए ।  IMG_5054अब बिस्किट तो होते ही खाने के लिए हैं । और जब इस तरह ख़ज़ाना हाथ लग जाए तो भला कोई मौक़ा छोड़ता है । बस मैंने भी बिस्किटों की दावत उड़ानी शुरू कर दी । IMG_5055एक एक करके कई बिस्किटों को चखा और रख दिया । फिर सोचा कि सारे बिस्किट खाली कर दिये जाएं तो कैसा रहे । तो मैंने पूरा पैकेट ही उलट दिया । IMG_5062पैकेट खाली हो गया, अब बचा रैपर । हर चीज़ के रैपर में मेरी बड़ी दिलचस्‍पी रहती
है । मैंने सोचा कि बिस्किट तो चख लिए पर अब पैकेट भी तो चखकर देखा जाए ।

IMG_5064फिर लगा 'अरे बाप रे' ये तो बड़ी गड़बड़ हो गयी । मैंने तो सारा घर गंदा कर दिया । अब सफ़ाई कौन करेगा ।
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मैं जादू हूं ना कुछ भी कर सकता हूं ।

28 November 2009

जादू का मॉर्निंग-वॉक

जब हम इलाहाबाद गए थे तो डॉक्‍टर मामा ने मम्‍मी से कहा था कि जादू के लिए अब 'वॉकर' ख़रीदने का वक्‍त आ गया है । फिर अभी कुछ दिन पहले उन्‍होंने फ़ोन पर भी कहा कि बढिया 'झालरदार' वॉकर ख़रीदा जाए, ताकि जादू मज़े से घर में घूम सके । दरअसल मैं घिसट-घिसटकर आजकल पूरे घर में घूमता हूं । और रसोई मेरी पसंदीदा जगह है । इसलिए हॉल से सीधे रसोई की तरफ़ भागता हूं मैं । ऐसे में अकसर मेरा ध्‍यान ऐसी चीज़ों पर जा सकता है जिनसे चोट लग सकती है । जैसे कि तीन दिन पहले मैं 'गाव-तकिए' या 'मसनद' पर चढ़ कर दूसरी तरफ़ उतर गया । ज़ाहिर है कि सिर के बदल गिर भी सकता था । इसी तरह से मैं 'सैटी' पर हाथ रखकर एकदम खड़ा हो
गया । और जब टेलीफोन की बेल बजी तो एकदम चौंककर पीछे हटा और गिरने की बजाए बैठ गया । गिरता तो मेरे सिर में चोट लगती और मैं ज़ोर-ज़ोर से रोता ।

इसलिए मेरे लिए कल रात एक 'वॉकर' ख़रीद दिया गया है । आज सुबह से मैंने इस पर खेलना भी शुरू कर दिया है । ये देखिए ।

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मेरे वॉकर पर डॉक्‍टर मामा के कहे मुताबिक़ काफी चीज़ें लगी हैं । और खींच-तान करके मैं उन्‍हें तोड़ने पर उतारू हूं । उम्‍मीद है कि दो तीन दिनों में मैं इसे तोड़
डालूंगा ।
IMG_4990 कहिए ये पोज़ कैसा लगा । मेरी नज़र पापा के कैमेरे पर हमेशा ही रहती है । मैं चाहता हूं कि इस कैमेरे को खाकर देखूं । इसका स्‍वाद अच्‍छा ही लगता होगा । क्‍योंकि तस्‍वीरें इत्‍ती अच्‍छी जो आती हैं कैमेरे से ।
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IMG_4994 मम्‍मी की तरफ़ देखकर हंस रहा हूं मैं । लेकिन मम्‍मी को 'खु़श' करने के लिए नहीं । दरअसल वॉकर पर मुझे मज़ा बहुत आ रहा है ।
IMG_4999 अच्‍छा तो मैं चला 'वॉक' करने । आपने आज 'मॉर्निंग-वॉक' की क्‍या । क्‍या कहा...नहीं की ? छी: गंदे । आज ईद है आप सबको ईद-मुबारक ।

16 November 2009

आज जादू मम्‍मी को 'हैपी-बर्थडे' कह रहा है !

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

आज मेरी मम्‍मी का जन्‍मदिन है । पिछली रात से ही मुझे बुख़ार आ गया । पता नहीं क्‍या वजह थी । पर रात को तीन बजे के बाद से मैं बहुत रो रहा था ।

मम्‍मी ने किसी तरह से चुप कराया । और सुलाया ।

 

 



सुबह डॉक्‍टर से बात की । और अब मैं इस वक्‍त उनके पास जा रहा हूं । हालांकि दिन में मैंने थोड़ी मस्‍ती भी की । आज मैं अपनी मम्‍मी को 'हैपी-बर्थडे' कहते हुए उनकी और मेरी कुछ तस्‍वीरें दिखला रहा हूं । देखिए ये स्‍लाइड-शो ।



मम्‍मी की बर्थडे-पार्टी बाद में होगी ।

इंतज़ार कीजिएगा तस्‍वीरों का ।

14 November 2009

नानी आप बहुत याद आओगी ।

 

पिछले कई दिनों से मैं अपने ब्‍लॉग पर आकर अपने बारे में आपको ख़बरें नहीं दे
सका । और इसकी एक वजह थी । दरअसल दस अक्‍तूबर को मेरी नानी जी का निधन हो गया और उसके बाद हम इलाहाबाद चले गए  । मेरी नानी वहीं तो रहती थीं ना । नानी पिछले दिनों यहां आई थीं और मैंने उनके साथ थोड़ी शरारतें भी की थीं । ये देखिए मैं नानी की गोद में किस तरह सो रहा हूं ।


IMG_4050 नानी जी मुझे देखने को कब से लालायित थीं । उनकी तबियत कई दिनों से ख़राब थी और इसके बावजूद वो बंबई आई थीं । मुझे तो यही लगता है कि वो मुझे देखने आई होंगी । जब वो बंबई आई थीं तो मुझे गोद में लेकर उन्‍हें कितना अच्‍छा लगा था मैं बता नहीं सकता । उन्‍होंने कितने सारे लोकगीत गाए थे मुझे गोद में लेकर । उनकी गोद में जाकर मैं ज़रा भी रोया नहीं था ।



मैंने सोचा था कि थोड़ा बड़ा हो जाऊंगा तो अपनी कहानियां नानी को सुनाऊंगा और नानी की कहानियां सुनूंगा । सर्दियों के दिनों में इलाहाबाद जाकर नानी के साथ दही-जलेबी खाऊंगा और छत पर धूप सेंकते हुए उनसे ढेर सारी बातें करूंगा । पर अब ये कभी नहीं हो पायेगा । नानी आप इत्‍ती जल्‍दी क्‍यों चली गयी ।


mai fotos 001                           मेरी मम्‍मी और नानी की ये तस्‍वीर देखिए ।

आज बाल दिवस है । आप सभी को शुभकामनाएं ।

16 September 2009

देखिए 'जादू' का फ़ैशन-शो

एक दिन पता है क्‍या हुआ । मेरी मम्‍मी ने मेरे बहुत सारे कपड़े निकाले । कुछ तो मम्‍मी-पापा ख़रीद कर लाए थे और कुछ दादा-दादी, नानी, बुआ, मौसी, मामा-मामी, चाचा-चाची, अंकल-आंटी वग़ैरह ने दिए थे । मम्‍मी ने ये सारे कपड़े करीने-से रख दिये थे क्‍योंकि इनमें से ज्‍यादातर मेरे नाप के नहीं थे । मैं छोटा-सा जो था ना । पर अब मैं बड़ा होता जा रहा हूं । मम्‍मी कह रही थीं कि ''आज निकालेंगे-कल निकालेंगे'' सोचते-सोचते दिन बीते जा रहे हैं । इसलिए आज ही सारे कपड़े 'चेक' किये जाएं कि इनमें से कौन-से कपड़े जादू को आते हैं और कौन-से नहीं आते हैं ।

जैसे ही मम्‍मी ने कपड़े निकाले मैंने फौरन उन पर हमला करके उनकी 'तह' ख़राब कर दी । 
aमम्‍मी ने मेरे नाप के कपड़ों को एक तरफ़ तह लगाकर रख दिया और नाप-से कुछ बड़े कपड़ों को दूसरी तरफ रख दिया । लेकिन मैंने फिर उन पर 'हमला' कर दिया । और उनके बीच कैसे घुस गया ये देखिए ।
bये क्रम देर तक चलता रहा । मम्‍मी तह करतीं, कपड़े जमातीं और मैं उनके बीच जाकर सब ख़राब कर देता । मम्‍मी ने पहले तो आंखें दिखाईं पर फिर उनको मेरी ये 'अदा' अच्‍छी लग गयी और उन्‍होंने मेरी ढेर सारी तस्‍वीरें खींच लीं । 
cकभी मैं किसी 'कैप' या टोपी को पहनकर देखता तो कभी किसी कपड़े को चखने की कोशिश करता । इस दौरान मैंने खूब 'शोर' भी करता रहा । dकपड़ों की क्‍या हालत हुई ये तो आप समझ सकते हैं  । पर मम्‍मी को मैं कितना तंग करता हूं इसकी शायद आप कल्‍पना भी नहीं कर सकते । मैं जादू हूं ना मैं कुछ भी कर सकता हूं ।e 

fअब तक मम्‍मी ने कपड़ों का 'सिलेक्‍शन' कर लिया था । अब बारी थी उनको पहनकर देखने की यानी 'फ़ैशन शो' की । चूंकि मैंने अभी चलना सीखा नहीं है...छोटा-सा तो हूं, इसलिए मेरा फैशन शो कुछ अलग तरह का था । उसकी तस्‍वीरें देखने के लिए आईये 'जादुई तस्‍वीरों' पर ।

 



बताईये कैसी लगी ये पोस्‍ट । क्‍या आप अपने कपड़ों का इस तरह 'सिलेक्‍शन' करते
हैं ।

11 September 2009

फोटोग्राफर को छकाया, फोटो देखकर मज़ा आया

जिस दिन मेरा छमाही बर्थडे था, उस दिन आपको बताया था ना कि मैं 'फोटो-स्‍टूडियो' गया था । और किस तरह मैंने फोटोग्राफर रवि अंकल को तंग किया था । आखिरकार मेरी तस्‍वीरें आ गयी हैं । यहां चढ़ाने में ज़रा देर हो गयी । लेकिन मैं आपको ये तस्‍वीरें दिखाने के लिए बहुत दिनों से बेक़रार था ।

ये देखिए इस तस्‍वीर के लिए मैंने रवि अंकल को बड़ा सताया था । क्‍योंकि वो बोलते थे मेरी तरफ देखो और मैं दूसरी तरफ देखता था जहां नीले लाल परदे टंगे थे । बेचारे एक हाथ में कैमेरा पकड़े रहे और दूसरे हाथ से झुनझुना बजाते रहे । लेकिन जब मेरी मरज़ी हुई तभी मैंने देखा । रवि अंकल भी गुरू निकले । पल भर के लिए फिरी मेरी नज़र को उन्‍होंने बड़ी चतुराई से कैमेरे में क़ैद कर लिया । मेरे मम्‍मी-पापा इस तस्‍वीर को मुंबई के मेरे डॉक्‍टर अंकल (डॉक्‍टर देवांग शाह) को भी दे आए हैं । वो तीन चार महीनों से मेरी तस्‍वीर मांग रहे थे अपने क्‍लीनिक में लगाने के लिए ।
jadoo1वैसे रवि अंकल बढिया तस्‍वीरें खींचते हैं । है कि नहीं । आपको खिंचवानी है क्‍या 
हां तो मैं कह रहा था कि मैंने रवि अंकल को बड़ा सताया । एक तस्‍वीर में फोटोग्राफर अंकल चाह रहे थे कि मैं मुस्‍कुराऊं । पापा मुझे पीछे से पकड़े थे । दो तरफ से स्‍पॉट-लाइट की रोशनी आ रही थी । रिफ्लेक्‍टर लगे थे । एक रिफ्लेक्‍टर तो मेरी गोद के पास रखा था । जिसे मैंने मौक़ा लगते ही खींच लिया । बेचारे रवि अंकल को काफी परेशानी उठानी पड़ी । आखिरकार उन्‍होंने मजबूरी में ये फोटो ली जिसमें मेरे चेहरे के भाव ऐसे हैं जैसे कह रहा हूं---'जाने कहां फंस गया, ये रवि अंकल हैं या बंदर हैं, ये इतने चेहरे क्‍यों बना रहे हैं ।' jadoo1 001
आप बताईये आपको मेरी ये तस्‍वीरें कैसी लगीं । मेरे जीवन की 'फोटो-स्‍टूडियो' में खिंचाई गयी पहली तस्‍वीरें हैं ये ।

06 September 2009

जादू बन गए 'फलाहारी-बाबा'

आपका ये 'जादू' एक हफ्ते से अपने 'ब्लॉग' ग़ायब था । जी नहीं...ना तो जादू 'बीमार' था और ना ही कहीं 'टूर' पर गया था । ना ही जादू की कोई 'मीटिंग्‍स' चल रही थीं और ना ही जादू अपने 'काम' में बहुत ज्‍़यादा 'बिज़ी' था । दरअसल मम्‍मी-पापा पता नहीं क्‍यों 'बिजिया' गए थे । और मेरा 'डिक्‍टेशन' लेने वाला कोई नहीं था । फिर भला 'टाइपिस्‍ट' के बिना मैं लिखता कैसे । अपुन जैसे 'बड़े-लोग' तो 'डिक्‍टेशन' ही देते हैं ना ।

 


वैसे मम्‍मी कहती हैं कि आजकल 'जादू'  बाबा रामदेव जी का शिष्य बन गया है । यही नहीं मम्‍मी तो ये भी कहती हैं कि हमारा 'जादू' फलाहारी बाबा है । इन दोनों बातों की images ख़ास वजहें हैं । जहां तक 'फलाहारी बाबा' होने का सवाल है तो ये नाम मुझे इसलिए मिला क्‍योंकि मैं आजकल खुशी-खुशी केवल फल ही खाता हूं । उनमें मुझे सबसे ज्‍यादा पसंद हैं केले । वो भी बड़े वाले नहीं.....केरल और गुजरात से आने वाले 'इलायची केले' । हमारे शहर में इन्‍हें इलायची केले इसलिए कहते हैं क्‍योंकि ये बहुत छोटे-छोटे होते हैं । जब मम्‍मी मुझे ये केले 'मैश' करके खिलाती हैं तो मैं उनके हाथ से छीन-छीन कर खाता हूं । इसी तरह मुझे 'सेब का रस' भी पसंद है । 'चीकू' खाने में पहले थोड़े-से नखरे किए थे मैंने, पर अब खा लेता हूं । और हां 'पपीता' पापा थोड़ा-कच्‍चा लेकर आते हैं, जो कुछ दिन में पक जाता है और फिर मुझे दिया जाता है । इसका 'नशीला स्‍वाद' भी मुझे पसंद आ रहा है । 'अनार का रस' भी मेरा फेवरेट है । एक आंटी ने मम्‍मी को बताया कि 'जादू' को अंजीर चुसवाया जाए । मम्‍मी अंजीर को पकड़े रहती हैं और मैं उसे 'टीथर' समझके जमके चूसता-चबाता हूं । मौसमी फल मैं सभी मज़े से खा लेता हूं । लेकिन उन चीज़ों की फेहरिस्‍त ये रही--जो मुझे पसंद नहीं हैं । ये सब मैंने फिलहाल 'रिजेक्‍ट' किये हुए हैं---

1. दाल-चावल, चाहे सादे हों या मैश किए हुए । ( मम्मी अब भी बहला के खिला देती है )
2. दलिया ।
3. कई तरह के आटे ( नाचणी/रागी, चावल का आटा वग़ैरह ) को मिलाकर तैयार किया गया खाद्य  ।
4. बहुत बारीक सूजी की एकदम पतली खीर ।
5. सेरेलेक राइस....जो मैंने पहले ही दिन 'आ--फू' करके फुहार बनाकर उड़ा दिया । इत्‍यादि ।

चूंकि मैं 'फल' ही खाता हूं इसलिए मम्‍मी कहती हैं कि 'जादू' 'फलाहारी-बाबा' है । अब सवाल ये है कि मैं बाबा रामदेव का शिष्‍य कैसे कहलाने लगा ।

'ज्ञान-अंकल' ने एक दिन लिखा था कि तुम 'भुजंगासन' बढिया करते हो । 'योग-गुरू' मानने का मन करता है । अरे अंकल, अब आप मुझे अपना गुरू बना ही लीजिए । मम्‍मी कहती हैं कि मैं बढिया तरीके से 'नौकासन' और 'मत्‍स्‍यासन' भी करता हूं । जल्‍दी ही मैं जब इलाहाबाद आऊंगा तो आपको सिखाऊंगा कि अपने ही पैरों के अंगूठे को कैसे चूसा जाए । कैसे मज़े से भुजंगासन और अन्‍य समस्‍त-आसन किए जाएं । फिलहाल आप सब देखिए मेरी योगासनों वाली तस्‍वीरें । 
IMG_3817इसी आसन को मैं इस तरह भी करता हूं । यहां देखने लायक़ है मेरी 'आंखों की अदा' IMG_3848-1अपने ही पैर का अंगूठा चूसने वाला 'आसन' । ख़ासतौर पर 'ज्ञान' अंकल के लिए ।   IMG_3547ये कौन-सा आसन है 'मंगेश-अंकल' बतायेंगे । वो योग-गुरू हैं ना । इसलिए ।
IMG_3727-1  
  ज़रा इस आसन को 'ट्राइ' करके देखिएगा । IMG_3851-1 ये '

योग-आसन' 'पी-टी' और 'डांस' का मिलाजुला रूप है ।

IMG_3432कृपया ये आसान-सा आसन स्‍नान के बाद ही करें ।
IMG_3422 अगर आप सभी ये आसन करेंगे तो 'जादू-बाबा' आपको यकीन दिलाते हैं कि इस तरह आपके होठों पर मुस्‍कान तैर जायेगी ।
IMG_3811 अब आप सभी को 'फलाहारी जादू बाबा' का नमस्‍ते । कल फिर मिलेंगे ।

जादू क्‍यों

हम हैं जादू के मम्‍मी-पापा ।
'जादू' अपनी मुस्‍कानें लेकर आया है हमारी दुनिया में ।
हम चाहते हैं कि ये मुस्‍कानें हम दुनिया के साथ बांटें ।

जादुई दिन

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