बीस दिसंबर को पापा का बर्थडे होता है । उन्नीस की रात हम ज़रा घूमने गए थे । और खाना-वाना खा के सो गए । अचानक मम्मा ने पापा को रात बारह बजकर पांच मिनिट पर जगा दिया । पापा को इसकी उम्मीद नहीं थी । हॉल में केक रखा हुआ
था । केक देखकर पापा की बजाय मैं ज्यादा उत्साहित हो गया । और फौरन केक पर हमला करने आ पहुंचा । वो तो मम्मा ने किसी तरह रोक लिया । वरना मैं केक पर अपना हाथ छाप चुका होता ।
कुछ ही पलों बाद मुझे लगा कि अरे केक सामने है और मैं इतने सीधे-सादे तरीक़े से शांत बैठा हूं । भला ऐसा कैसे हो सकता है । तो एक बार फिर मैंने कोशिश शुरू कर
दी ।
इस बार मैं केक पर हाथ साफ़..मेरा मतलब हाथ छपाने में कामयाब हो गया । क्रीम हाथ में आया तो ज़ाहिर है कि उसे मुंह में लेना अच्छा रहता है । इस कोशिश में मैंने क्रीम अपने गाल पर लगा लिया । और बंदर बन गया ।
इतनी शरारतों के बाद आखिरकार केक काटने की बारी आई । और आधी रात के बाद पापा ने अपने पहले जन्मदिन का केक काटा । मेरे पैदा होने के बाद ये पापा का पहला जन्मदिन था । इसलिए मेरे लिए तो ये पापा का पहला जन्मदिन हुआ ना ।
फिर मुझे भी केक खिलाया गया । पता है । मैंने केक चेहरे पर लगा लगा कर खाया । और अपनी फेवरेट चीज़ों की लिस्ट में इसे भी शामिल कर लिया ।
पापा के बर्थडे की पार्टी बीस की शाम को हुई । उसकी रिपोर्ट मैं कल दूंगा । फिलहाल केक खा लिया है और मैं सोने जा रहा हूं ।
मैं जादू हूं ना मैं कुछ भी कर सकता हूं ।










