14 May 2014

इन दिनों की जादू की ड्रॉइंग्‍स

जादू को ड्रॉइंग का शौक़ काफी समय से है।
आजकल चूंकि घर के नीचे वाली सड़क को कोलतार वाली सड़क से कॉन्‍क्रीट वाली सड़क में बदला जा रहा है। इसलिए जादू आते-जाते जो कुछ देखते हैं--उसे अपनी ड्रॉइंग्‍स में उतार देते हैं।

पेश हैं इन दिनों की जादू की ड्रॉइंग्‍स।

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ऊपर वाली ड्रॉइंग के बारे में जादू जी से पूछा गया कि यहां क्‍या हो रहा है। तो उन्‍होंने बताया कि ट्रेन रूकी हुई है। और ये जो नीचे अंकल दिख रहे हैं ये ड्राइवर अंकल हैं। जो अपने घर पानी लेने गये हैं। मून इसलिए क्‍योंकि ये रात का टाइम है।  

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इस ड्रॉइंग के बारे में जादू का कहना है कि सबसे ऊपर लाइन से सीमेन्‍ट मिक्‍सर आ रहे हैं। रोड बनाने के लिए सीमेन्‍ट मिक्‍स लाया जा रहा है। नीचे एक कार है। और सामने हैं बड़े बड़े पत्‍थर।

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इस ड्रॉइंग के बारे में जादू का कहना है कि इसमें दो सीमेन्‍ट मिक्‍सर हैं। नीचे एक बुलडोज़र है। और बांयी तरफ दो ट्रक हैं। एक ट्री है। अंकल इनके बीच से digging करने जा रहे हैं।

ड्रॉइंग का ये महाअभियान जारी है। बाक़ी की बातें और ड्रॉइंग फिर किसी दिन।

15 August 2013

जादू का Independence day.

independence day के मौक़े पर हम सब बच्‍चों को 'तिरंगी पोशाक' यानी Tricolour पहनकर आने को कहा गया था। सुबह तैयार होकर जब मैं निकला तो बारिश हो चुकी थी। और मौसम बड़ा खुशगवार था। मैंने पापा से कहा जल्‍दी से मेरे कुछ फोटोज़ ले लीजिए।

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इसके बाद मैंने पापा से कहा, मेरे ज़ेहन में एक बात आयी है। आजकल मेरे झेन (ज़ेहन) में पापा की तरह अकसर ही कोई ना कोई बात ज़रूर आती है। मैंने कहा, मैं जादू हूं, मैं कुछ भी कर सकता हूं। देखिए मैं आंखें बड़ी बड़ी करके फोटो भी खिंचवा सकता हूं।

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मेरे अंदर अकसर ही हंसी भर जाती है। एक दिन तो क्‍लास में टीचर पढ़ा रही थीं। तभी मेरे अंदर हंसी भर गयी। इतनी ज्‍यादा भरी कि रूक ही नहीं रही थी। मैं हंस पड़ा। टीचर ने पूछा--क्‍या हुआ। मैंने कहा, मेरे अंदर हंसी भर गयी थी। देखिए ना यहां भी कितनी सारी हंसी भर गयी है मेरे अंदर। क्‍या आपके अंदर भी कभी हंसी भरी है।
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बहुत बातें हों गयीं। आप सभी को Indenpendence day यानी आज़ादी का दिन मुबारक हो। पता है मैंने कल तिरंगा झंडा बनाकर उस पर कलर किया तो टीचर ने मुझे स्‍माइली दी। और बोला वेरी गुड।
Smile 

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03 June 2013

नये स्‍कूल में पहला दिन...

बहुत दिनों बाद आपसे बात हो रही है। दरअसल इस बीच मैं बहुत बिज़ी रहा। अब मेरा प्‍ले-स्‍कूल फिनिश हो चुका है। और मेरा एडमिशन नये बड़े स्‍कूल में हो चुका है। बल्कि समर-क्‍लासेस फिनिश भी कर लीं। और फिर एक महीने की छुट्टियां बिताकर मैं अब आज से नये स्‍कूल में जाने लगा हूं।

 

आज जब मैं सुबह सुबह स्‍कूल जाने के लिए तैयार हुआ तो जाने किस सोच में था।
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लेकिन फिर स्‍कूल का  पहला दिन याद आया। समर-स्‍कूल का। बड़ी सी बिल्डिंग। वहां की मौज-मस्‍ती। तो बस खुश हो गया और दौड़ पड़ा। IMG_0884
अरे मैंने आपको अपना स्‍कूल तो दिखाया ही नहीं।
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ये देखिए समर स्‍कूल का पहला दिन। प्‍ले-स्‍कूल के बाद एकदम नये बड़े स्‍कूल में जाना। और वॉचमैन अंकल का मुझे ले जाना। मम्‍मा पीछे रह गयीं बड़े से गेट के पीछे। पापा के पास कैमेरा था। उन्‍होंने ये तस्‍वीर खींची।
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उस दिन की मेरी और मम्‍मा की ये तस्‍वीर स्‍कूल के गेट की है।
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अब आज की तस्‍वीर देखिए। बस स्‍टॉप पर मैंने बस का इंतज़ार किस तरह किया।
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और ये मत सोचिए कि मैं अपनी सोच में ही डूबा और परेशान रहा। मैंने मस्‍ती भी की। और हंसा-मुस्‍कुराया भी।
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और फिर बस में बैठकर मैंने पापा से बाय-बाय किया इस तरह
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अब स्‍कूल में क्‍या चल रहा है ये सब कल बताऊंगा। बाय बाय।

आपका स्‍कूल कब शुरू हो रहा है। आपने अपना बैग, शूज, यूनिफॉर्म वग़ैरह तैयार किये या नहीं। 2013

जादू क्‍यों

हम हैं जादू के मम्‍मी-पापा ।
'जादू' अपनी मुस्‍कानें लेकर आया है हमारी दुनिया में ।
हम चाहते हैं कि ये मुस्‍कानें हम दुनिया के साथ बांटें ।

जादुई दिन

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