21 December 2009

जादू ने मनाया पापा का पहला जन्‍मदिन

बीस दिसंबर को पापा का बर्थडे होता है । उन्‍नीस की रात हम ज़रा घूमने गए थे । और खाना-वाना खा के सो गए । अचानक मम्‍मा ने पापा को रात बारह बजकर पांच मिनिट पर जगा दिया । पापा को इसकी उम्‍मीद नहीं थी । हॉल में केक रखा हुआ
था । केक देखकर पापा की बजाय मैं ज्‍यादा उत्‍साहित हो गया । और फौरन केक पर हमला करने आ पहुंचा । वो तो मम्‍मा ने किसी तरह रोक लिया । वरना मैं केक पर अपना हाथ छाप चुका होता ।
cake 1कुछ ही पलों बाद मुझे लगा कि अरे केक सामने है और मैं इतने सीधे-सादे तरीक़े से शांत बैठा हूं । भला ऐसा कैसे हो सकता है । तो एक बार फिर मैंने कोशिश शुरू कर
दी । cake 2इस बार मैं केक पर हाथ साफ़..मेरा मतलब हाथ छपाने में कामयाब हो गया । क्रीम हाथ में आया तो ज़ाहिर है कि उसे मुंह में लेना अच्‍छा रहता है । इस कोशिश में मैंने क्रीम अपने गाल पर लगा लिया । और बंदर बन गया । cake 3इतनी शरारतों के बाद आखिरकार केक काटने की बारी आई । और आधी रात के बाद पापा ने अपने पहले जन्‍मदिन का केक काटा । मेरे पैदा होने के बाद ये पापा का पहला जन्‍मदिन था । इसलिए मेरे लिए तो ये पापा का पहला जन्‍मदिन हुआ ना । ckae4फिर मुझे भी केक खिलाया गया । पता है । मैंने केक चेहरे पर लगा लगा कर खाया । और अपनी फेवरेट चीज़ों की लिस्‍ट में इसे भी शामिल कर लिया ।

पापा के बर्थडे की पार्टी बीस की शाम को हुई । उसकी रिपोर्ट मैं कल दूंगा । फिलहाल केक खा लिया है और मैं सोने जा रहा हूं ।

 

मैं जादू हूं ना मैं कुछ भी कर सकता हूं ।

12 December 2009

वरली सी-फेस पर जादू का फ़ोटो-सेशन

अपनी पिछली पोस्‍ट में मैंने आपको बताया कि किस तरह मैंने हाजी अली और महालक्ष्‍मी की सैर की । ज़ाहिर है कि इसके बाद मुझे भूख लग गई । वरली-सी-फेस पहुंचकर मम्‍मी-पापा ने मुझे खाना खिलाया । सविता मौसी हमें महालक्ष्‍मी मंदिर पर ही मिल गयी थीं । जब मैं खाना खा रहा था तब सविता मौसी और ऋत्विक भैया वरली सी-फेस पर समुद्र देख रहे थे । सब बड़े लोगों ने आलू के परांठे, आलू-बड़े वग़ैरह भी खाए ।
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इसके बाद वरली-सी-फेस पर तस्‍वीरें खींची गयीं । ये देखिए मैं ऋत्विक भैया की गोद में शरारत कर रहा हूं । पीछे आपको दू...र बांद्रा-वरली-सी-लिंक भी दिख रहा होगा ।
IMG_5175इसके बाद मम्‍मा और जादू की तस्‍वीर खींची गयी । मम्‍मी और जादू की और भी तस्‍वीरें खींची थी पापा ने ।
IMG_5176मम्‍मी-पापा की गोद में जादू । 
ऋत्विक भैया की खींची तस्‍वीरIMG_5181 जादू, मौसी की गोद में ।
IMG_5188समुद्र किनारे जाकर मैं सोच में पड़ गया कि मैं इत्‍ता छोटा क्‍यूं समंदर इतना बड़ा क्‍यों । IMG_5186समुद्र के किनारे जाकर डूबते हुए सूरज को देखना और अंगूठा चूसना बड़ा मज़ेदार होता है । आप भी करके देखिए । इसमें अपने आप हंसी भी आती है ।
IMG_5199मैं बदमाश हूं पक्‍का । मम्‍मी को दिया धक्‍का ।

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ये रहा मेरे पहले सैर-सपाटे का ब्‍यौरा । आगे-आगे देखिए मैं बंबई की कैसी सैर करवाता हूं आपको ।

10 December 2009

जादू पहुंचा हाजी-अली और महालक्ष्‍मी मंदिर

पिछली पोस्‍ट में मैंने अपने सैर पर निकलने का ब्‍यौरा दिया था और बताया था कि घर से निकलकर ऋत्विक भैया को स्‍कूल से पिक-अप करते हुए हम जा पहुंचे ओबेरॉय
मॉल । लेकिन अभी तक मैंने आपको ये नहीं बताया कि हम जा कहां रहे थे । बांद्रा-वरली-सी-लिंक को पार करके हम वरली आ पहुंचे और फिर पहुंचे हाजी-अली और महालक्ष्‍मी मंदिर । हम घर से यहीं आने के लिए तो निकले थे । 
IMG_5165हाजी अली का ये नज़ारा आपने बहुत सारी फिल्‍मों में देखा होगा । पापा कहते हैं कि ए.आर.रहमान ने फिल्‍म 'फि़ज़ां' में शानदार क़व्‍वाली बनाई थी हाजी अली की । समुद्र में जब दूसरी तरफ़ नज़र घुमाएं तो ये दृश्‍य दिखता है । सामने नेहरू प्‍लेनेटेरियम की गोल इमारत है ।  IMG_5166यहां इतनी कड़ी धूप थी कि मम्‍मी ने अपना दुपट्टा मुझे ओढ़ा दिया ।
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हम हाजी-अली के रास्‍ते पर आगे बढ़ रहे थे ।  तभी मैंने देखा कि एक नाव पर एक पक्षी बैठा था । मम्‍मी-पापा फ़ौरन समझ गए और उन्‍होंने मुझे बताया कि ये बगुला
है । IMG_5169हाजी-अली से लौटते हुए मैं शायद थक गया था इसलिए बाहर आते-आते मैं पापा की गोद में सो गया ।   IMG_5171

यहां से हम पहुंचे महालक्ष्‍मी-मंदिर । जहां बेहद भीड़ थी । शोर सुनकर मेरी नींद खुल गई ।   
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महालक्ष्‍मी मंदिर से हम हीरा-पन्‍ना मॉल में गए । और फिर वापसी । जिसके बारे में मैं कल आपको बताऊंगा । आपको मेरा ये सैर-सपाटा कैसा लगा ज़रूर बताईये । फिलहाल मैं चला अपने वॉकर पर मस्‍ती करने ।

मैं जादू हूं ना कुछ भी कर सकता हूं ।

जादू क्‍यों

हम हैं जादू के मम्‍मी-पापा ।
'जादू' अपनी मुस्‍कानें लेकर आया है हमारी दुनिया में ।
हम चाहते हैं कि ये मुस्‍कानें हम दुनिया के साथ बांटें ।

जादू-जिंगल

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